अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि तेहरान अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जहां वह अमेरिका के साथ एक व्यापक समझौता करने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान परमाणु हथियारों से दूरी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता जताने को तैयार है और दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
साउथ कैरोलिना में आयोजित एक वर्चुअल टेली-रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वर्तमान हालात पहले की तुलना में काफी बदल चुके हैं। उनके अनुसार अमेरिका की रणनीतिक और सैन्य कार्रवाइयों का असर ईरान पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसके चलते अब वहां की सरकार बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है।
रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है और उन्हें विश्वास है कि निकट भविष्य में किसी महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब उन शर्तों पर भी विचार करने को तैयार है जिन्हें पहले वह स्वीकार नहीं करता था।
परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बातचीत में इस विषय पर भी प्रगति हुई है और ईरान की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। ट्रंप के मुताबिक, तेहरान यह आश्वासन देने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा।
अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति को लेकर भी कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में की गई अमेरिकी कार्रवाइयों ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की कई महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाएं कमजोर हो चुकी हैं और उसके रक्षा तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दबाव और सैन्य रणनीति के कारण ईरान की ताकत पहले जैसी नहीं रही। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका ने उन तमाम संसाधनों को निशाना बनाया जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा मानता था। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई नया आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया।
रैली के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका इस संघर्ष में निर्णायक बढ़त हासिल कर चुका है। उनके अनुसार आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं और इसी अवधि में दुनिया को बड़ी राजनीतिक एवं कूटनीतिक घोषणा सुनने को मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि बातचीत मौजूदा गति से आगे बढ़ती रही तो जल्द ही ऐसी स्थिति बनेगी जिसे अमेरिका की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि अगले दो सप्ताह के भीतर व्यापक सफलता की घोषणा संभव है और इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
ऊर्जा बाजार का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बढ़ने से तेल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। उनका मानना है कि तनाव कम होने और समझौते की दिशा में प्रगति होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने इसे अमेरिकी उपभोक्ताओं और वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
हालांकि ट्रंप का भाषण केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने साउथ कैरोलिना के वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता और सीनेटर लिंडसे ग्राहम की भी जमकर प्रशंसा की। ट्रंप ने कहा कि ग्राहम ने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार उनका साथ दिया है और दोनों ने वर्षों तक मिलकर काम किया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मामलों में ग्राहम की भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है। ट्रंप के मुताबिक, सीनेटर ग्राहम उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देने की नीति का लगातार समर्थन किया है।
रैली के दौरान ट्रंप ने रिपब्लिकन समर्थकों से आगामी प्राथमिक चुनाव में ग्राहम को समर्थन देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि ग्राहम ने अपने राज्य और देश दोनों के लिए लंबे समय तक काम किया है और वे दोबारा समर्थन के पात्र हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि सीनेट में ग्राहम की मौजूदगी रिपब्लिकन एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। उन्होंने न्यायपालिका में रूढ़िवादी विचारधारा वाले न्यायाधीशों की नियुक्ति, रक्षा बजट को मजबूत करने और सीमा सुरक्षा को लेकर ग्राहम के योगदान की सराहना की।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने साउथ कैरोलिना की लेफ्टिनेंट गवर्नर पामेला एवेट का भी समर्थन किया। उन्होंने एवेट को अमेरिका-प्रथम नीति की समर्थक बताते हुए कहा कि उनमें नेतृत्व क्षमता है और भविष्य में वह राज्य के लिए प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।
ट्रंप ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दें और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। उन्होंने एवेट को ऐसे ही नेताओं में शामिल बताया और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भरोसा जताया।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व की स्थिति अंतरराष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बनी हुई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका की विदेश नीति को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में ट्रंप के दावे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।
हालांकि अभी तक ईरान की ओर से ट्रंप के दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसके बावजूद उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में कोई बड़ा समझौता सामने आता है।
फिलहाल ट्रंप का कहना है कि हालात अमेरिका के पक्ष में हैं और उन्हें उम्मीद है कि निकट भविष्य में दुनिया एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घोषणा की गवाह बनेगी। यदि ऐसा होता है तो यह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों के लिए बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।




