योगिनी एकादशी आज: भगवान विष्णु को अर्पित करें पीले वस्त्र, लक्ष्मी जी को चढ़ाएं सुहाग सामग्री, शिव पूजा से भी मिलेगा शुभ फल

योगिनी एकादशी आज: भगवान विष्णु को अर्पित करें पीले वस्त्र, लक्ष्मी जी को चढ़ाएं सुहाग सामग्री, शिव पूजा से भी मिलेगा शुभ फल

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली योगिनी एकादशी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष अधिकांश पंचांगों के अनुसार यह व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जा रहा है। हालांकि तिथियों के अंतर के कारण कुछ पंचांगों में इसे 11 जुलाई बताया गया है, लेकिन अधिकतर विद्वानों ने 10 जुलाई को ही व्रत और पूजा करने की सलाह दी है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में इस व्रत के पुण्य की तुलना बड़े-बड़े यज्ञों से मिलने वाले फल के समान की गई है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत जीवनभर शुभ फल देने वाला होता है।

अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है यह व्रत

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा के अनुसार योगिनी एकादशी को अत्यंत फलदायी एकादशियों में शामिल किया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास और दान-पुण्य करने से ऐसे शुभ कर्मों का संचय होता है, जिनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए भक्त पूरे श्रद्धाभाव से इस दिन व्रत और पूजा करते हैं।

व्रत रखने वालों के लिए क्या हैं नियम?

परंपरा के अनुसार एकादशी का व्रत निराहार रहकर किया जाता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन अन्न का सेवन नहीं करते और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उपवास रखते हैं। हालांकि जो लोग स्वास्थ्य कारणों से भूखे नहीं रह सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। दूध, फल, सूखे मेवे और फलों के रस का सेवन भी किया जा सकता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर से अधिक मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना माना गया है।

व्रत न रख पाने वाले भी कर सकते हैं पूजा

यदि किसी कारणवश कोई व्यक्ति उपवास नहीं कर पा रहा है, तब भी वह भगवान विष्णु की पूजा करके इस दिन का धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके लिए भगवान विष्णु को स्वच्छ जल अर्पित करें और तुलसी दल चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। यदि विस्तृत पूजा संभव न हो तो केवल भगवान का स्मरण और मंत्र जाप भी शुभ माना गया है।

पूजा की शुरुआत करें श्रीगणेश से

किसी भी शुभ कार्य की तरह योगिनी एकादशी की पूजा भी भगवान गणेश के पूजन से प्रारंभ करनी चाहिए। सबसे पहले घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान गणेश को जल और पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें नए वस्त्र, फूल और दूर्वा अर्पित करें। लड्डू का भोग लगाकर “ऊँ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। धूप और दीप प्रज्वलित कर गणेश जी की आरती करें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की ऐसे करें आराधना

गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। दोनों की प्रतिमा या चित्र को जल, दूध और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ वस्त्र पहनाएं और पुष्प अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाएं तथा सुगंधित इत्र भी अर्पित कर सकते हैं।

भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करना शुभ माना गया है। वहीं माता लक्ष्मी को सुहाग का सामान जैसे लाल चुनरी, चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी दल के साथ मिठाई का भोग लगाएं और श्रद्धा से पूजा करें।

मंत्र जाप का भी है विशेष महत्व

पूजा के दौरान “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मंत्र जाप करते समय भगवान विष्णु का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा मंगल की कामना करें। पूजा के अंत में धूप-दीप दिखाकर भगवान की आरती करें और एकादशी व्रत का संकल्प लें।

शुक्रवार और एकादशी का विशेष संयोग

इस बार योगिनी एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी विशेष फलदायी बताया गया है, क्योंकि शुक्र ग्रह की आराधना शिवलिंग के माध्यम से की जाती है।

शिवलिंग पर करें जलाभिषेक

शुक्रवार और एकादशी के संयोग में शिवलिंग पर जल तथा दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद चंदन का लेप करें और सफेद पुष्पों से भगवान शिव का श्रृंगार करें। पूजा में बिल्व पत्र, धतूरा तथा आंकड़े के फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। धूप और दीप जलाकर आरती करें तथा “ऊँ शुक्राय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। पूजा पूर्ण होने के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करना भी शुभ माना गया है।

एकादशी पर करें ये पुण्य कार्य

योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मसंयम और सत्कर्म का भी दिन माना जाता है। इस दिन भगवान के भजन, कीर्तन और धार्मिक कथाओं का श्रवण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि समय मिले तो विष्णु सहस्रनाम, राम नाम या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी किया जा सकता है।

व्यवहार में रखें संयम

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध, कटु वचन, निंदा और विवाद से बचना चाहिए। वाणी को मधुर रखें और मन को शांत रखने का प्रयास करें। सकारात्मक सोच और ईश्वर का स्मरण इस दिन की पूजा को और अधिक फलदायी बनाते हैं।

दान-पुण्य का भी है महत्व

योगिनी एकादशी पर जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धा के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल, दूध या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि दान से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

हनुमान जी की पूजा भी मानी जाती है शुभ

इस दिन भगवान हनुमान के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना भी लाभकारी माना गया है। श्रद्धालु चाहें तो राम नाम का जाप करें या समय मिलने पर सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

द्वादशी पर ऐसे करें व्रत का पारण

योगिनी एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूरा किया जाता है। 11 जुलाई की सुबह सूर्योदय के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद सात्विक भोजन तैयार करें और पहले जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का विधिवत पारण करें।

श्रद्धा और नियम से करें पूजा

धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि योगिनी एकादशी का वास्तविक महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। श्रद्धा, संयम, भगवान का स्मरण, दान-पुण्य और अच्छे आचरण के साथ किया गया यह व्रत अधिक शुभ फलदायी माना जाता है। इसलिए इस दिन पूजा-व्रत के साथ सकारात्मक विचार, सेवा भावना और धार्मिक नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है।