ITR Filing 2026: 31 जुलाई से पहले निपटा लें टैक्स रिटर्न, छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी; फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

ITR Filing 2026: 31 जुलाई से पहले निपटा लें टैक्स रिटर्न, छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी; फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आम टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। वहीं, कुछ बिजनेस और प्रोफेशनल कैटेगरी के लोगों के लिए यह समय सीमा अलग हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति तय तारीख तक अपना ITR फाइल नहीं करता है तो उसे 31 दिसंबर तक जुर्माना भरकर बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का मौका मिल सकता है।

इनकम टैक्स रिटर्न केवल टैक्स जमा करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आपकी सालभर की कमाई, निवेश, खर्च और वित्तीय लेन-देन का आधिकारिक रिकॉर्ड भी होता है। इनकम टैक्स विभाग अब AI, डेटा एनालिटिक्स और अलग-अलग वित्तीय प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी के आधार पर ITR में दी गई जानकारी की जांच करता है। बैंक खाते, TDS, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और विदेश से जुड़े लेन-देन की जानकारी विभाग तक पहुंचती रहती है। ऐसे में रिटर्न में किसी भी तरह की गलत जानकारी या छिपाई गई आय बाद में टैक्स नोटिस, ब्याज और पेनाल्टी का कारण बन सकती है।

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, ITR भरते समय सबसे ज्यादा ध्यान सही जानकारी देने पर देना चाहिए। कई लोग केवल फॉर्म 16 के आधार पर अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, जबकि फॉर्म 16 में सिर्फ नौकरी से मिलने वाली सैलरी और उस पर कटे TDS की जानकारी होती है। अगर किसी व्यक्ति को बैंक FD, RD, सेविंग अकाउंट ब्याज, किराये से आय, फ्रीलांस काम, डिविडेंड, शेयर या म्यूचुअल फंड से फायदा हुआ है तो उसे भी ITR में शामिल करना जरूरी है।

रिटर्न भरने से पहले सही ITR फॉर्म चुनना भी बेहद जरूरी है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर वह डिफेक्टिव माना जा सकता है। सैलरी, पेंशन और सामान्य ब्याज आय वालों के लिए ITR-1 होता है, जबकि कैपिटल गेन, एक से ज्यादा मकान या विदेशी आय वाले लोगों को ITR-2 भरना पड़ सकता है। बिजनेस, फ्रीलांस, ट्रेडिंग या F&O से जुड़े लोगों के लिए ITR-3 और छोटे कारोबारियों व कुछ प्रोफेशनल्स के लिए ITR-4 निर्धारित है।

ITR दाखिल करने से पहले AIS यानी Annual Information Statement, TIS यानी Taxpayer Information Summary और Form 26AS को जरूर जांच लेना चाहिए। इन दस्तावेजों में आपकी आय, TDS और कई वित्तीय गतिविधियों की जानकारी मौजूद होती है। अगर इन रिकॉर्ड में कोई ऐसी जानकारी दिखती है जो आपकी जानकारी से अलग है तो समय रहते उसे सुधारना जरूरी है, वरना विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।

जिन लोगों ने वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, उन्हें खास सावधानी रखनी चाहिए। नौकरी बदलने पर पुरानी और नई दोनों कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर ही ITR में दिखाना होता है। कई बार लोग सिर्फ नई कंपनी की आय दिखाते हैं, जिससे कुल इनकम गलत दर्ज हो जाती है और बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

बैंक अकाउंट की जानकारी भरते समय भी सावधानी जरूरी है। रिफंड पाने वाले खाते का अकाउंट नंबर और IFSC कोड सही होना चाहिए। छोटी सी गलती के कारण टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है। इसके अलावा बैंक से मिलने वाले ब्याज को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई लोग सोचते हैं कि अगर बैंक ने TDS नहीं काटा तो उस आय को बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। FD, RD और सेविंग अकाउंट से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स नियमों के अनुसार रिपोर्ट करना पड़ सकता है।

शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन की जानकारी देना भी जरूरी है। PAN और डिमैट अकाउंट से जुड़े रिकॉर्ड के कारण इन गतिविधियों की जानकारी विभाग के पास पहुंच सकती है। शेयर बेचने, म्यूचुअल फंड रिडीम करने या प्रॉपर्टी बेचने पर हुए लाभ और नुकसान दोनों को सही तरीके से दिखाना चाहिए। नुकसान की जानकारी देने से भविष्य में टैक्स लाभ मिल सकता है।

टैक्स बचाने के लिए जिन कटौतियों का दावा किया जाता है, उनके दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है। 80C के तहत निवेश, NPS योगदान, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन ब्याज जैसी छूट का दावा केवल सही दस्तावेजों के आधार पर ही करना चाहिए। गलत जानकारी देने पर भविष्य में विभाग प्रमाण मांग सकता है।

विदेशी निवेश या विदेशी आय रखने वाले टैक्सपेयर्स को भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में शेयर, ETF, बैंक अकाउंट या किसी विदेशी प्लेटफॉर्म पर निवेश किया है तो उसकी जानकारी ITR में देना जरूरी हो सकता है। खासकर ऐसे मामलों में जहां टैक्स नियमों के तहत विदेशी संपत्ति की जानकारी बताना अनिवार्य हो।

ITR जमा करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना भी उतना ही जरूरी है। केवल रिटर्न सबमिट कर देना पर्याप्त नहीं होता। आधार OTP, नेट बैंकिंग, डिमैट अकाउंट या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए रिटर्न को वेरिफाई करना होता है। समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं होने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।

31 जुलाई 2026 ITR दाखिल करने की अहम तारीख है। आखिरी समय में जल्दबाजी करने से गलतियां होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें, अपनी आय और निवेश की जानकारी मिलाएं और समय रहते रिटर्न फाइल कर दें। सही जानकारी के साथ दाखिल किया गया ITR भविष्य में टैक्स से जुड़ी परेशानियों से बचाने में मदद कर सकता है।