227.70 करोड़ की पाइपलाइन योजना पर चंडीगढ़ निगम में घमासान, अब खुलेगा प्रस्ताव का पूरा सच

227.70 करोड़ की पाइपलाइन योजना पर चंडीगढ़ निगम में घमासान, अब खुलेगा प्रस्ताव का पूरा सच

चंडीगढ़। चंडीगढ़ में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर प्रस्तावित 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर निगम सदन से प्रस्ताव पारित होने के बावजूद इस पर लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए अब नगर निगम प्रशासन ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कराने का फैसला किया है। निगम कमिश्नर अमित कुमार ने कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक मौजूदा 1200 एमएम आई/डी पीएससी पाइपलाइन को बदलने से जुड़े प्रस्ताव की विस्तृत फैक्ट फाइंडिंग के आदेश दिए हैं। इस जांच की जिम्मेदारी स्पेशल कमिश्नर हरप्रीत सिंह सूदन को सौंपी गई है और उन्हें एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, यह मामला नगर निगम सदन की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद ज्यादा तूल पकड़ गया। परियोजना को लेकर मेयर, पार्षदों और अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से निगम प्रशासन को कई अभ्यावेदन और आपत्तियां प्राप्त हुईं। इनमें सदन की बैठक में मौजूद पार्षदों के साथ-साथ उन पार्षदों की शिकायतें भी शामिल हैं जो बैठक के दौरान मौजूद नहीं थे। इतनी बड़ी राशि से जुड़ी परियोजना को लेकर उठे इन सवालों ने नगर निगम प्रशासन को प्रस्ताव की प्रक्रिया और उसके विभिन्न पहलुओं की दोबारा समीक्षा करने के लिए मजबूर किया।

कमिश्नर अमित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पेशल कमिश्नर को निर्देश दिया है कि परियोजना से संबंधित सभी रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाए। प्रस्ताव तैयार करने से लेकर उसे सदन में पेश किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में रखा गया है। अधिकारियों से आवश्यक जानकारी लेने के साथ-साथ परियोजना से संबंधित तकनीकी दस्तावेज, वित्तीय विवरण, प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और सदन के समक्ष रखी गई जानकारी की भी समीक्षा की जाएगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पाइपलाइन को बदलने की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई और परियोजना की अनुमानित लागत 227.70 करोड़ रुपये निर्धारित करने के पीछे क्या तकनीकी एवं वित्तीय आधार रहा।

नगर निगम प्रशासन की ओर से यह भी देखा जाएगा कि प्रस्ताव को सदन में लाने से पहले सभी जरूरी जानकारियां और दस्तावेज पार्षदों के सामने रखे गए थे या नहीं। इसके अलावा प्रस्ताव पर चर्चा और मंजूरी के दौरान निर्धारित नियमों तथा प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। निगम कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन से जुड़े बड़े वित्तीय फैसलों में पूरी पारदर्शिता बेहद जरूरी है। जनप्रतिनिधियों को किसी भी बड़े प्रोजेक्ट पर फैसला लेने से पहले उससे जुड़ी तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि निर्णय तथ्यों के आधार पर लिया जा सके।

कमिश्नर के निर्देशों के बाद अब इस बात की भी संभावना बढ़ गई है कि पाइपलाइन परियोजना का प्रस्ताव आगामी नगर निगम सदन की बैठक में फिर से चर्चा के लिए लाया जाए। निगम प्रशासन का मानना है कि किसी बड़े वित्तीय प्रस्ताव को दोबारा सदन के सामने रखने से पार्षदों को अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इससे सामूहिक निर्णय प्रक्रिया मजबूत होने के साथ-साथ परियोजना को लेकर उठ रहे संदेहों को भी दूर किया जा सकेगा।

कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक जाने वाली पाइपलाइन चंडीगढ़ की जलापूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसके प्रतिस्थापन से जुड़ी परियोजना का असर सीधे शहर की पानी की व्यवस्था पर पड़ सकता है। निगम प्रशासन के सामने एक तरफ मौजूदा पाइपलाइन की स्थिति और भविष्य की जलापूर्ति जरूरतों को देखते हुए जरूरी कदम उठाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर 227.70 करोड़ रुपये जैसे बड़े सार्वजनिक खर्च को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना भी जरूरी है। इसी वजह से अब जांच में तकनीकी आवश्यकता के साथ-साथ परियोजना की लागत और प्रक्रिया की वैधता पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इस बीच आम आदमी पार्टी ने निगम कमिश्नर की ओर से फैक्ट फाइंडिंग जांच के आदेश को अपनी राजनीतिक मुहिम की सफलता बताया है। आप पार्षद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता योगेश ढींगरा ने दावा किया कि उनकी पार्टी इस परियोजना को लेकर लगातार निगम प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से विरोध प्रदर्शन करने के अलावा लोकभवन की ओर मार्च किया गया और प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया था। उनके अनुसार, लगातार बनाए गए दबाव के बाद ही अब निगम प्रशासन ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है।

योगेश ढींगरा ने आरोप लगाया कि 227.70 करोड़ रुपये की लागत वाली पाइपलाइन बदलने की योजना को पर्याप्त चर्चा और पारदर्शिता के बिना जल्दबाजी में सदन से पारित कराया गया। उनका कहना है कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव पर सदन के प्रत्येक सदस्य को परियोजना की तकनीकी जरूरत, लागत का आधार और प्रस्ताव के पीछे की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए थी। उन्होंने मांग की कि फैक्ट फाइंडिंग जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और इसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि शहर के लोगों को भी पता चल सके कि परियोजना पर इतना बड़ा खर्च क्यों प्रस्तावित किया गया है।

आप की ओर से यह भी मांग उठाई गई है कि परियोजना से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट और खर्च का पूरा विवरण नगर निगम की विशेष बैठक में पार्षदों के सामने रखा जाए। पार्टी का कहना है कि यदि मौजूदा पाइपलाइन की हालत वास्तव में ऐसी है कि उसे बदलना जरूरी है तो प्रशासन को इसके तकनीकी प्रमाण सदन के सामने रखने चाहिए। वहीं यदि जांच के दौरान किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, प्रक्रियागत कमी या अन्य किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

विवाद के बीच अब निगम प्रशासन की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिक गई हैं। एक सप्ताह में रिपोर्ट सामने आने के बाद परियोजना से जुड़े कई सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा पाइपलाइन को बदलने की वास्तविक जरूरत क्या है, उसकी वर्तमान स्थिति कैसी है, नई पाइपलाइन की तकनीकी क्षमता क्या होगी और 227.70 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान किन आधारों पर तैयार किया गया।

इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि रिपोर्ट प्रस्ताव को सदन में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर क्या टिप्पणी करती है। यदि जांच में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आती हैं तो निगम प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, यदि परियोजना को तकनीकी और वित्तीय रूप से उचित पाया जाता है तो इसे नए सिरे से सदन के सामने रखकर आगे बढ़ाया जा सकता है।

फिलहाल नगर निगम प्रशासन ने जांच के जरिए पूरे विवाद के तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी है। इतने बड़े सार्वजनिक खर्च और शहर की मूलभूत जलापूर्ति व्यवस्था से सीधे जुड़े इस प्रोजेक्ट को लेकर अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं, बल्कि तकनीकी और वित्तीय तथ्यों की भी जांच होगी। आने वाले दिनों में फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट और प्रस्ताव की दोबारा सदन में होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि 227.70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना को मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाया जाएगा या इसमें किसी तरह का बदलाव किया जाएगा।