भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी को दोबारा शुरू करने की प्रस्तावित योजना का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से वित्त विभाग द्वारा जारी टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी के संचालन के लिए एकमात्र बिक्री एजेंट नियुक्त करने संबंधी ई-टेंडर 2026-डीटीएएल को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया है।
अनुराग ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि हिमाचल प्रदेश में लॉटरी को लेकर पिछले दो दशकों से अधिक समय से चली आ रही नीति को अचानक बदलना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में लॉटरी पर प्रतिबंध केवल किसी एक राजनीतिक दल का फैसला नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग विचारधारा वाली सरकारों ने भी लंबे समय तक इस नीति को कायम रखा है। उनके अनुसार, लॉटरी के सामाजिक दुष्प्रभावों को देखते हुए इसे राज्य से दूर रखने को लेकर हिमाचल की राजनीति में व्यापक सहमति रही है।
भाजपा सांसद ने वर्ष 1999 का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय लॉटरी के कारण कर्मचारियों, पेंशनरों, मजदूरों और युवाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे थे। उनके मुताबिक, इसी वजह से सरकार ने लॉटरी को बंद करने का निर्णय लिया था।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि बाद में वर्ष 2007 में जब लॉटरी को फिर से शुरू किया गया तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भी इसे दोबारा प्रतिबंधित कर दिया। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी अलग-अलग सरकारों ने राज्य की वित्तीय जरूरतों के बावजूद लॉटरी को दोबारा नियमित रूप से शुरू करने का रास्ता नहीं अपनाया।
उन्होंने कहा कि ऐसे में मौजूदा सरकार द्वारा सरकारी लॉटरी को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू करना गंभीर सवाल खड़े करता है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और संबंधित टेंडर प्रक्रिया को तुरंत समाप्त करे।
भाजपा सांसद ने विशेष रूप से ऑनलाइन लॉटरी के प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में रोजाना 12 तक ड्रॉ आयोजित किए जाने और साल में तीन बंपर ड्रॉ कराने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लॉटरी उपलब्ध होने पर यह गतिविधि केवल बिक्री केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों के मोबाइल फोन और घरों तक आसानी से पहुंच सकती है।
अनुराग ठाकुर ने आशंका जताई कि स्मार्टफोन के जरिए ऑनलाइन लॉटरी की आसान उपलब्धता से लोगों में जुए की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। उनका कहना है कि इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की संभावना है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राजस्व जुटाने के लिए ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जिसके सामाजिक प्रभाव लंबे समय तक सामने आ सकते हैं।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए भी लॉटरी के फैसले पर सवाल उठाए। ठाकुर के अनुसार, वर्ष 2026 में राज्य का कुल कर्ज बढ़कर लगभग 1,10,010 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और ऋण-जीडीपी अनुपात 42 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियां हैं और सरकार को इनका समाधान दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों के माध्यम से करना चाहिए।
सांसद ने कहा कि वित्तीय दबाव से निपटने के लिए लॉटरी को आय के प्रमुख साधन के तौर पर देखना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित लॉटरी व्यवस्था से सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, उनके अनुसार सकल बिक्री से प्राप्त राशि और सरकार को मिलने वाले वास्तविक शुद्ध राजस्व में काफी अंतर हो सकता है।
उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि लॉटरी से होने वाली कुल बिक्री में से पुरस्कार राशि, एजेंटों का कमीशन, प्रचार-प्रसार और प्रशासनिक खर्च जैसी मदों पर बड़ी राशि खर्च होती है। इन सभी खर्चों को निकालने के बाद सरकार के पास बचने वाला वास्तविक राजस्व सकल आंकड़े की तुलना में काफी कम हो सकता है। इसलिए उन्होंने सवाल उठाया कि सामाजिक जोखिमों के मुकाबले इतनी सीमित आय के लिए लॉटरी व्यवस्था को फिर से शुरू करना कितना उचित है।
अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री से कहा कि हिमाचल प्रदेश को अपने वित्तीय संकट से निपटने के लिए टिकाऊ और संरचनात्मक उपायों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो, रोजगार के अवसर बढ़ें और लंबे समय तक आय के स्थायी स्रोत विकसित हों।
उन्होंने तर्क दिया कि तत्काल राजस्व जुटाने के लिए अपनाए जाने वाले ऐसे उपाय, जिनसे समाज के कमजोर वर्गों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है, राज्य के व्यापक हित में नहीं हैं। ठाकुर ने सरकार से वित्तीय प्रबंधन, खर्चों में सुधार, राजस्व संग्रह बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने जैसे दीर्घकालिक विकल्पों पर ध्यान देने की अपील की।
भाजपा सांसद ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि लॉटरी को लेकर हिमाचल प्रदेश का अनुभव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। उनका कहना है कि यदि ऑनलाइन माध्यम से लॉटरी की पहुंच बढ़ती है तो इसकी निगरानी और नियंत्रण की चुनौती भी बढ़ सकती है। खासकर युवाओं और कम आय वाले परिवारों के बीच इसके प्रभाव को लेकर पहले से पर्याप्त सावधानी बरतना जरूरी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार लॉटरी टेंडर को तत्काल निरस्त करे और राज्य में इसे दोबारा लागू करने की प्रक्रिया पर रोक लगाए। ठाकुर ने कहा कि हिमाचल को ऐसे राजस्व स्रोतों की जरूरत है जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी जिम्मेदार हों।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार की वित्तीय स्थिति निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसका समाधान ऐसे माध्यमों से नहीं किया जाना चाहिए जो भविष्य में सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को खर्च और आय के बीच संतुलन सुधारने के लिए व्यापक वित्तीय सुधारों पर काम करना चाहिए।
उनके मुताबिक, हिमाचल प्रदेश की आर्थिक मजबूती के लिए पर्यटन, उद्योग, निवेश, रोजगार और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में संभावनाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी राजस्व वृद्धि का आधार मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर वित्तीय प्रबंधन होना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियां जिनसे लोगों में आर्थिक जोखिम बढ़ने की आशंका हो।
भाजपा सांसद ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से एक बार फिर अपील की कि वित्त विभाग द्वारा जारी ई-टेंडर 2026-डीटीएएल को बिना देरी के रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में दो दशक से अधिक समय से चली आ रही लॉटरी प्रतिबंध की नीति को समाप्त करने से पहले इसके आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों का भी गंभीर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के मौजूदा वित्तीय संकट से निपटने के लिए सरकार को तात्कालिक आय के बजाय ऐसे सुधारों पर ध्यान देना चाहिए, जो हिमाचल की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बना सकें। ठाकुर ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर पुनर्विचार करेंगे और लॉटरी टेंडर को वापस लेने का फैसला करेंगे।




