हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवाओं को प्रभावित करने की चेतावनी देने वाली प्रस्तावित हड़ताल से पहले राज्य सरकार ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक और परिचालक संगठनों द्वारा 25 जून से प्रस्तावित हड़ताल की घोषणा के बाद सरकार और निगम प्रबंधन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को किसी भी स्थिति में ठप नहीं होने दिया जाएगा।
इसी दिशा में सरकार ने आपातकालीन कार्ययोजना तैयार करते हुए रिकॉर्ड समय में बड़ी संख्या में अस्थायी चालकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश के विभिन्न डिपो में बस संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए 656 अस्थायी ड्राइवरों की भर्ती का फैसला लिया गया है। इनकी नियुक्ति वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से की जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सेवाएं ली जा सकें।
संकट से निपटने के लिए देर रात तक चली रणनीतिक बैठक
हड़ताल की घोषणा के बाद निगम मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर शुरू हो गया। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधन ने पूरे प्रदेश में बस संचालन की स्थिति का आकलन किया और संभावित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल की अध्यक्षता में हुई लंबी बैठक में विभिन्न डिपो की जरूरतों, उपलब्ध स्टाफ, वैकल्पिक संसाधनों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
सूत्रों के अनुसार बैठक देर रात तक जारी रही, जिसमें सरकार को भी लगातार स्थिति से अवगत कराया जाता रहा। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि कर्मचारी संगठन हड़ताल पर जाते हैं तो भी यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रहे।
31 डिपो में होगी अतिरिक्त चालकों की तैनाती
निगम द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार प्रदेश के 31 डिपो में अस्थायी आधार पर चालकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालयों में वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं। चयनित उम्मीदवारों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न रूटों पर तैनात किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में वैकल्पिक ड्राइवर उपलब्ध होने से हड़ताल की स्थिति में बस सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
भर्ती के लिए तय किए गए पात्रता मानदंड
अस्थायी चालक के रूप में नियुक्ति के लिए कुछ आवश्यक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। उम्मीदवार का कम से कम दसवीं पास होना अनिवार्य रखा गया है। इसके अलावा उसके पास भारी वाहन चलाने का वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह रखी गई है कि आवेदक को भारी वाहनों के संचालन का कम से कम तीन वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए। सरकार और निगम प्रबंधन का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए केवल अनुभवी चालकों को ही मौका दिया जाएगा।
बस सेवाएं बाधित न हों, इसलिए तैयार किया गया बैकअप प्लान
प्रदेश में एचआरटीसी केवल परिवहन सेवा नहीं बल्कि लाखों लोगों की दैनिक जरूरत का प्रमुख साधन है। पहाड़ी क्षेत्रों में कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों की आवाजाही, विद्यार्थियों की पढ़ाई, कर्मचारियों की ड्यूटी और मरीजों की अस्पताल तक पहुंच मुख्य रूप से सरकारी बसों पर निर्भर करती है।
इसी कारण सरकार किसी भी स्थिति में बस सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं होने देना चाहती। अधिकारियों का कहना है कि यदि लंबे समय तक परिवहन सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसका असर आम जनता के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सरकारी गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार कर ली गई है।
होमगार्ड्स की सेवाएं भी ली जाएंगी
सरकार ने केवल अस्थायी भर्ती तक ही अपनी तैयारी सीमित नहीं रखी है। परिवहन संचालन को बनाए रखने के लिए होमगार्ड्स विभाग के प्रशिक्षित चालकों की सेवाएं लेने की भी योजना बनाई गई है।
जरूरत पड़ने पर ऐसे चालक बसों के संचालन में सहायता करेंगे। इससे निगम को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध होगा और विभिन्न रूटों पर बसों की आवाजाही जारी रखी जा सकेगी। प्रशासन का मानना है कि बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार करने से किसी एक विकल्प पर निर्भरता कम होगी।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्क
हड़ताल की संभावनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील बस अड्डों, डिपो और प्रमुख परिवहन केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया जा सकता है।
सरकार ने यूनियनों को अदालत के आदेश की दिलाई याद
प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन ने कर्मचारी संगठनों को यह भी याद दिलाया है कि पूर्व में न्यायालय इस प्रकार की हड़तालों पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त कर चुका है। प्रबंधन का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं में कार्य बाधित होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसी आधार पर यूनियनों से पुनर्विचार करने और हड़ताल का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि संवाद के दरवाजे अभी भी खुले हैं और किसी भी मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।
कर्मचारियों की मांगों को लेकर जारी है गतिरोध
हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें लेकर सरकार तथा निगम प्रबंधन की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। इसी असंतोष के चलते हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
दूसरी ओर सरकार का रुख यह है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन जनता को परेशान करने वाले कदम स्वीकार नहीं किए जा सकते। यही वजह है कि एक तरफ बातचीत की पेशकश जारी है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक व्यवस्था भी पूरी मजबूती के साथ तैयार की जा रही है।
लाखों यात्रियों की नजरें अगले कदम पर
प्रदेशभर में प्रतिदिन लाखों लोग एचआरटीसी की बसों का उपयोग करते हैं। ऐसे में प्रस्तावित हड़ताल और उसके जवाब में सरकार की तैयारियों पर आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बन जाती है तो टकराव की स्थिति टल सकती है। लेकिन यदि हड़ताल होती है तो सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि परिवहन सेवाओं को जारी रखने के लिए उसके पास पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।
फिलहाल प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या फिर सरकार को अपने आपातकालीन परिवहन प्लान को पूरी तरह लागू करना पड़ता है। हालांकि इतना तय है कि प्रदेश सरकार इस बार बस सेवाओं को बाधित होने देने के मूड में नजर नहीं आ रही और उसने हड़ताल की चुनौती का जवाब तैयारी और सख्त प्रशासनिक रुख के साथ देने का फैसला किया है।




