मानसून के बीच हिमाचल घूमना सुरक्षित, बस इन जगहों से रखें दूरी; सीएम सुक्खू ने पर्यटकों को दिया भरोसा

मानसून के बीच हिमाचल घूमना सुरक्षित, बस इन जगहों से रखें दूरी; सीएम सुक्खू ने पर्यटकों को दिया भरोसा

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान लगातार बदलते मौसम और कुछ इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं के बीच मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पर्यटकों और आम लोगों को आश्वस्त किया है कि प्रदेश के अधिकांश प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने या तेज बहाव जैसी घटनाएं सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा हिमाचल प्रदेश असुरक्षित हो गया है। ऐसे में पर्यटकों को भ्रमित होने या यात्रा रद्द करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सावधानी बरतते हुए मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

शिमला में डिजिटल ‘सुखविन्द्र सिंह सुक्खू संग्रहालय’ और ‘जागरण आर्काइव’ के शुभारंभ कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि शिमला, कुल्लू, मनाली, डलहौजी सहित प्रदेश के अधिकांश लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर स्थिति सामान्य बनी हुई है और यहां आने वाले पर्यटक सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा का आनंद ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पर्यटकों से अपील की कि वे नदी, नालों, झरनों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों के किनारे जाने से बचें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग रोमांच या सोशल मीडिया के लिए वीडियो और तस्वीरें बनाने के उद्देश्य से पानी के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। मानसून के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ सकता है और कुछ ही मिनटों में स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार के स्टंट, सेल्फी या जोखिम भरी गतिविधियों से दूर रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर राज्य है और हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां आते हैं। राज्य सरकार चाहती है कि सभी पर्यटक सुरक्षित वातावरण में अपनी यात्रा पूरी करें। इसके लिए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और विभिन्न जिलों में स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि इस वर्ष मानसून शुरू होने से पहले ही सरकार ने व्यापक तैयारियां कर ली थीं। सभी संबंधित विभागों—जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड, जल शक्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण—को संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए पहले ही अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत देना नहीं, बल्कि पहले से ऐसी व्यवस्थाएं करना है जिससे जान-माल का नुकसान न्यूनतम रहे। इसी दिशा में विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा के लिए जल्द ही एक और उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सभी विभागों की तैयारियों का आकलन किया जाएगा और जहां जरूरत होगी वहां अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौसम की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं, इसलिए सरकार नियमित रूप से हालात पर नजर बनाए हुए है।

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप पहाड़ी है और कुछ इलाके स्वाभाविक रूप से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। भारी वर्षा के दौरान कहीं-कहीं भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध होने या अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन इन्हें पूरे राज्य की स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश पर्यटन क्षेत्र सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं और पर्यटकों के लिए खुले हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों और पर्यटकों से आग्रह किया कि यात्रा पर निकलने से पहले मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी अवश्य देखें। यदि किसी मार्ग पर यात्रा से बचने या किसी क्षेत्र में न जाने की सलाह दी गई है तो उसका पूरी तरह पालन करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही जारी किए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना हर नागरिक और पर्यटक की जिम्मेदारी है। थोड़ी-सी सावधानी बड़े हादसों को टाल सकती है। विशेष रूप से परिवारों के साथ यात्रा करने वाले लोगों को बच्चों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार, प्रशासन और आम लोगों के सहयोग से मानसून के दौरान किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हमेशा से देश-विदेश के पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है और राज्य सरकार उनकी सुरक्षा तथा सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने अंत में एक बार फिर पर्यटकों से अपील की कि वे बिना किसी डर के हिमाचल आएं, लेकिन जिम्मेदार पर्यटक की तरह व्यवहार करें। सुरक्षित स्थानों पर भ्रमण करें, मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें और किसी भी प्रकार का अनावश्यक जोखिम लेने से बचें। ऐसा करने से न केवल उनकी यात्रा सुखद रहेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाएगी।