रोजमर्रा के सामान की कीमतें फिर बढ़ने की तैयारी, कंपनियों पर लागत का बढ़ता बोझ

रोजमर्रा के सामान की कीमतें फिर बढ़ने की तैयारी, कंपनियों पर लागत का बढ़ता बोझ

आने वाले महीनों में खाने-पीने के सामान से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक लोगों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है। बढ़ती कच्चे माल की कीमतों ने FMCG कंपनियों की लागत बढ़ा दी है, जिसके चलते कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स महंगे करने की तैयारी में हैं। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ समय में कंपनियों की रॉ मटीरियल लागत करीब 10% तक बढ़ी है। इसका असर बाजार में दिखना भी शुरू हो गया है। बीते एक-दो महीनों के दौरान कई कंपनियों ने अलग-अलग कैटेगरी के प्रोडक्ट्स की कीमतों में 3% से 7% तक इजाफा किया है।

पैकेजिंग और तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग मटीरियल HDPE की कीमतों में करीब 56% तक उछाल आया है। यही मटीरियल शैम्पू बोतलों, डिटर्जेंट कंटेनरों और फ्लेक्सिबल पैकिंग में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें भी लगभग 32% तक चढ़ गई हैं। वहीं पाम ऑयल के दाम में करीब 11% की तेजी दर्ज की गई है, जिससे खाद्य और घरेलू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बना है।

कंपनियां अपना सकती हैं ‘ग्रामेज कट’ का तरीका

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां केवल कीमतें ही नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि पैकेट का वजन कम करने का तरीका भी अपना सकती हैं। यानी ग्राहक को पहले जितनी कीमत में कम मात्रा का सामान मिल सकता है। FMCG सेक्टर में इसे ‘ग्रामेज कट’ कहा जाता है।

महंगाई के आंकड़ों में भी दिखा असर

देश में अप्रैल महीने की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.40% थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई भी बढ़ी है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में 4.20% दर्ज की गई, जो मार्च में 3.87% थी।

कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा असर

कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर कंपनियों की कमाई पर भी दिखने लगा है। मार्च तिमाही में कई बड़ी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में सालाना आधार पर करीब 0.50% की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में इसका असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है। कंपनियां कीमतें बढ़ाकर नुकसान कम करने की कोशिश करेंगी, लेकिन लगातार बढ़ती लागत उनके मुनाफे के प्रतिशत को दबाव में रख सकती है।

बिक्री घटने की भी आशंका

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ती महंगाई से उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता प्रभावित हो सकती है। अगर रोजमर्रा के सामान लगातार महंगे होते रहे, तो आने वाले समय में FMCG प्रोडक्ट्स की कुल खपत और बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।