चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की पहचान अब केवल कचरे के ढेर तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में यह क्षेत्र हरियाली, स्वच्छ वातावरण और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। इसी सोच को साकार करने की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने डड्डूमाजरा में आयोजित वन महोत्सव के दौरान पौधारोपण कर व्यापक हरित अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य अगले दो वर्षों में इस पूरे क्षेत्र को एक विशाल ऑक्सीजन हब और प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशासक ने कहा कि जिस स्थान को वर्षों तक शहर के सबसे बड़े डंपिंग ग्राउंड के रूप में जाना जाता रहा, वहीं अब हजारों पौधों और वृक्षों से सुसज्जित हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल सौंदर्यीकरण की परियोजना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता उपलब्ध कराने की एक दीर्घकालिक पहल है।
उन्होंने बताया कि पुनर्विकास योजना के तहत यहां विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इनमें रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे, बांस, गुलाब, मोगरा, रातरानी तथा कई प्रकार के फलदार और छायादार वृक्ष शामिल होंगे। इन पौधों के विकसित होने के बाद पूरा क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भर जाएगा और शहरवासियों को स्वच्छ हवा के साथ-साथ प्रकृति के बीच समय बिताने का अवसर मिलेगा।
कटारिया ने कहा कि प्रशासन की योजना केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। डड्डूमाजरा को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यहां सुबह और शाम की सैर के लिए वॉकिंग ट्रैक, बैठने की व्यवस्था, हरित पट्टियां और सुगंधित पौधों से युक्त प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जा सके। इससे यह क्षेत्र भविष्य में शहर के प्रमुख ग्रीन स्पेस में शामिल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान के बीच अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। यदि वर्तमान पीढ़ी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगी तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
प्रशासक ने कहा कि धरती का वास्तविक श्रृंगार उसके पेड़-पौधे हैं। यही वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं, तापमान को नियंत्रित रखते हैं और जैव विविधता को सुरक्षित बनाए रखते हैं। इसलिए पौधारोपण को केवल औपचारिक कार्यक्रम न मानकर जन आंदोलन का रूप देना आवश्यक है।
उन्होंने चंडीगढ़ में लगातार बढ़ रहे हरित क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि शहर का ग्रीन कवर पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2013 में जहां हरित क्षेत्र लगभग 38 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2022 तक यह बढ़कर 45 प्रतिशत हो गया। अब वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 51.6 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि शहरवासियों, प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पौधारोपण के आंकड़े बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जाए और उनका जीवित रहना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधारोपण अभियान के साथ-साथ सिंचाई, सुरक्षा, निगरानी और रखरखाव की भी मजबूत व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में बड़े वृक्ष बन सकें।
कटारिया ने कहा कि अक्सर अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन बाद में उनकी देखभाल नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति से बचने के लिए उतने ही पौधे लगाए जाएं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी लेकर उन्हें विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और संरक्षण, केवल संख्या से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया और सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसे परिवार के सदस्य की तरह संरक्षण दे। यदि हर नागरिक इस अभियान से जुड़ेगा तो शहर में हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ेगा और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।
प्रशासक ने पौधारोपण की वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सही स्थान का चयन, उपयुक्त प्रजाति का चुनाव, समय पर सिंचाई और शुरुआती वर्षों में सुरक्षा पौधों के जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो पौधारोपण अभियान के परिणाम कई गुना बेहतर हो सकते हैं।
उन्होंने लोगों से अपने घरों, स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों, औद्योगिक इकाइयों और सार्वजनिक संस्थानों में भी अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। उनके अनुसार यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान में भागीदारी करेगा तो शहर का पर्यावरण और अधिक स्वच्छ तथा संतुलित बन सकेगा।
डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड के पुनर्विकास को लेकर प्रशासन की यह पहल शहर के पर्यावरणीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्षों तक कचरे और दुर्गंध के कारण चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र अब हरियाली, स्वच्छता और प्राकृतिक सौंदर्य का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले लोगों को घने वृक्षों, रंग-बिरंगे फूलों, प्राकृतिक वातावरण और स्वच्छ हवा का अनुभव मिलेगा।
प्रशासक ने विश्वास जताया कि प्रशासन, नगर निगम और आम नागरिक यदि मिलकर इस दिशा में निरंतर कार्य करते रहे तो चंडीगढ़ न केवल देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान मजबूत करेगा, बल्कि हरित विकास के क्षेत्र में भी एक नया उदाहरण स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है और डड्डूमाजरा का यह हरित परिवर्तन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
वन महोत्सव के इस कार्यक्रम में महापौर, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और शहर को अधिक हराभरा बनाने का संकल्प दोहराया।


