कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिलों में शामिल कांगड़ा में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए सरकार ने बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले की 232 ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। इन पंचायतों में कुल 16,064 कार्यों को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई है, जिसके लिए 300.32 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इस मंजूरी के बाद ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, यह राशि ग्रामीण विकास विभाग के तहत वीबीजी रामजी के अंतर्गत स्वीकृत वार्षिक और अतिरिक्त कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई है। जिला उपायुक्त हेमराज वैरवा की ओर से जारी स्वीकृति के बाद अब संबंधित विकास खंडों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत कार्य निर्धारित मानकों और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पूरे किए जाएं।
जिले की 232 पंचायतों में 16 हजार से अधिक विकास कार्यों को मंजूरी मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नालियों, रास्तों, जल निकासी, सामुदायिक परिसंपत्तियों और अन्य स्थानीय जरूरतों से जुड़े कार्यों को गति मिलने की संभावना है। इन कार्यों को पूरा करने के लिए संबंधित कार्यक्रम अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कांगड़ा जिले के अलग-अलग विकास खंडों में पंचायतों की संख्या और प्रस्तावित कार्यों के आधार पर राशि का आवंटन किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लंबागांव विकास खंड को सबसे अधिक राशि मिली है। यहां 51 पंचायतों में कुल 3,738 विकास कार्यों के लिए 68.69 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कार्यों और राशि दोनों के लिहाज से यह विकास खंड जिले में सबसे आगे है।
नगरोटा बगवां विकास खंड के लिए भी बड़े स्तर पर राशि स्वीकृत की गई है। यहां 35 पंचायतों में कुल 3,430 कार्य करवाए जाएंगे। इन कार्यों के लिए 67.37 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। पंचायत स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर कार्यों को मंजूरी मिलने से क्षेत्र में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की उम्मीद है।
धर्मशाला विकास खंड की 31 पंचायतों को भी विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया गया है। इस क्षेत्र में कुल 2,355 कार्यों के लिए 46.10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं देहरा विकास खंड की 59 पंचायतों में 3,397 कार्यों को मंजूरी मिली है और इनके लिए 45.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पंचायतों की संख्या के मामले में देहरा विकास खंड सबसे आगे है और यहां बड़ी संख्या में कार्यों को स्वीकृति दी गई है।
फतेहपुर विकास खंड में 35 पंचायतों के लिए 2,040 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों पर 51.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसी तरह बड़ोह विकास खंड की 21 पंचायतों में 1,106 विकास कार्यों के लिए 21.05 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस तरह जिले के सभी संबंधित विकास खंडों में पंचायतों की जरूरत और प्रस्तावित कार्यों के आधार पर राशि का वितरण किया गया है।
प्रशासन ने स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी होगा। बिना आवश्यक तकनीकी मंजूरी के काम शुरू नहीं किया जा सकेगा। इससे कार्यों की गुणवत्ता, लागत और तकनीकी मानकों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
विकास कार्यों के दौरान वन संरक्षण से संबंधित कानूनों और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी कार्य में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी की होगी। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले उससे जुड़े सभी वैधानिक पहलुओं की जांच कर ली जाए।
ग्रामीण विकास कार्यों में मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर भी आदेश में स्पष्ट व्यवस्था की गई है। ऐसी मशीनरी के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा, जिसके कारण स्थानीय श्रमिकों को काम से विस्थापित किया जा सकता है। योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने को महत्व दिया गया है। इसलिए ऐसे कार्यों में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य विकास कार्यों के साथ ग्रामीण परिवारों को रोजगार का लाभ उपलब्ध कराना भी है।
प्रशासन ने प्रत्येक स्वीकृत कार्यस्थल पर स्थायी सूचना पट्ट लगाने को अनिवार्य किया है। इस सूचना पट्ट पर कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, अब तक खर्च की गई राशि, निर्माण वर्ष तथा अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इससे स्थानीय लोगों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके क्षेत्र में कौन सा काम स्वीकृत हुआ है, उसकी लागत कितनी है और उस पर कितना खर्च किया गया है। इस व्यवस्था को विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वीकृत कार्यों में योजना के वित्तीय नियमों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार मजदूरी और सामग्री के बीच 60:40 का अनुपात बनाए रखना होगा। यानी कुल स्वीकृत खर्च में श्रमिकों से संबंधित मजदूरी का हिस्सा 60 प्रतिशत और सामग्री पर होने वाला खर्च 40 प्रतिशत निर्धारित अनुपात के अनुसार रखा जाना है। इस व्यवस्था से जहां स्थानीय श्रमिकों को अधिक रोजगार मिलने की संभावना है, वहीं विकास कार्यों में अनावश्यक मशीनरी के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण रहेगा।
जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे हों। 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए संबंधित कार्यक्रम अधिकारी और खंड विकास अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों की प्रगति की निगरानी करेंगे। समय पर कार्य पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की संभावना भी रहेगी।
कांगड़ा जैसे भौगोलिक रूप से बड़े और विविधतापूर्ण जिले में पंचायत स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में विकास कार्यों को मंजूरी मिलने से स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी लेकिन जरूरी परियोजनाएं अक्सर लोगों के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। ऐसे में पंचायतों के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य करवाने से विकास का लाभ अधिक व्यापक स्तर तक पहुंच सकता है।
300 करोड़ रुपये से अधिक की यह राशि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बड़ी संख्या में विकास कार्य शुरू होने से निर्माण गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर मजदूरी के अवसर पैदा होंगे। योजना के तहत श्रम आधारित कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिलने की संभावना है। इससे विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय आय के स्रोतों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
जिला प्रशासन का जोर इस बात पर है कि स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए और प्रत्येक परियोजना में वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाए। अधिकारियों को योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करने और कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी मंजूरी, वन कानूनों का अनुपालन, मजदूरी और सामग्री के निर्धारित अनुपात तथा सूचना पट्ट लगाने जैसी शर्तों को इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है।
जिला विकास अधिकारी अभिनीत कात्यान शर्मा ने भी स्वीकृत विकास कार्यों और राशि की पुष्टि की है। प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, कांगड़ा की 232 पंचायतों में स्वीकृत 16,064 कार्यों के लिए 300.32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब संबंधित विभाग और पंचायत स्तर के अधिकारी इन कार्यों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह मंजूरी इसलिए भी अहम है क्योंकि पंचायतों में विकास की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराना भी ग्रामीण विकास की बड़ी चुनौती है। स्वीकृत कार्यों में श्रम आधारित गतिविधियों पर जोर और मशीनरी के सीमित इस्तेमाल की व्यवस्था इस दिशा में अहम साबित हो सकती है।
अब आने वाले महीनों में प्रशासन के सामने इन सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से शुरू करने और पूरा कराने की चुनौती होगी। 31 मार्च 2027 की समयसीमा को देखते हुए विकास खंड स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी आवश्यक होगी। यदि निर्धारित योजना के अनुसार काम आगे बढ़ता है तो कांगड़ा जिले की 232 पंचायतों में हजारों छोटे-बड़े विकास कार्य पूरे होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय बुनियादी ढांचे दोनों को मजबूती मिल सकती है।



