पंजाब सरकार ने राज्य में निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्कों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा नियामक ढांचा तैयार करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान घोषणा की कि अब निजी शिक्षण संस्थान अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार फीस वृद्धि की एक निर्धारित सीमा तय करेगी और उसके बाहर किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी पर रोक रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यवसाय का नहीं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार अभिभावकों से शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ा रहे हैं, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने फीस नियमन के लिए कानून में संशोधन का फैसला लिया है।
एक सत्र में केवल सीमित फीस वृद्धि की अनुमति
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए प्रावधानों के अनुसार कोई भी निजी स्कूल एक शैक्षणिक सत्र के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था में फीस वृद्धि को अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रखने की तैयारी है। इसके साथ ही जिन स्कूलों ने पिछले वर्षों में अत्यधिक फीस वृद्धि की है, उनके रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी संस्थान ने नियमों का उल्लंघन कर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूला है, तो संबंधित राशि वापस करवाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। सरकार का उद्देश्य निजी शिक्षा संस्थानों और अभिभावकों के बीच संतुलन बनाना है।
किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने में अभिभावकों को मिलेगी स्वतंत्रता
नए नियमों के तहत स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान या विक्रेता से किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी अथवा अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की शर्तों से अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ता है।
स्कूलों को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले आवश्यक पुस्तकों, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री की सूची सार्वजनिक करनी होगी ताकि अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकें।
सभी श्रेणियों के निजी स्कूल आएंगे दायरे में
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून केवल सामान्य निजी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य में संचालित राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध सभी निजी शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा। सरकार किसी भी श्रेणी के स्कूल को नियमों से बाहर रखने के पक्ष में नहीं है।
वित्तीय पारदर्शिता के लिए हर वर्ष होगा ऑडिट
फीस निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने निजी स्कूलों की वार्षिक वित्तीय जांच कराने की योजना बनाई है। इसके तहत स्कूलों की आय, व्यय और शुल्क संरचना की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे फीस बढ़ोतरी के वास्तविक कारणों का पता चलेगा और अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
सरकार शिक्षा विशेषज्ञों, कानूनी सलाहकारों और अभिभावक संगठनों से सुझाव लेकर एक व्यापक निगरानी प्रणाली विकसित कर रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद को रोका जा सके।
शिक्षा संस्थानों को छात्रों के अधिकारों का रखना होगा ध्यान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि किसी भी छात्र को फीस बकाया होने के कारण अपमानित करना या उसकी पढ़ाई प्रभावित करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ स्कूल फीस जमा न होने पर विद्यार्थियों को परीक्षा संबंधी सुविधाओं, दस्तावेजों या अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं से वंचित करने की धमकी देते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की गरिमा और शिक्षा के अधिकार की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। यदि किसी संस्थान द्वारा छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा सत्र में लाया जाएगा संशोधन विधेयक
राज्य सरकार जल्द ही अध्यादेश के माध्यम से प्रारंभिक कदम उठाने की तैयारी में है। इसके बाद आगामी विधानसभा सत्र में संबंधित संशोधन विधेयक पेश कर इसे कानूनी रूप दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि नए नियम लागू होने के बाद निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बनेगी।
पंजाब सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाना और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक प्रवृत्तियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।




