शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार की सोमवार को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में 50 से अधिक एजेंडा आइटम पर चर्चा होगी। सरकार प्रशासनिक कामकाज, रोजगार, बागवानी, शिक्षा और प्रदेश की आर्थिक स्थिति से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर अंतिम फैसला ले सकती है। खास बात यह है कि बैठक से बेरोजगार युवाओं, सेब उत्पादक बागवानों और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू चंडीगढ़ से शिमला लौट चुके हैं, जबकि मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी बैठक में शामिल होने के लिए राजधानी पहुंच गए हैं। ऐसे समय में जब प्रदेश मानसून सत्र की तैयारियों में जुटा है और सरकार आर्थिक चुनौतियों के बीच विकास कार्यों को गति देने की रणनीति बना रही है, यह कैबिनेट बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने का प्रस्ताव माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य, बागवानी और ग्रामीण विकास विभाग में करीब एक हजार नए पदों पर भर्ती को मंजूरी मिल सकती है। यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर सहमति देती है तो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इन विभागों में कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सरकार पहले भी आवश्यक पदों को भरने के संकेत दे चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग में नई नियुक्तियों से अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद है। ग्रामीण विकास विभाग में स्टाफ बढ़ने से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, जबकि बागवानी विभाग में अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति से किसानों और बागवानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा।
वन विभाग से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। सहायक वन रक्षकों की भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यदि नए नियमों को मंजूरी मिलती है तो विभाग में लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा और भविष्य में नियुक्तियां अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से की जा सकेंगी।
सेब सीजन के बीच आयोजित हो रही यह बैठक प्रदेश के बागवानों के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है। सरकार मंडी मध्यस्थता योजना (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम-एमआईएस) के नए नियमों पर अंतिम फैसला ले सकती है। बागवानी विभाग ने मुख्यमंत्री की प्रारंभिक स्वीकृति के बाद संशोधित प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अब मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार इस बार केवल पंजीकृत बागवानों से ही एमआईएस के तहत सेब की खरीद की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे योजना का लाभ वास्तविक उत्पादकों तक पहुंचेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगेगी।
प्रस्ताव में प्रत्येक पंजीकृत बागवान से अधिकतम 30 बोरी सेब खरीदने का सुझाव दिया गया है। हालांकि अंतिम निर्णय कैबिनेट करेगी। यदि सरकार को आवश्यकता महसूस होती है तो जनहित को ध्यान में रखते हुए इस सीमा को बढ़ाया भी जा सकता है, ताकि अधिक संख्या में किसानों को योजना का लाभ मिल सके।
बागवानों की सबसे बड़ी उम्मीद इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआईएस) में संभावित बढ़ोतरी को लेकर है। पिछले वर्ष सरकार ने फलों के समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन इस बार बढ़ती उत्पादन लागत, मजदूरी और परिवहन खर्च को देखते हुए समर्थन मूल्य बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। फिलहाल सरकार सेब और आम की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम तथा नींबू वर्ग के फलों की खरीद 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करती है। कैबिनेट बैठक में इन दरों में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो हजारों बागवानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
शिक्षा विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद है। इस मामले में गठित सरकारी सब-कमेटी अपनी रिपोर्ट और विभिन्न विकल्प सरकार को सौंप चुकी है। मंत्रिमंडल इनमें से किसी एक प्रस्ताव को मंजूरी देकर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है। इससे संबंधित स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तारीखों पर भी चर्चा होगी। सरकार सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को सदन में लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में कैबिनेट संभावित तिथियों पर सहमति बनाकर जल्द आधिकारिक घोषणा कर सकती है।
इसके अलावा बजट में घोषित विभिन्न योजनाओं को लागू करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी मंत्रिमंडल विचार करेगा। कई विभागों ने अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट से मंजूरी मांगी है। सरकार चाहती है कि बजट घोषणाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनता को उनका लाभ समय पर मिल सके।
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदेश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा भी रहेगा। वित्त विभाग राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रह, व्यय, ऋण और भविष्य की वित्तीय रणनीति से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मंत्रिमंडल के सामने प्रस्तुत करेगा। प्रधान सचिव (वित्त) इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुति देंगे, जिसके आधार पर सरकार आगामी महीनों की आर्थिक नीति और खर्च प्रबंधन की दिशा तय करेगी। प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर भी विचार करेगी।
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की यह बैठक कई वर्गों के लिए उम्मीदों से भरी हुई है। बेरोजगार युवाओं को नई भर्ती का इंतजार है, बागवान समर्थन मूल्य बढ़ने और एमआईएस में राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं, जबकि शिक्षा और वन विभाग से जुड़े अभ्यर्थी भी महत्वपूर्ण फैसलों पर नजर टिकाए हुए हैं। अब सभी की निगाहें कैबिनेट की बैठक पर हैं, जहां लिए जाने वाले निर्णय आने वाले समय में प्रदेश के प्रशासन, रोजगार, कृषि-बागवानी और विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




