फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। शुक्रवार रात खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से मात दी। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और अंतिम क्षणों तक दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप के अंतिम चार में जगह बना ली, जहां उसका सामना फ्रांस से होगा। दोनों टीमों के बीच यह हाई-वोल्टेज मुकाबला 14 जुलाई की रात खेला जाएगा।
लॉस एंजिल्स में आयोजित इस मुकाबले में स्पेन को जीत दिलाने वाले खिलाड़ी मिकेल मेरिनो रहे। दिलचस्प बात यह रही कि मेरिनो मैच के अंतिम चरण में मैदान पर उतरे और कुछ ही मिनटों में टीम के लिए सबसे अहम गोल दाग दिया। उनके गोल ने न सिर्फ मैच का नतीजा तय किया बल्कि स्पेन को लगातार दूसरे नॉकआउट मुकाबले में जीत भी दिलाई।
मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। पहले हाफ में स्पेन ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और बेल्जियम के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। इस दबाव का असर 30वें मिनट में दिखाई दिया, जब मिडफील्डर फाबियन रुइज ने शानदार गोल कर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। रुइज के गोल के बाद स्पेन के समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई और ऐसा लगने लगा कि टीम मुकाबले पर पूरी तरह हावी हो जाएगी।
हालांकि बेल्जियम ने जल्दी ही वापसी कर ली। 41वें मिनट में चार्ल्स डी केटेलेरे ने बेहतरीन मूव को गोल में बदलते हुए स्कोर 1-1 कर दिया। इस गोल के साथ उन्होंने स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन के लंबे समय से चले आ रहे क्लीन शीट रिकॉर्ड को भी समाप्त कर दिया। सिमोन कई मैचों से कोई गोल नहीं खा रहे थे और उन्होंने लगातार 650 मिनट तक विरोधी टीमों को गोल करने का मौका नहीं दिया था। डी केटेलेरे का यह गोल स्पेन के खिलाफ इस विश्व कप में हुआ पहला गोल भी था।
दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए लेकिन कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी। स्पेन लगातार हमले करता रहा जबकि बेल्जियम ने जवाबी आक्रमणों के जरिए खतरा पैदा किया। मैच के अंतिम मिनटों में ऐसा लग रहा था कि मुकाबला अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन फिर एक छोटी सी गलती ने पूरा समीकरण बदल दिया।
बेल्जियम को 71वें मिनट में बड़ा झटका लगा जब उसके अनुभवी और स्टार गोलकीपर थिबाउ कोर्टुआ चोटिल हो गए। जांघ में परेशानी महसूस होने के बाद उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह रिजर्व गोलकीपर सेने लामेन्स को उतारा गया। युवा गोलकीपर पर अचानक बड़ी जिम्मेदारी आ गई क्योंकि मैच बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच चुका था।
87वें मिनट तक स्कोर 1-1 से बराबर था। इसी दौरान स्पेन ने एक और हमला बोला। पाउ क्यूबार्सी की ओर से आई किक को लामेन्स ठीक तरह से नियंत्रित नहीं कर सके और गेंद उनके हाथों से छूट गई। गेंद सीधे मिकेल मेरिनो के सामने पहुंची। मेरिनो ने मौके का पूरा फायदा उठाया और रिबाउंड पर जोरदार शॉट लगाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 88वें मिनट में आया यह गोल मैच का निर्णायक क्षण साबित हुआ।
मेरिनो का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने लगातार दूसरे नॉकआउट मुकाबले में स्पेन को जीत दिलाने वाला गोल किया। इससे पहले प्री-क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी उन्होंने इंजरी टाइम में गोल कर टीम को आगे पहुंचाया था। बेल्जियम के खिलाफ तो वह 86वें मिनट में मैदान पर उतरे और मात्र दो मिनट बाद ही मैच विनर बन गए।
स्पेनिश टीम के लिए मेरिनो की यह वापसी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। इसी वर्ष जनवरी में मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ क्लब मैच के दौरान उनके दाएं पैर में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और कई महीनों तक मैदान से दूर रहना पड़ा। लंबी रिकवरी और रिहैबिलिटेशन के बाद उन्होंने विश्व कप टीम में वापसी की। अब वही खिलाड़ी स्पेन की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरे हैं।
स्पेन की यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक रही। टीम विश्व कप इतिहास में तीसरी बार सेमीफाइनल तक पहुंची है। इससे पहले उसने 2010 में यह उपलब्धि हासिल की थी और उसी संस्करण में पहली बार विश्व चैंपियन बनने का सपना भी पूरा किया था। दक्षिण अफ्रीका में खेले गए उस टूर्नामेंट के फाइनल में स्पेन ने नीदरलैंड को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। अब 16 साल बाद टीम के पास एक बार फिर खिताब जीतने का सुनहरा मौका है।
स्पेन की मौजूदा फॉर्म भी विपक्षी टीमों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। टीम पिछले 36 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से अजेय चल रही है। उसे आखिरी हार वर्ष 2023 में कोलंबिया के खिलाफ मिली थी। इसके बाद से स्पेन लगातार जीत और ड्रॉ के साथ आगे बढ़ता रहा है। इस प्रदर्शन के साथ उसने अर्जेंटीना के 36 मैचों की अजेय श्रृंखला की बराबरी कर ली है। अब वह इटली के 37 मैचों के रिकॉर्ड से सिर्फ एक कदम दूर है।
गोलकीपर उनाई सिमोन का प्रदर्शन भी पूरे टूर्नामेंट में चर्चा का विषय रहा है। हालांकि बेल्जियम के खिलाफ उनका क्लीन शीट रिकॉर्ड टूट गया, लेकिन उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार बचाव कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। लगातार 650 मिनट तक गोल न खाने का उनका रिकॉर्ड विश्व फुटबॉल में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस दौरान उन्होंने इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा के 517 मिनट वाले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
अब स्पेन की नजर सेमीफाइनल मुकाबले पर है, जहां उसके सामने फ्रांस जैसी मजबूत टीम होगी। फ्रांस भी लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है और उसकी टीम में कई विश्वस्तरीय खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे में दोनों यूरोपीय दिग्गजों के बीच होने वाला मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े मैचों में से एक माना जा रहा है।
दूसरी ओर, विश्व कप के बाकी दो क्वार्टर फाइनल मुकाबलों पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। एक मैच में नॉर्वे और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे, जबकि दूसरे मुकाबले में अर्जेंटीना का सामना स्विट्जरलैंड से होगा। इन दोनों मैचों के नतीजों के बाद दूसरे सेमीफाइनल की तस्वीर भी साफ हो जाएगी।
फिलहाल स्पेन के लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि टीम ने दबाव की स्थिति में भी धैर्य बनाए रखा और अंतिम क्षणों में जीत हासिल कर ली। मेरिनो के निर्णायक गोल, बेल्जियम की गोलकीपिंग गलती और स्पेन की शानदार अजेय लय ने इस मुकाबले को विश्व कप 2026 के सबसे यादगार मैचों में शामिल कर दिया है। अब फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें फ्रांस के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल पर टिकी हैं, जहां स्पेन एक बार फिर अपने सुनहरे इतिहास को दोहराने की कोशिश करेगा।




