हिमाचल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बड़ी पहल, मंडी में 45 हजार परिवारों का सर्वे पूरा; सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा

हिमाचल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बड़ी पहल, मंडी में 45 हजार परिवारों का सर्वे पूरा; सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा

हिमाचल प्रदेश सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को सरकारी सहायता बिना किसी बिचौलिये के सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार की नई पहल के तहत मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना को धरातल पर लागू करने के लिए महिलाओं के बैंक खातों की ई-केवाईसी और सीडिंग का अभियान तेज कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र महिलाओं तक सरकार की प्रत्येक आर्थिक सहायता समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे।

मंडी जिले में इस अभियान के तहत अब तक लगभग 45 हजार गरीब और बीपीएल परिवारों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से करीब 35 हजार महिलाओं और युवतियों के बैंक खातों को सरकारी पोर्टल से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 15 हजार महिलाओं के बैंक खातों की सीडिंग पूरी हो चुकी है, जबकि शेष लाभार्थियों की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी पात्र महिलाओं के बैंक खाते जल्द से जल्द पोर्टल से जोड़ दिए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी योजना की राशि सीधे उनके खातों में स्थानांतरित की जा सके।

प्रदेश सरकार का मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए योजनाओं का लाभ सीधे उनके हाथों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना को विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। बैंक खातों की सीडिंग पूरी होने के बाद महिलाओं को मिलने वाली विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगी, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।

इस अभियान के अंतर्गत विशेष रूप से 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की युवतियों और महिलाओं को शामिल किया जा रहा है। पात्र महिलाओं के दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद उनके बैंक खातों की ई-केवाईसी की जा रही है। इसके बाद इन खातों को योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, जिसके माध्यम से भविष्य में सरकार की किसी भी वित्तीय सहायता योजना का लाभ बिना देरी के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार सरकार चाहती है कि योजनाओं के लाभ वितरण में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए। इसलिए बैंक खातों की सीडिंग और सत्यापन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार बैंक संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

इस महत्वपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी गई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों की निगरानी में कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक विकास खंड में खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि पात्र महिलाओं के बैंक खाते समय पर पोर्टल से जोड़े जाएं और किसी भी योग्य परिवार का नाम सूची से छूटने न पाए। इसके लिए पंचायत स्तर पर भी कर्मचारियों की सहायता ली जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक यह प्रक्रिया आसानी से पहुंच सके।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक योजना तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। भविष्य में प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जाने वाली कई अन्य सामाजिक सुरक्षा और महिला कल्याण योजनाओं को भी इसी डेटाबेस से जोड़ा जा सकता है। इससे लाभार्थियों को बार-बार आवेदन करने या दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता कम होगी और योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल सकेगा।

सूत्रों के अनुसार सरकार इंदिरा गांधी प्यारी बहना सम्मान योजना के लाभार्थियों को भी इसी प्रक्रिया के माध्यम से जोड़ने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता भी सीधे महिलाओं के सत्यापित बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या देरी की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंक खातों की सीडिंग बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होता है, बल्कि लाभार्थियों तक राशि पहुंचने में लगने वाला समय भी कम हो जाता है। साथ ही फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने और वास्तविक पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

मंडी जिले में चल रहा यह अभियान आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी मॉडल बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अनेक महिलाओं के पास पहले बैंक खाते तो थे, लेकिन वे सरकारी पोर्टलों से जुड़े नहीं थे। अब इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों से अपील की जा रही है कि वे अपने बैंक खाते, आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं ताकि सीडिंग की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। पंचायतों और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी सही रूप में दर्ज कराएं।

जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) मंडी के परियोजना अधिकारी गोपी चंद पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों की सीडिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि पात्र महिलाओं की ई-केवाईसी पूरी करने के बाद उनके खातों को पोर्टल पर जोड़ा जा रहा है। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में सरकार की ओर से दी जाने वाली किसी भी आर्थिक सहायता का लाभ सीधे पात्र महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचे।

उन्होंने बताया कि प्रशासन निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र महिलाओं की बैंक खाता सीडिंग पूरी करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार प्रगति की समीक्षा भी की जा रही है।

सरकार का मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पात्र महिलाओं को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी। आने वाले समय में यदि सभी योजनाओं को इसी डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाता है तो प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन और अधिक प्रभावी तथा जवाबदेह बन सकेगा।