भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के प्रभावी होते ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। भारत के निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, वहीं भारतीय ग्राहकों को कई ब्रिटिश उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।
करीब साढ़े तीन साल चली बातचीत और कई दौर की चर्चाओं के बाद दोनों देशों ने इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया था। अब इसके लागू होने के साथ ही दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और यूके के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
इस समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा। इसका सीधा फायदा भारतीय उद्योगों को मिलेगा, क्योंकि उनके उत्पाद ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। दूसरी ओर, यूके से भारत आने वाले अधिकांश उत्पादों पर औसत शुल्क में भारी कमी की जाएगी, जिससे कई आयातित वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
ब्रिटेन की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने भी इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत और यूके की अर्थव्यवस्थाओं को नई गति देगी तथा निवेश और व्यापार के नए अवसर पैदा करेगी।
भारतीय बाजार में सबसे अधिक चर्चा ब्रिटिश व्हिस्की और लग्जरी कारों की कीमतों को लेकर हो रही है। समझौते के बाद स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाला ऊंचा आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। वर्तमान में इन उत्पादों पर लगने वाला शुल्क काफी अधिक है, लेकिन नए प्रावधानों के बाद इसकी दर में बड़ी कटौती होगी। इससे उपभोक्ताओं को प्रीमियम ब्रिटिश शराब पहले की तुलना में कम कीमत पर मिल सकती है।
इसी तरह जगुआर लैंड रोवर, रोल्स-रॉयस और अन्य ब्रिटिश लक्जरी वाहनों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। आयात शुल्क में कमी और विशेष कोटा व्यवस्था के कारण इन वाहनों की लागत घटने की संभावना है, जिससे भारतीय बाजार में उनकी कीमतें नीचे आ सकती हैं।
केवल व्हिस्की और कारें ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन से आयात होने वाले कई खाद्य उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं। चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन, लैंब, सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य प्रीमियम खाद्य वस्तुओं पर शुल्क कम होने का फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण, एयरोस्पेस से जुड़े उत्पाद और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान भी अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।
ब्रिटिश फैशन ब्रांड्स, कपड़े, फुटवियर, होम डेकोर उत्पाद और फर्नीचर की कीमतों में भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर कीमतें मिल सकती हैं।
दूसरी ओर, इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के निर्यात क्षेत्र को मिलने वाला है। टेक्सटाइल उद्योग को विशेष रूप से फायदा होने की संभावना है। ब्रिटेन में भारतीय कपड़ों, होम टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स पर लगने वाले शुल्क हटने से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे सूरत, लुधियाना, तिरुप्पुर और अन्य प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।
रत्न एवं आभूषण उद्योग भी इस समझौते से उत्साहित है। भारतीय ज्वेलरी और चमड़े से बने उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे।
ऑटो कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग सामान बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी यह समझौता लाभदायक माना जा रहा है। ब्रिटेन द्वारा आयात शुल्क समाप्त किए जाने से भारतीय मशीनरी, औद्योगिक उपकरण और ऑटो पार्ट्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इसका फायदा पुणे, चेन्नई, गुरुग्राम और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को मिल सकता है।
फार्मास्युटिकल सेक्टर को भी इस व्यापार समझौते से नई ताकत मिलने की उम्मीद है। भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए ब्रिटेन में मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। इससे भारतीय दवा कंपनियां वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकेंगी और निर्यात बढ़ा सकेंगी।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बासमती चावल, मसाले, चाय और समुद्री उत्पादों को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय किसानों और निर्यातकों को फायदा होगा। असम की चाय, गुजरात और केरल के समुद्री उत्पाद तथा विभिन्न राज्यों के मसाले ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
रासायनिक उद्योग भी इस समझौते के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल है। एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और विशेष रसायनों पर शुल्क में कमी से निर्यात बढ़ने की संभावना है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ मिल सकता है।
ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी भारत और यूके के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। दोनों देश सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं। इससे नई तकनीकों के विकास और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी फायदा होगा। नए बाजार मिलने से उनकी आय और निर्यात क्षमता बढ़ सकती है। चूंकि भारत के कुल निर्यात में MSME क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इस क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
रोजगार के मोर्चे पर भी FTA को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रम आधारित उद्योगों, खासकर टेक्सटाइल, चमड़ा और विनिर्माण क्षेत्र में नई नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं। उद्योग जगत का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन की गति तेज हो सकती है।
भारत और यूके के बीच यह समझौता 2025 में हस्ताक्षरित हुआ था। इसके बाद दोनों देशों में आवश्यक प्रक्रियाएं और मंजूरियां पूरी की गईं। भारत सरकार की कैबिनेट पहले ही इस समझौते को मंजूरी दे चुकी है, जबकि ब्रिटेन की ओर से भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। अब 15 जुलाई से इसके प्रावधान लागू हो जाएंगे।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को भी नई दिशा देगा। अनुमान है कि 2030 तक भारत और यूके के बीच कुल व्यापार का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को इसका दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में यूएई, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) जैसे साझेदारों के साथ भी इसी प्रकार के व्यापार समझौते किए हैं। अब सरकार यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों के साथ भी समान समझौतों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। भारत-यूके FTA को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।




