पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और प्रशासनिक हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप लगे हैं। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान प्रशासन की ओर से अब तक इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही घायल लोगों की संख्या की पुष्टि की गई है।
JAAC के अनुसार, यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और इसका उद्देश्य सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना था। संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के कार्रवाई की, जिससे हालात अचानक बिगड़ गए। घटना के बाद इलाके में तनाव और भी बढ़ गया है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में सरकार विरोधी आंदोलन तेज होने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 45 सीटों पर सीधे चुनाव कराया जाता है, जबकि शेष सीटें महिलाओं, धार्मिक विद्वानों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए आरक्षित हैं।
2021 के चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सबसे अधिक 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। उस समय सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने थे। बाद में पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति में आए बदलावों का असर PoK पर भी पड़ा और नियाजी ने 2022 में इस्तीफा दे दिया। उनके बाद सरदार तनवीर इलियास प्रधानमंत्री बने, लेकिन अदालत की अवमानना के मामले में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद चौधरी अनवरुल हक ने सत्ता संभाली, जिन्होंने बाद में PTI से अलग होकर स्वतंत्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा और वर्तमान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर प्रधानमंत्री हैं।
हजारों लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन
JAAC का दावा है कि अब्बासपुर स्थित सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग एकत्र हुए थे। संगठन के मुताबिक, इस विशाल रैली में अलग-अलग जिलों से लोग पहुंचे थे और सभी का उद्देश्य सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था।
संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB क्षेत्र में जब लोग प्रदर्शन कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। JAAC का कहना है कि कई प्रदर्शनकारी इस फायरिंग में घायल हुए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर नाराजगी
JAAC का कहना है कि उसका आंदोलन केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। संगठन लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही, बुनियादी सुविधाओं की कमी और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहा है।
संगठन का आरोप है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार गिरफ्तार किया जा रहा है। JAAC ने सरकार से सभी गिरफ्तार लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए प्रशासन कठोर कदम उठा रहा है।
महिलाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी
प्रदर्शन में केवल युवा ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए। संगठन का दावा है कि रावलाकोट और चक सहित कई इलाकों की महिलाओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया और प्रशासनिक दबाव के बावजूद प्रदर्शन जारी रखा।
डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी लगातार अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों के समूह पहुंचते रहे। JAAC का कहना है कि जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
विदेशों में भी दिखा समर्थन
PoK के बाहर रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी इस आंदोलन के समर्थन में आवाज उठाई है। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरियों ने प्रदर्शन कर JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की और आंदोलन के समर्थन में कई नारे लगाए। संगठन ने बताया कि सोशल मीडिया पर भी ‘रिलीज शौकत मीर’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की जा रही है।
5 लाख लोगों को जोड़ने की तैयारी
JAAC ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर PoK के 10 जिलों की आबादी का हवाला देते हुए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। संगठन का कहना है कि यदि प्रत्येक जिले से लगभग 50 हजार लोग आंदोलन में शामिल हों तो प्रदर्शनकारियों की संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य हिंसा नहीं बल्कि बुनियादी अधिकारों की मांग को दुनिया के सामने रखना है।
कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दावा
PoK के सामाजिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने दावा किया है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद 600 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के समर्थन में 5 जुलाई को लंदन में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी की गई थी। उनका आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
प्रतिबंध के बाद और बढ़ा विवाद
सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से संगठन और प्रशासन के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया है।
JAAC का कहना है कि प्रतिबंध के जरिए लोकतांत्रिक विरोध को रोकने की कोशिश की जा रही है, जबकि सरकार की ओर से संगठन पर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।
पिछले महीने भी हुई थी हिंसक झड़प
PoK में तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले महीने 8 जून को भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। उस घटना में करीब 30 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी।
आरक्षित सीटों को लेकर भी विवाद
JAAC और सरकार के बीच विवाद का एक बड़ा कारण विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें भी हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे।
JAAC लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को प्रभावित करती है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले कई महीनों से आंदोलन जारी है।
हालात पर बनी हुई है नजर
रविवार की घटना के बाद पूरे PoK में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। चुनाव नजदीक होने के कारण प्रशासन किसी भी नई अप्रिय स्थिति से बचने की कोशिश कर रहा है। वहीं JAAC ने संकेत दिए हैं कि उसकी ओर से आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
फिलहाल गोलीबारी के आरोपों, घायलों की संख्या और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।




