भारत-नेपाल सीमा मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख, बोला- विवाद सुलझाने के लिए तीसरे देश की जरूरत नहीं

भारत-नेपाल सीमा मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख, बोला- विवाद सुलझाने के लिए तीसरे देश की जरूरत नहीं

भारत ने नेपाल की ओर से सीमा विवाद में ब्रिटेन की संभावित भूमिका संबंधी टिप्पणी को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए पहले से स्थापित द्विपक्षीय व्यवस्थाएं मौजूद हैं और यह पूरी तरह दोनों देशों के बीच का विषय है।

उन्होंने बताया कि भारत-नेपाल सीमा का अधिकांश हिस्सा तय किया जा चुका है। केवल कुछ सीमित क्षेत्रों में अब भी मतभेद बने हुए हैं, जिन पर दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान खोज रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, कुछ इलाकों में गंडक नदी का मार्ग बदलने से सीमा निर्धारण को लेकर नई चुनौतियां सामने आई हैं। साथ ही सीमा क्षेत्र में अतिक्रमण और नो-मैन्स लैंड से जुड़े मामलों की भी संयुक्त रूप से जांच और मैपिंग की जा रही है।

भारत ने दोहराया कि सीमा विवाद से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए दोनों देशों के बीच प्रभावी तंत्र कार्यरत हैं और किसी बाहरी देश या संस्था की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।

यह प्रतिक्रिया नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संसद में कहा था कि भारत-नेपाल सीमा विवाद का समाधान संवाद के जरिए होना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि 1816 की सुगौली संधि ब्रिटिश भारत और नेपाल के बीच हुई थी, इसलिए ऐतिहासिक संदर्भ में ब्रिटेन की भूमिका पर विचार किया जा सकता है।