गुरुग्राम को देश के सबसे आधुनिक और सुव्यवस्थित शहरी केंद्रों में शामिल करने की दिशा में चल रही महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा के लिए मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की परिवहन व्यवस्था, जलापूर्ति, पर्यावरण संरक्षण और शहरी आधारभूत ढांचे से जुड़ी प्रमुख योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
केंद्रीय राज्य मंत्री एवं गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि गुरुग्राम की तेजी से बढ़ती आबादी और औद्योगिक विकास को देखते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन परियोजनाओं का सीधा संबंध आम लोगों की सुविधाओं से है, उनमें किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में शहर की कई बड़ी परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। इनमें मेट्रो विस्तार योजना, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर, क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस), सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) का विकास, नए राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण, जलापूर्ति व्यवस्था का आधुनिकीकरण और वर्षा जल निकासी परियोजनाएं प्रमुख रहीं।
अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है और विभिन्न चरणों में निर्माण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का जल्द समाधान कर परियोजना की गति बढ़ाई जाए।
सदर्न पेरिफेरल रोड परियोजना को लेकर भी बैठक में विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सड़क के विभिन्न हिस्सों पर निर्माण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के कई व्यस्त मार्गों पर यातायात दबाव कम होगा और लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुरुग्राम की ट्रैफिक समस्या को देखते हुए सड़क परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने निर्माण कार्यों की धीमी गति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जहां भी अधूरे फ्लाईओवर, सर्विस रोड या अन्य संरचनात्मक कार्य लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने निजी आवासीय सोसायटियों और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तथा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच जल संसाधनों और पर्यावरण की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर भी दीर्घकालिक रणनीति पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य की आबादी और पानी की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत जल वितरण प्रणाली को और अधिक आधुनिक एवं सक्षम बनाया जाएगा। आने वाले वर्षों में पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़े स्तर पर काम किया जाएगा।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक केंद्र बन चुका है। ऐसे में यहां की आधारभूत सुविधाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने और तय समयसीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शहरी विकास एजेंसियों के प्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों, संभावित समाधान और आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गुरुग्राम की यातायात, जलापूर्ति और शहरी सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।




