भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच वर्ल्ड बैंक में भारत के नए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने भरोसा जताया है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और आने वाले समय में 8% से अधिक की विकास दर हासिल कर सकती है।
एक इंटरव्यू में मिश्रा ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर जितनी चिंता जताई जा रही है, उसका वास्तविक असर उतना बड़ा नहीं है। उनके अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई अन्य देशों की तुलना में भारत ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर तैयार है।
घरेलू मांग बनी हुई है मजबूत
मिश्रा ने बताया कि देश में कई आर्थिक संकेतक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं। मई महीने में कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 29% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा शॉपिंग मॉल्स में ग्राहकों की अच्छी उपस्थिति और सीमेंट की मांग में लगातार वृद्धि भी आर्थिक गतिविधियों की मजबूती दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि सीमेंट जैसे उत्पादों की खरीद सीधे निर्माण और विकास गतिविधियों से जुड़ी होती है, इसलिए इसकी बढ़ती मांग अर्थव्यवस्था की वास्तविक मजबूती का संकेत है।
सख्त नीतियों के बावजूद शानदार प्रदर्शन
उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी 7.1% की दर से बढ़ी, जबकि उस दौरान सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों की ओर से अपेक्षाकृत सख्त वित्तीय और मौद्रिक नीतियां लागू थीं।
मिश्रा का मानना है कि यदि ये सख्तियां नहीं होतीं तो विकास दर और अधिक ऊंची हो सकती थी। बेहतर कर्ज वितरण और अपेक्षाकृत नरम वित्तीय रुख को देखते हुए उन्होंने अनुमान जताया कि 2026 की शुरुआत तक अर्थव्यवस्था 8% से अधिक की गति से बढ़ रही थी।
तेल के झटके से नहीं पटरी से उतरेगी अर्थव्यवस्था
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर भी मिश्रा ने आश्वस्त करने वाली बात कही। उनका कहना है कि तेल महंगा होने से लागत बढ़ती जरूर है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों को रिफाइनिंग कारोबार से मिलने वाला फायदा इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर देता है।
वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतें करीब 94-95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। इसके बावजूद उनका मानना है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत नहीं है।
सब्सिडी को लेकर डर बेवजह
मिश्रा ने उन आशंकाओं को भी खारिज किया जिनमें ईंधन पर भारी अप्रत्यक्ष सब्सिडी की जरूरत बताई जाती है। उनके अनुसार 20-30 रुपये प्रति लीटर जैसी बड़ी सब्सिडी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और लगभग 8 रुपये प्रति लीटर का सुरक्षा कवच पर्याप्त है।
उन्होंने इसका कारण चीन और अमेरिका की ओर से बाजार में अतिरिक्त तेल भंडार जारी किए जाने को बताया, जिससे वैश्विक कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
100 डॉलर तेल भी बड़ी बाधा नहीं
अर्थशास्त्री का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है तो आर्थिक विकास दर पर करीब 2% तक असर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इतना प्रभाव भी भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को पूरी तरह बाधित नहीं कर पाएगा।
उन्होंने इसकी तुलना ऐसे विमान से की जो विपरीत हवा में उड़ रहा हो, लेकिन अपनी दिशा और गति बनाए रखता है।
तेल सस्ता हुआ तो और बढ़ेगी रफ्तार
मिश्रा का कहना है कि यदि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचती हैं तो अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिलेगा। ऐसी स्थिति में उर्वरक कीमतों को नियंत्रित रखने जैसी सरकारी सहायता योजनाओं की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
उनके अनुसार भारत की अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता, मजबूत घरेलू खपत और नीतिगत दबाव में संभावित कमी के कारण देश 7.5% से 8% के बीच विकास दर बनाए रखने में सक्षम रहेगा, भले ही ऊर्जा कीमतें कुछ समय तक ऊंची बनी रहें।
सबसे बड़ी चुनौती क्या?
मिश्रा ने कहा कि फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम अर्थव्यवस्था को लेकर बने नकारात्मक माहौल को संभालना है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे नए आर्थिक आंकड़े सामने आएंगे, भारत की मजबूत स्थिति खुद स्पष्ट होती जाएगी।




