सेब बागवानों को सुक्खू सरकार का बड़ा तोहफा, ₹45 करोड़ जारी; डिजिटल सिस्टम से होगी खरीद और सीधे खाते में पहुंचेगा भुगतान

सेब बागवानों को सुक्खू सरकार का बड़ा तोहफा, ₹45 करोड़ जारी; डिजिटल सिस्टम से होगी खरीद और सीधे खाते में पहुंचेगा भुगतान

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू होने से पहले राज्य सरकार ने बागवानों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को शिमला में बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें सेब खरीद व्यवस्था, मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत लंबित भुगतान, आगामी खरीद सीजन की तैयारियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार और बागवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सेब उत्पादकों के लंबित भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र बागवानों के खातों में समयबद्ध तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी, विशेष रूप से सेब उत्पादन, की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश के हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सेब उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यह है कि बागवानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिले और उन्हें भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि मंडी मध्यस्थता योजना (Market Intervention Scheme – MIS) के तहत जिन बागवानों ने 30 बैग तक सेब बेचे थे, उन्हें उनका पूरा भुगतान पहले ही कर दिया गया है। वहीं जिन उत्पादकों ने 100 बैग या उससे अधिक मात्रा में सेब बेचे हैं, उनके लंबित भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है। सरकार का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से सभी पात्र बागवानों को उनका बकाया भुगतान उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों का विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों से भुगतान प्रक्रिया की नियमित निगरानी करने और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा को तत्काल दूर करने को कहा।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीदे गए सेबों के लंबित भुगतान तथा आगामी 2025 के खरीद सीजन की भुगतान व्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली से जोड़ दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत पात्र बागवानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीबीटी प्रणाली लागू होने से भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त होगी और बागवानों को किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से सरकार और किसानों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा तथा पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हॉर्टिकल्चर मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (HMIS) की नई वेबसाइट और मोबाइल एप भी लॉन्च किया। सरकार के अनुसार यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सेब खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से खरीद, पंजीकरण, गुणवत्ता जांच, भुगतान और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सेब उत्पादक को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए आधार संख्या, भूमि से संबंधित जानकारी तथा बैंक खाते का विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। सफल पंजीकरण के बाद बागवान अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन टाइम स्लॉट बुक कर सकेंगे और निर्धारित समय पर ही अपने सेब संग्रहण केंद्र पर लेकर पहुंचेंगे।

सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्रणाली से मंडियों और संग्रहण केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी। पहले जहां कई बार लंबी कतारों और प्रतीक्षा के कारण बागवानों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब निर्धारित समय के अनुसार खरीद प्रक्रिया पूरी होने से समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग व्यवस्था से परिवहन व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित होगी। बागवानों को बार-बार मंडी आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनके परिवहन खर्च, श्रम लागत और समय की बचत होगी। साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी प्रत्येक केंद्र पर आने वाले उत्पादकों की अग्रिम जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिससे खरीद व्यवस्था का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी सेब सीजन के दौरान सभी संग्रहण केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी केंद्र पर स्टाफ की कमी या अव्यवस्था के कारण बागवानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो अतिरिक्त कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की भी तैनाती की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक संग्रहण केंद्र पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि जिन किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण, मोबाइल एप के उपयोग या स्लॉट बुकिंग में कठिनाई हो, उन्हें मौके पर ही सहायता मिल सके। सरकार चाहती है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छोटे और सीमांत बागवानों तक भी समान रूप से पहुंचे।

बैठक में अधिकारियों ने आगामी सेब सीजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की। इसमें संग्रहण केंद्रों की संख्या, परिवहन व्यवस्था, सेब की गुणवत्ता जांच, भंडारण क्षमता, प्रसंस्करण इकाइयों की तैयारी तथा खरीद प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित की जाए ताकि खरीद सीजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च गुणवत्ता वाले सेब उत्पादन के लिए पूरे देश में अपनी विशेष पहचान रखता है। प्रदेश के सेब किसानों की मेहनत और गुणवत्ता ने राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचली सेब को अलग पहचान दिलाई है। सरकार का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, बेहतर विपणन व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार केवल खरीद प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उत्पादन से लेकर विपणन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करने पर कार्य कर रही है। इसके लिए समय-समय पर नई योजनाएं लागू की जा रही हैं ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सेब खरीद के दौरान गुणवत्ता मानकों का भी पूरी पारदर्शिता के साथ पालन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी बागवान के साथ भेदभाव न हो और सभी उत्पादकों को निर्धारित नियमों के अनुसार समान अवसर मिले। साथ ही गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को भी पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन निगरानी प्रणाली, प्रत्यक्ष भुगतान और तकनीकी सहायता जैसी व्यवस्थाओं से आने वाले वर्षों में बागवानी क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।

बैठक में भंडारण सुविधाओं और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक ग्रेडिंग सुविधाएं और प्रसंस्करण इकाइयों को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सेब उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। इसलिए सरकार बागवानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लंबित भुगतान जारी करने, डिजिटल खरीद प्रणाली लागू करने, डीबीटी के माध्यम से सीधे भुगतान सुनिश्चित करने तथा खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे फैसलों से प्रदेश के सेब उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही इन पहलों से हिमाचल प्रदेश का बागवानी क्षेत्र भविष्य में अधिक संगठित, तकनीक-सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।