स्क्रीन से बाहर आया मनोरंजन का नया दौर: लाइव इवेंट्स में 44% उछाल, 1.45 लाख करोड़ का बाजार

स्क्रीन से बाहर आया मनोरंजन का नया दौर: लाइव इवेंट्स में 44% उछाल, 1.45 लाख करोड़ का बाजार

डिजिटल युग के बावजूद भारत में अब लोग सिर्फ कंटेंट देखने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि उसे जीना पसंद कर रहे हैं। फिक्की-ईवाई की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में लाइव इवेंट्स ने 44% की तेज़ बढ़त दर्ज की, जो पूरे एंटरटेनमेंट सेक्टर में सबसे ज्यादा रही। मीडिया और मनोरंजन उद्योग जहां कुल मिलाकर 9% बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, वहीं लाइव इवेंट्स ने इस ग्रोथ को पीछे छोड़ दिया। इस सेगमेंट में टिकटेड शो, भव्य शादियां, धार्मिक आयोजन और सरकारी कार्यक्रमों पर बढ़ते खर्च ने बड़ा योगदान दिया।

खासतौर पर महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कॉन्सर्ट्स ने इस उछाल को नई गति दी। इन आयोजनों से टिकट बिक्री और स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। युवाओं में ‘एक्सपीरियंस’ आधारित खर्च की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जो इस बदलाव का मुख्य कारण बन रही है। लाइव इवेंट इंडस्ट्री का आकार 2025 में लगभग 145 अरब रुपये तक पहुंच गया है और अनुमान है कि 2028 तक यह 196 अरब रुपये को पार कर जाएगा। यह ट्रेंड अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में 20 से ज्यादा शहर बड़े आयोजनों की मेजबानी करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, 10,000 से अधिक दर्शकों वाले बड़े कॉन्सर्ट्स की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी। 2025 में जहां ऐसे लगभग 130 शो हुए, वहीं 2028 तक इनकी संख्या 200 से अधिक होने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इस सेक्टर के लिए बाधा नहीं बल्कि मददगार साबित हो रहे हैं। सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाएं इवेंट्स की पहुंच बढ़ा रही हैं, जिससे टिकट की मांग में इजाफा हो रहा है। ‘फिजिटल’ मॉडल—यानी फिजिकल और डिजिटल अनुभव का मिश्रण—अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

भारत में लाइव इवेंट्स की ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा हाथ वेडिंग इंडस्ट्री और धार्मिक पर्यटन का है। महंगी शादियों और बड़े धार्मिक आयोजनों ने इस सेक्टर को मजबूत आधार दिया है, जिससे यह एक स्थिर और तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन गया है। हालांकि, इस तेज़ रफ्तार के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। बड़े इवेंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, विदेशी कलाकारों की ऊंची लागत और जटिल नियम-कानून इस इंडस्ट्री की ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं।