चंडीगढ़: अगर आपने अपने घर, दुकान या कार्यालय में हाल के वर्षों में एयर कंडीशनर, गीजर, इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जर, डीप फ्रीजर या अन्य बिजली से चलने वाले उपकरणों की संख्या बढ़ा दी है, लेकिन बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) नहीं बढ़वाया है, तो अब यह लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने ऐसे उपभोक्ताओं को स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली उपयोग करने पर अतिरिक्त लोड और उससे संबंधित बिजली खपत के लिए सामान्य दर के बजाय दोगुनी दर से बिल वसूला जाएगा।
बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता सामने आए हैं, जिन्होंने समय के साथ अपने बिजली उपकरणों की संख्या तो बढ़ा ली, लेकिन कनेक्शन का स्वीकृत लोड अपडेट नहीं कराया। इससे न केवल बिजली वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, बल्कि ट्रांसफॉर्मर, केबल और अन्य विद्युत ढांचे पर ओवरलोडिंग का खतरा भी बढ़ रहा है। यही कारण है कि अब ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
सीपीडीएल के अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि स्वीकृत लोड केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि पूरी बिजली वितरण व्यवस्था इसी आधार पर तैयार की जाती है। किसी क्षेत्र में कितनी बिजली आपूर्ति करनी है, ट्रांसफॉर्मर की क्षमता कितनी होगी और वितरण नेटवर्क कैसे संचालित होगा, यह सब उपभोक्ताओं के स्वीकृत लोड को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। यदि बड़ी संख्या में लोग निर्धारित सीमा से अधिक बिजली उपयोग करने लगते हैं तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कंपनी ने बताया कि यह कार्रवाई संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) द्वारा 30 अक्टूबर 2025 को जारी टैरिफ आदेश के तहत की जा रही है। इस आदेश में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि यदि कोई उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली की मांग करता है, तो अतिरिक्त लोड और उससे संबंधित बिजली खपत पर सामान्य टैरिफ की तुलना में दोगुनी दर से शुल्क लगाया जाएगा।
ऐसे समझें पूरा नियम
मान लीजिए किसी उपभोक्ता के बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड 5 किलोवाट है, लेकिन निरीक्षण या मीटर रिकॉर्ड के दौरान उसकी अधिकतम मांग 7 किलोवाट दर्ज होती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त 2 किलोवाट लोड माना जाएगा। इस अतिरिक्त लोड के साथ-साथ उससे जुड़ी बिजली खपत पर सामान्य दर के बजाय दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी उपभोक्ता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। पहले जहां एक सामान्य घर में पंखा, टीवी और फ्रिज जैसे सीमित उपकरण होते थे, वहीं अब अधिकांश घरों में एक से अधिक एयर कंडीशनर, गीजर, माइक्रोवेव, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर, पानी की मोटर, इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर का उपयोग होने लगा है। ऐसे में कई पुराने कनेक्शन वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गए हैं।
सीपीडीएल ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने समय के साथ अपने बिजली उपकरण बढ़ाए हैं, उन्हें अपने कनेक्शन का लोड भी उसी अनुपात में संशोधित कराना चाहिए। इससे भविष्य में अतिरिक्त बिल या दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।
सुरक्षा पर भी पड़ता है असर
बिजली विशेषज्ञों के अनुसार, निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली उपयोग केवल बिल बढ़ने का कारण नहीं बनता, बल्कि यह सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर समस्या है। अधिक लोड के कारण वायरिंग गर्म हो सकती है, मीटर और केबल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है तथा ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने की संभावना बढ़ जाती है। कई बार यही स्थिति शॉर्ट सर्किट, उपकरणों की खराबी और आग लगने जैसी घटनाओं का कारण भी बन सकती है।
इसी वजह से बिजली वितरण कंपनियां समय-समय पर उपभोक्ताओं से अपने स्वीकृत लोड की समीक्षा करने की अपील करती रहती हैं। यदि वास्तविक बिजली आवश्यकता बढ़ गई है तो समय रहते लोड बढ़वाना ही सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।
कैसे बढ़वा सकते हैं लोड
सीपीडीएल ने उपभोक्ताओं से कहा है कि वे अपनी मौजूदा बिजली जरूरतों का आकलन करें। यदि उन्हें लगता है कि उनके घर या व्यवसाय में बिजली की मांग पहले की तुलना में बढ़ चुकी है, तो वे बिना देरी किए लोड वृद्धि के लिए आवेदन करें। इसके लिए उपभोक्ता कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्रों से संपर्क कर सकते हैं या उपलब्ध डिजिटल सेवाओं के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।
लोड बढ़वाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपभोक्ता का नया स्वीकृत लोड रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा और भविष्य में अतिरिक्त लोड के कारण दोगुना शुल्क लगने की आशंका समाप्त हो जाएगी।
किन उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
बिजली अधिकारियों के अनुसार, जिन घरों में हाल ही में नए एयर कंडीशनर लगाए गए हैं, ईवी चार्जिंग की सुविधा शुरू हुई है या बड़े बिजली उपकरणों का उपयोग बढ़ा है, उन्हें विशेष रूप से अपने स्वीकृत लोड की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा होटल, रेस्तरां, शोरूम, कार्यालय, छोटे उद्योग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी बिजली मांग बढ़ने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए ऐसे उपभोक्ताओं को भी अपने कनेक्शन की क्षमता का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की भी सलाह
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भी उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपने बिजली कनेक्शन की स्वीकृत सीमा के भीतर ही बिजली का उपयोग करें। यदि किसी कारणवश बिजली की आवश्यकता बढ़ती है तो इसकी जानकारी समय पर बिजली वितरण कंपनी को देकर स्वीकृत लोड में संशोधन करवाना चाहिए। इससे बिजली व्यवस्था सुरक्षित रहती है और अनावश्यक वित्तीय दंड से भी बचा जा सकता है।
कंपनी की अपील
सीपीडीएल ने दोहराया है कि यह कदम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शहर की बिजली व्यवस्था को सुरक्षित, संतुलित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए उठाया गया है। कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे अपने बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड जांचें और यदि वास्तविक खपत उससे अधिक है तो जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर लोड बढ़वा लें। ऐसा करने से न केवल अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सकेगा, बल्कि शहर की बिजली वितरण प्रणाली पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को भी कम किया जा सकेगा।




