मिशन-2027 के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव, पूरे हिमाचल में संगठन को धार देंगे CM सुक्खू; कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद की शुरुआत

मिशन-2027 के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव, पूरे हिमाचल में संगठन को धार देंगे CM सुक्खू; कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद की शुरुआत

शिमला: हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अगले तीन महीनों के दौरान प्रदेश की सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे। इस अभियान के जरिए पार्टी न केवल संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी, बल्कि कार्यकर्ताओं की राय, स्थानीय मुद्दों और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सीधा फीडबैक लेगी।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव में सफलता केवल सरकार की उपलब्धियों के आधार पर नहीं मिलती, बल्कि मजबूत संगठन और सक्रिय कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम होती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री स्वयं कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी बात सुनेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति क्या है, जनता किन मुद्दों को लेकर सरकार से अपेक्षा रखती है और संगठन को किन स्तरों पर और मजबूत करने की जरूरत है।

इस संवाद अभियान की शुरुआत सिरमौर जिले की पच्छाद विधानसभा सीट और शिमला जिले की चौपाल विधानसभा क्षेत्र से हो चुकी है। शुरुआती बैठकों में मुख्यमंत्री ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से खुलकर चर्चा की और संगठनात्मक गतिविधियों, विकास कार्यों तथा क्षेत्रीय समस्याओं पर उनकी राय जानी। अब इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए ऊना और नाहन विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ में आमंत्रित किया गया है। आने वाले दिनों में प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों के कार्यकर्ताओं के साथ इसी प्रकार चरणबद्ध तरीके से बैठकें आयोजित की जाएंगी।

योजना के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से करीब 50 सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संवाद कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार हजारों कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री सीधे बातचीत करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता ही वास्तविक राजनीतिक स्थिति से सबसे बेहतर तरीके से परिचित होते हैं। ऐसे में उनका फीडबैक आगामी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बैठकों में केवल संगठन की स्थिति पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की प्रगति, स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों, जनता की अपेक्षाओं और विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यकर्ताओं को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सके।

कांग्रेस का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बार सरकार और संगठन के बीच संवाद की कमी महसूस की गई। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार और संगठन के बीच सीधा समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि कार्यकर्ताओं की समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री और सरकार तक पहुंचें तथा सरकार की योजनाओं की वास्तविक जानकारी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनता तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री के संवाद अभियान के बाद कांग्रेस दूसरे चरण की रणनीति लागू करने की तैयारी में भी जुट गई है। इसके तहत प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को जिला प्रभारी बनाने की योजना तैयार की गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। जैसे ही केंद्रीय नेतृत्व से स्वीकृति मिलेगी, जिला प्रभारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक मंत्री को एक या अधिक जिलों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रभारी मंत्री नियमित रूप से अपने-अपने जिलों का दौरा करेंगे, जिला कांग्रेस कमेटी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, अग्रिम संगठनों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे तथा संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही यदि सरकार से जुड़े किसी विषय पर कार्यकर्ताओं या जनता की कोई शिकायत होगी तो उसके समाधान के लिए भी संबंधित मंत्री आवश्यक कदम उठाएंगे।

पार्टी मुख्यालय भी इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेगा। प्रत्येक बैठक की रिपोर्ट तैयार की जाएगी और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले सुझावों तथा शिकायतों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर संगठनात्मक बदलाव, नई जिम्मेदारियां और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। जिला और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया जाएगा ताकि जहां संगठन कमजोर दिखाई दे, वहां समय रहते आवश्यक सुधार किए जा सकें।

कांग्रेस नेतृत्व की योजना केवल जिला या विधानसभा स्तर तक सीमित नहीं है। पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान, नई टीमों का गठन, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ संगठन किसी भी चुनावी सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है।

संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर भी विशेष चर्चा होगी। कार्यकर्ताओं को योजनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि वे इन्हें प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा है, वहां संबंधित विभागों के माध्यम से समाधान कराया जाए।

पार्टी विपक्ष की गतिविधियों पर भी लगातार नजर बनाए रखेगी। कार्यकर्ताओं से यह जानकारी ली जाएगी कि विभिन्न क्षेत्रों में विपक्ष किन मुद्दों को लेकर सक्रिय है, जनता की प्रतिक्रिया क्या है और किन विषयों पर कांग्रेस को अधिक प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने की आवश्यकता है। इस फीडबैक के आधार पर आगामी महीनों में राजनीतिक रणनीति को और मजबूत किया जाएगा।

कांग्रेस का मानना है कि विधानसभा चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन संगठनात्मक तैयारी जितनी जल्दी शुरू होगी, उसका लाभ चुनाव के समय मिलेगा। यही कारण है कि पार्टी ने मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए अभी से जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत करने और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में व्यापक अभियान शुरू कर दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस संवाद अभियान को लगातार जारी रखती है और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले सुझावों को संगठन तथा सरकार की कार्यशैली में शामिल करती है तो इससे पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूत चुनावी आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का यह राज्यव्यापी संवाद अभियान और उसके बाद मंत्रियों को जिला प्रभारियों की जिम्मेदारी सौंपने की योजना कांग्रेस के मिशन-2027 की सबसे अहम संगठनात्मक पहल मानी जा रही है।