चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को फीस भुगतान से जुड़ी परेशानियों से राहत देने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में फीस जमा करने के लिए किसी प्रकार की समयसीमा आधारित जुर्माना व्यवस्था लागू नहीं है और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार शुल्क जमा कर सकते हैं।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक नितीश सिंगला ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में स्कूल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (SMIS) फीस पोर्टल के संचालन और अभिभावकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का आकलन किया गया। समीक्षा के दौरान सभी सरकारी स्कूलों में विशेष एसएमआईएस हेल्पडेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया, ताकि अभिभावकों को तकनीकी और प्रशासनिक सहायता आसानी से मिल सके।
शिक्षा विभाग के अनुसार हेल्पडेस्क पर तैनात कर्मचारी अभिभावकों को ऑनलाइन फीस जमा करने की प्रक्रिया, छात्र पंजीकरण, दस्तावेजों के पुनः सत्यापन तथा पोर्टल से संबंधित अन्य समस्याओं के समाधान में सहयोग प्रदान करेंगे। इससे अभिभावकों को स्कूलों के चक्कर लगाने या तकनीकी दिक्कतों का सामना करने से राहत मिलेगी।
नितीश सिंगला ने कहा कि कई अभिभावकों में यह भ्रम है कि फीस समय पर जमा न होने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, जबकि सरकारी स्कूलों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। एसएमआईएस पोर्टल के माध्यम से फीस जमा करने पर किसी प्रकार का लेट फीस चार्ज नहीं लिया जाता। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अनावश्यक चिंता न करें और अपनी सुविधानुसार शुल्क का भुगतान करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी विद्यार्थी पर लेट फीस लागू होती है तो वह केवल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पंजीकरण प्रक्रिया से संबंधित होती है। यह शुल्क सीधे सीबीएसई के नियमों के तहत जमा कराया जाता है और इसका स्कूलों की नियमित फीस या एसएमआईएस पोर्टल से कोई संबंध नहीं है।
शिक्षा विभाग ने दोहराया कि प्री-प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के अभिभावकों को मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक आधार पर फीस जमा करने की सुविधा दी गई है। अभिभावक अपनी आर्थिक सुविधा और आवश्यकता के अनुसार भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।
बैठक के दौरान शिक्षा सेवाओं के डिजिटलीकरण को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। विभाग भविष्य में फीस और अन्य छात्र सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इससे तकनीकी प्रक्रियाएं अधिक सरल होंगी, शिकायतों का निपटारा तेजी से होगा और शिक्षकों का समय प्रशासनिक कार्यों के बजाय शैक्षणिक गतिविधियों में अधिक लग सकेगा।
शिक्षा निदेशक ने कहा कि विभाग का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनाना है। विद्यार्थियों और अभिभावकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और सुगम शिक्षा वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।



