शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 76 हजार के पार; निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा

शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 76 हजार के पार; निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा

शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती कारोबार के दौरान शानदार बढ़त

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों की सकारात्मक धारणा का असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 850 अंकों की बढ़त के साथ 76,300 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी लगभग 250 अंक मजबूत होकर 24,000 के स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार के अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होता दिखाई दिया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में तेजी आने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होने की संभावनाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और बेहतर वैश्विक सेंटीमेंट ने भी बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी

सोमवार के शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक मजबूती रियल्टी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। रियल एस्टेट कंपनियों के कई शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें और आवासीय परियोजनाओं की मांग में सुधार की संभावना के कारण इस सेक्टर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है।

इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर की चाल अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि अधिकांश आईटी कंपनियों में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली, लेकिन अन्य सेक्टरों की तुलना में इन शेयरों में खरीदारी का उत्साह सीमित दिखाई दिया। निवेशक फिलहाल वैश्विक टेक सेक्टर से जुड़े आर्थिक संकेतों और अमेरिकी बाजार के अगले रुझानों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

बैंकिंग, ऑटो और मेटल शेयरों में भी सकारात्मक रुख

रियल्टी के अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल और कुछ चुनिंदा वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। बड़े निजी बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूती देने में योगदान दिया। वहीं मेटल कंपनियों के शेयरों में वैश्विक कमोडिटी बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों का असर दिखाई दिया।

बाजार की व्यापक तस्वीर पर नजर डालें तो शुरुआती कारोबार में लार्जकैप के साथ-साथ कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे बाजार में व्यापक भागीदारी देखने को मिली।

वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का बाजार पर असर

भारतीय शेयर बाजार की मजबूती के पीछे वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। निवेशक केवल घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश प्रवाह पर भी लगातार नजर रखते हैं। सोमवार के कारोबार में इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव देखने को मिला।

एशियाई बाजारों से मिले मजबूत संकेत

सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स लगभग 3 प्रतिशत तक मजबूत हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई बाजारों में आई इस तेजी ने भारतीय निवेशकों के विश्वास को और मजबूत किया।

जब प्रमुख एशियाई बाजार सकारात्मक प्रदर्शन करते हैं तो उसका असर अक्सर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है, क्योंकि वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे उभरते बाजारों में निवेश का माहौल बेहतर बन सकता है।

अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग का असर

शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी शानदार तेजी दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक कंपोजिट और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए थे। अमेरिकी बाजारों में आई तेजी का असर सोमवार सुबह एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब अमेरिकी बाजार सकारात्मक संकेत देते हैं तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिससे अन्य देशों के बाजारों में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है।

ईरान-अमेरिका संबंधों से जुड़ी खबरों का प्रभाव

बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजहों में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते से जुड़ी खबरों को भी माना जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से दिए गए बयान में संकेत मिले कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच सकती है।

हालांकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारों द्वारा ही की जाती है, लेकिन ऐसे सकारात्मक संकेतों का असर वित्तीय बाजारों पर अक्सर पहले ही दिखाई देने लगता है। निवेशकों ने इन खबरों को वैश्विक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक माना, जिससे बाजार में खरीदारी बढ़ी।

कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

रिपोर्टों के अनुसार यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तेल आपूर्ति सामान्य होती है तो वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई बेहतर हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना बनती है।

भारत दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात लागत कम हो सकती है, महंगाई पर दबाव घट सकता है और कई उद्योगों की लागत भी कम होने की संभावना रहती है। यही वजह है कि तेल से जुड़ी वैश्विक खबरों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है।

निफ्टी के प्रमुख तकनीकी स्तर

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,466 से 22,558 के बीच का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि बाजार में किसी कारण से गिरावट आती है तो इन स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिल सकता है।

वहीं 23,783 से 24,382 के बीच का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस जोन के रूप में देखा जा रहा है। यदि निफ्टी इस रेंज को मजबूती से पार करने में सफल रहता है तो बाजार में आगे भी तेजी का रुख जारी रह सकता है। हालांकि तकनीकी स्तर समय के साथ बदल सकते हैं और निवेशक किसी भी निर्णय से पहले बाजार की मौजूदा परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हैं।

पिछले कारोबारी सत्र का प्रदर्शन

सोमवार की तेजी से पहले शुक्रवार को भी घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था। उस कारोबारी सत्र में सेंसेक्स लगभग 232 अंक चढ़कर 75,415 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,719 के आसपास पहुंच गया था। उस दिन बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई थी, जिससे प्रमुख सूचकांकों को समर्थन मिला।

लगातार दो कारोबारी सत्रों में सकारात्मक प्रदर्शन ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए।

निवेशकों के लिए किन बातों पर नजर रखना जरूरी

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री, घरेलू कंपनियों के वित्तीय परिणाम, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर बनी रहेगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बाजार में तेजी के दौरान भी निवेशकों को जोखिम प्रबंधन, विविधीकृत निवेश और अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार ही निवेश निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और किसी भी निवेश से पहले संबंधित जानकारी तथा विशेषज्ञ की सलाह पर विचार करना उचित माना जाता है।