थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि से बढ़ सकती है ऊर्जा और बेहतर हो सकता है मूड, नई रिसर्च में खुलासा
अगर आपको दिनभर थकान, सुस्ती या कम ऊर्जा महसूस होती है, तो अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करना फायदेमंद साबित हो सकता है। एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज के बिना भी हल्की शारीरिक गतिविधियां इंसान के मूड और ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर के सामान्य काम करना या कुछ देर सक्रिय रहना भी शरीर और दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। ऑफिस का काम, ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। ऐसे में यह शोध इस बात पर ध्यान दिलाता है कि फिट रहने के लिए हमेशा कठिन वर्कआउट जरूरी नहीं होता, बल्कि रोजमर्रा की छोटी गतिविधियां भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह अध्ययन नेचर ह्यूमन बिहेवियर जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोध में यूरोप, अमेरिका और जर्मनी समेत कई देशों के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। वैज्ञानिकों ने 8 हजार से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया और यह समझने की कोशिश की कि दैनिक जीवन में होने वाली गतिविधियां लोगों की मानसिक स्थिति, ऊर्जा और भावनात्मक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित करती हैं।
स्मार्टफोन और फिटनेस डिवाइस से जुटाया गया डेटा
रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्मार्टफोन और फिटनेस ट्रैकिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया गया। इन उपकरणों की मदद से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि लोग दिनभर में कितने सक्रिय रहते हैं और उनकी गतिविधियों का उनके मूड पर क्या असर पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से किसी न किसी रूप में शारीरिक गतिविधि करते हैं, उनमें सकारात्मक भावनाएं और ऊर्जा का स्तर अधिक पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर को सक्रिय रखने से दिमाग पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति खुद को अधिक उत्साहित महसूस कर सकता है।
इस अध्ययन में शामिल करीब 95 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि सक्रिय रहने के दौरान उन्हें ज्यादा ऊर्जा महसूस हुई। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति रोज घंटों जिम में बिताए। दिन में कुछ समय पैदल चलना या सामान्य गतिविधियों में शामिल रहना भी मानसिक ताजगी देने में मदद कर सकता है।
मूड और शारीरिक गतिविधि का है गहरा संबंध
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि शारीरिक गतिविधि और मूड के बीच दोतरफा संबंध होता है। जब लोग सक्रिय रहते हैं तो उनका मूड बेहतर होता है, वहीं जब व्यक्ति पहले से सकारात्मक महसूस करता है तो वह ज्यादा एक्टिव रहने के लिए प्रेरित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक सकारात्मक चक्र की तरह काम करता है। थोड़ी गतिविधि से शरीर में ऊर्जा का अनुभव बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति और अधिक सक्रिय होने के लिए प्रेरित होता है। इसी तरह अच्छा मूड व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में बेहतर आदतें अपनाने में मदद करता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए केवल भावनात्मक उपाय ही पर्याप्त नहीं होते। शरीर को सक्रिय रखना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कम फिटनेस वाले लोगों को मिला ज्यादा फायदा
अध्ययन में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि जिन लोगों की शुरुआती फिटनेस कम थी, उन्हें छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों से भी अधिक लाभ मिला। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों ने लंबे समय से व्यायाम नहीं किया है, वे भी धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में बदलाव करके सकारात्मक असर महसूस कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआत में बहुत ज्यादा कठिन व्यायाम करने के बजाय छोटे लक्ष्य बनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। जैसे थोड़ी दूरी तक पैदल चलना, नियमित अंतराल पर अपनी सीट से उठना या घर के कामों में सक्रिय भाग लेना शरीर को बेहतर तरीके से सक्रिय रख सकता है।
रिसर्च यह संकेत देती है कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए छोटे कदम भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खासतौर पर उन लोगों के लिए जो किसी कारण से नियमित एक्सरसाइज नहीं कर पाते, रोजमर्रा की गतिविधियां एक आसान विकल्प बन सकती हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया क्यों जरूरी है एक्टिव रहना
अमेरिका के पेनिंगटन बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर की वैज्ञानिक अमांडा स्टायानो ने बताया कि सामान्य जीवन की छोटी-छोटी गतिविधियां भी इंसान की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक की मदद से अब वैज्ञानिक यह बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं कि लोगों की गतिविधियां उनके व्यवहार और भावनाओं को कैसे प्रभावित करती हैं।
स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस ने शोधकर्ताओं के लिए रोजमर्रा की गतिविधियों का अध्ययन आसान बना दिया है। पहले जहां लोगों की गतिविधियों को मापना कठिन होता था, वहीं अब लगातार डेटा के आधार पर यह समझना संभव हो गया है कि शारीरिक सक्रियता और मानसिक स्थिति के बीच क्या संबंध है।
दैनिक जीवन में कैसे बढ़ाएं शारीरिक गतिविधि?
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए जीवनशैली में छोटे बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति तुरंत कठिन एक्सरसाइज शुरू करे। अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे सक्रियता बढ़ाना बेहतर तरीका माना जाता है।
दिन में कुछ समय पैदल चलना, लंबे समय तक बैठे रहने से बचना, छोटे काम खुद करना और नियमित रूप से शरीर को हिलाते-डुलाते रहना ऊर्जा स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान और तनाव को नियंत्रित करना भी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
AI और डिजिटल दौर में बढ़ी एक्टिव रहने की जरूरत
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं लोगों की शारीरिक गतिविधियों को भी कम किया है। घर से काम करने की सुविधा और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के कारण कई लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं। ऐसे में रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहने की आदत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य से जुड़े अध्ययनों में डिजिटल डिवाइस की भूमिका और बढ़ सकती है। इनकी मदद से लोग अपनी गतिविधियों को समझ सकते हैं और अपनी जीवनशैली में जरूरी सुधार कर सकते हैं।
शारीरिक गतिविधि से जुड़ी यह रिसर्च बताती है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए बड़े बदलावों की शुरुआत छोटे कदमों से भी की जा सकती है। नियमित रूप से सक्रिय रहना न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को अधिक सकारात्मक महसूस कराने में मदद कर सकता है।
(Photo : AI Generated)




