सोमवार को चैत्र प्रदोष का दुर्लभ संयोग, शिव आराधना से मिलेगा विशेष फल

सोमवार को चैत्र प्रदोष का दुर्लभ संयोग, शिव आराधना से मिलेगा विशेष फल

चैत्र मास में पड़ने वाला पहला प्रदोष व्रत इस वर्ष 16 मार्च 2026, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार स्वयं भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है, ऐसे में इस बार का प्रदोष व्रत ‘सोम प्रदोष’ कहलाएगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

त्रयोदशी तिथि और व्रत का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 16 मार्च की सुबह 09:40 बजे से शुरू होकर 17 मार्च की सुबह 09:23 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद आने वाले प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए व्रत और पूजा का मुख्य समय 16 मार्च को ही रहेगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

सोम प्रदोष व्रत के दिन शाम 06:30 बजे से रात 08:54 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिव पुराण में भी सोमवार को आने वाले प्रदोष व्रत को विशेष महत्व दिया गया है।

चंद्र दोष से राहत के उपाय

जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष है या जो मानसिक तनाव और ज्यादा सोचने की समस्या से परेशान रहते हैं, वे इस दिन चंद्र देव के मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः” या “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके अलावा शिवलिंग पर दूध में काले तिल मिलाकर अभिषेक करना या बेलपत्र पर सफेद चंदन से ‘राम’ लिखकर अर्पित करना भी शुभ माना गया है।

व्रत के दौरान क्या खाएं

प्रदोष व्रत में दिनभर संयम और सात्विकता का विशेष महत्व होता है। सुबह और शाम दोनों समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। व्रत में फल, दूध-दही, आलू, साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना खीर, मखाने की खीर या कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाए जा सकते हैं। सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अनाज, साधारण नमक, लाल मिर्च और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।

धार्मिक मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत पर सच्चे मन से शिव-पार्वती की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।