पंजाब BJP में नेतृत्व बदलाव पर बढ़ी सियासी हलचल, रंधावा बोले- “अब जाखड़ क्या जवाब देंगे?”

पंजाब BJP में नेतृत्व बदलाव पर बढ़ी सियासी हलचल, रंधावा बोले- “अब जाखड़ क्या जवाब देंगे?”

पंजाब भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पार्टी हाईकमान द्वारा वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा की कमान सौंपे जाने के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा और खास तौर पर सुनील जाखड़ पर तीखा हमला बोला। रंधावा ने अपनी पोस्ट में पहले केवल सिंह ढिल्लों को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने जाखड़ की भाजपा में एंट्री के समय दिए गए बयानों को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

रंधावा ने कहा कि जब सुनील जाखड़ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, तब उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने उन्हें हिंदू होने की वजह से मुख्यमंत्री नहीं बनाया। अब जबकि भाजपा ने ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से समय से पहले हटा दिया है, तो क्या इसे भी उसी नजरिए से देखा जाए?

उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि अगर कांग्रेस पर “हिंदू विरोधी” होने के आरोप लगाए गए थे, तो अब भाजपा के इस फैसले को क्या नाम दिया जाएगा। रंधावा ने दावा किया कि जाखड़ का असली उद्देश्य कांग्रेस को बदनाम करना और अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना था।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है और राजनीतिक दलों के भीतर हो रहे फैसलों से नेताओं की असली मंशा सामने आ रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में सुनील जाखड़ भाजपा पर भी वही आरोप लगाने लगें, जो पहले कांग्रेस पर लगाए जाते रहे हैं।

उधर, भाजपा के भीतर हुए इस नेतृत्व परिवर्तन को 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पंजाब में नए चेहरे और नए समीकरणों के जरिए संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति को भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

प्रदेश की सियासत में इस बदलाव के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ सकते हैं।