चंबा। अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला केवल चंबा की पहचान नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। इस बार मेले की शोभायात्रा में भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। चंबा में पत्रकारों और लोगों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मिंजर मेला किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है और इसमें सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेले की शोभायात्रा से भाजपा विधायकों का दूर रहना उनकी सोच और नाराजगी को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिंजर मेले की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। यह ऐसा आयोजन है, जिसमें राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर सभी वर्गों और दलों के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता और कार्यकर्ता भी पहले से इस आयोजन का हिस्सा बनते रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा के तीनों विधायकों के शोभायात्रा में शामिल नहीं होने से कई सवाल खड़े हुए हैं। सुक्खू ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों में राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे पर्व समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के तीनों विधायकों पर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के मुद्दे प्रभावी तरीके से न उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने उन्हें अपनी समस्याओं और जरूरतों को विधानसभा तक पहुंचाने के लिए चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये विधायक सदन में या सार्वजनिक मंचों पर वास्तविक मुद्दों को उठाने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी और दिखावे तक सीमित हैं। सुक्खू ने कहा कि जनता को अब यह तय करना होगा कि उसके प्रतिनिधि वास्तव में क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहे हैं या केवल राजनीति कर रहे हैं।
भरमौर के भाजपा विधायक डा. जनक राज को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल मरीज की पर्ची देखकर उसका इलाज नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक जांच सुविधाओं की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि चंबा मेडिकल कॉलेज में अब स्वास्थ्य सेवाओं और जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि मरीजों को गंभीर बीमारियों की जांच के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में चंबा मेडिकल कॉलेज की आवश्यकताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनके अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कई उपकरण लंबे समय से पुराने और खराब स्थिति में थे और उन्हीं के सहारे एक्स-रे सहित अन्य जांचें की जा रही थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अब मेडिकल कॉलेज के डायग्नोस्टिक सिस्टम को पूरी तरह बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत आधुनिक मशीनें और नई तकनीक उपलब्ध करवाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा मेडिकल कॉलेज में एम्स जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था केवल भवन बनाने से संभव नहीं है, बल्कि उसके लिए अत्याधुनिक मशीनरी, विशेषज्ञ चिकित्सक, जांच सुविधाएं और मजबूत डायग्नोस्टिक सिस्टम भी जरूरी है। सरकार का उद्देश्य चंबा और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
सुक्खू ने चुराह के भाजपा विधायक डा. हंसराज पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंदर विधायक अपनी बात जोरदार तरीके से रखते हैं, लेकिन मिंजर मेले जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने से पीछे हट गए। मुख्यमंत्री ने तंज करते हुए कहा कि सदन में आवाज बुलंद करने वाले विधायक को चंबा के सांस्कृतिक पर्व में शामिल होने में क्या परेशानी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को राजनीति से अलग रखना चाहिए।
डल्हौजी के भाजपा विधायक डी एस ठाकुर को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधायक मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने संस्थान की समस्याओं और आवश्यकताओं को लेकर कोई सार्थक बैठक नहीं की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल किसी संस्थान का दौरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें वहां की समस्याओं को समझकर सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष मजबूती से उठाना चाहिए, ताकि समाधान निकाला जा सके।
सुक्खू ने कहा कि चंबा जिले के तीनों भाजपा विधायकों की जवाबदेही जनता के प्रति है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में जनता के सवाल उठाना, क्षेत्र की विकास योजनाओं के लिए प्रयास करना और स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा तथा रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना विधायकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा के विधायक इन जिम्मेदारियों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं निभा रहे हैं।
भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश भाजपा के भीतर कई गुट सक्रिय हैं और पार्टी में नेताओं के बीच आपसी खींचतान चल रही है। सुक्खू ने कहा कि भाजपा के भीतर नेतृत्व और टिकट को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने चुराह के विधायक डा. हंसराज का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट देगी या नहीं।
मुख्यमंत्री ने भरमौर के विधायक डा. जनक राज को लेकर भी भाजपा की अंदरूनी राजनीति का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि डा. जनक राज को पूर्व मंत्री जियालाल कपूर से राजनीतिक चुनौती का डर है। इसी तरह डल्हौजी के विधायक डीएस ठाकुर को लेकर भी सुक्खू ने कहा कि भाजपा के भीतर कई स्तरों पर खींचतान चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कई गुट बन चुके हैं और नेता एक-दूसरे को पीछे करने में लगे हुए हैं।
सुक्खू ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार के विकास कार्यों पर रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह लगातार राजनीतिक ड्रामे में उलझा हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल भाषण और आरोप-प्रत्यारोप नहीं चाहती, बल्कि वह अपने क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार देखना चाहती है।
मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति को लेकर उठने वाले सवालों पर भी विपक्ष को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो दशकों से उनकी संपत्ति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। सुक्खू ने दावा किया कि उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियां भी कार्रवाई और जांच कर चुकी हैं, लेकिन उनकी संपत्ति में किसी तरह की अनियमितता सामने नहीं आई। उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्षी विधायक और नेता अपनी संपत्ति को लेकर पूरी तरह पारदर्शी हैं तो उन्हें भी अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
सुक्खू ने कहा कि राजनीतिक जीवन में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण चीज है। उन्होंने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी संपत्ति पूरी तरह वैध तरीके से अर्जित की गई है तो उन्हें जनता के सामने उसका पूरा ब्योरा रखने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है तो कानून के तहत उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त कर जरूरतमंद और गरीब लोगों के हित में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक संसाधनों को किसी व्यक्ति विशेष के लाभ के लिए इस्तेमाल करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में जनता की संपदा को जनता के हित में वापस लाने के उद्देश्य से आए हैं, न कि अपने लिए संपत्ति जोड़ने के लिए।
मुख्यमंत्री ने आपदा के समय अपने व्यक्तिगत योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी ओर से 51 लाख रुपये की राशि दी थी। सुक्खू ने कहा कि आपदा के समय सरकार के साथ-साथ समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
चंबा में मुख्यमंत्री के इस बयान से मिंजर मेले के बहाने प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। एक तरफ सरकार मिंजर मेले को सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बता रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजनों में किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को अपनी विचारधारा और आपसी मतभेद पीछे छोड़कर शामिल होना चाहिए।
सुक्खू के बयान से यह भी स्पष्ट है कि चंबा जिले में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सार्वजनिक आयोजनों और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। मुख्यमंत्री ने जहां भाजपा विधायकों पर क्षेत्रीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से न उठाने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को लेकर भी कई दावे किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिंजर मेला चंबा की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी राजनीतिक दलों के नेता इस आयोजन में एक साथ शामिल होंगे और चंबा की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।
मिंजर मेले के मंच से मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा विधायकों पर किए गए हमले को आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चंबा जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक होने के कारण कांग्रेस सरकार के लिए विपक्ष के स्थानीय नेताओं को घेरना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने मिंजर मेले के बहाने जहां भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए, वहीं मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को लेकर अपनी सरकार की योजनाओं को भी सामने रखा।
फिलहाल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयान के बाद मिंजर मेले की शोभायात्रा में भाजपा विधायकों की गैरहाजिरी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक कार्यक्रम में अनुपस्थिति के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इसे भाजपा की राजनीतिक सोच और अंदरूनी स्थिति से जोड़ते हुए हमला बोला है। दूसरी ओर, चंबा के विकास, मेडिकल कॉलेज के आधुनिकीकरण और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन से जुड़ी घोषणाओं के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि क्षेत्र में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। अब इस बयान पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।




