बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और सुहाना माहौल जरूर लेकर आता है, लेकिन इसके साथ बढ़ती नमी और उमस लोगों की परेशानी भी बढ़ा देती है। ऐसे मौसम में सही कपड़ों का चुनाव केवल स्टाइल के लिए ही नहीं, बल्कि आराम और सेहत के लिए भी बेहद जरूरी हो जाता है। कई लोग इस समय सबसे ज्यादा इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि कॉटन पहनना बेहतर रहेगा या फिर रेयॉन। दोनों फैब्रिक हल्के, आरामदायक और फैशन की दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन मानसून के दौरान इनकी खूबियां और कमियां अलग-अलग होती हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किस परिस्थिति में कौन-सा फैब्रिक ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
बारिश के दिनों में कपड़ों का चुनाव केवल उनके लुक को देखकर नहीं करना चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि कपड़ा कितनी जल्दी सूखता है, पसीना कितना सोखता है, त्वचा को कितना आराम देता है और लंबे समय तक पहनने पर कैसा महसूस होता है। यही वजह है कि कॉटन और रेयॉन दोनों की तुलना अक्सर की जाती है।
सबसे पहले बात करें कॉटन की तो यह पूरी तरह प्राकृतिक रेशों से तैयार होने वाला फैब्रिक है। इसे कपास के पौधे से प्राप्त किया जाता है। खेतों में उगाई गई कपास की फसल से रेशे अलग किए जाते हैं। इसके बाद इन रेशों की अच्छी तरह सफाई की जाती है और उन्हें धागों में बदला जाता है। आखिर में इन धागों की बुनाई करके कॉटन का कपड़ा तैयार होता है। प्राकृतिक होने की वजह से यह त्वचा के लिए काफी सुरक्षित माना जाता है और लंबे समय से गर्मियों का सबसे पसंदीदा फैब्रिक रहा है।
दूसरी ओर, रेयॉन को अक्सर सेमी-सिंथेटिक फैब्रिक कहा जाता है। इसकी शुरुआत प्राकृतिक स्रोतों जैसे लकड़ी के गूदे, बांस या अन्य पौधों से मिलने वाले सेल्यूलोज से होती है। इस सेल्यूलोज को विशेष रासायनिक प्रक्रिया से तरल रूप दिया जाता है। इसके बाद इस घोल को बेहद महीन छिद्रों से निकालकर धागों का आकार दिया जाता है और फिर इन धागों की प्रोसेसिंग के बाद रेयॉन फैब्रिक तैयार किया जाता है। यही कारण है कि यह प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों फैब्रिक की कुछ विशेषताओं को अपने अंदर समेटे रहता है।
अगर मानसून में आराम की बात करें तो कॉटन सबसे आगे नजर आता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ब्रीदेबिलिटी है। यानी यह हवा को आसानी से अंदर-बाहर जाने देता है, जिससे शरीर को ठंडक महसूस होती है। जब मौसम में नमी अधिक होती है और लगातार पसीना आता है, तब कॉटन उसे अच्छी तरह सोख लेता है। यही वजह है कि लंबे समय तक पहनने पर भी शरीर चिपचिपा महसूस नहीं करता। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है या जिन्हें एलर्जी की समस्या रहती है, उनके लिए भी कॉटन अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
हालांकि, कॉटन के साथ कुछ ऐसी बातें भी जुड़ी हैं जिन्हें मानसून में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि बारिश में कपड़ा भीग जाए तो यह काफी मात्रा में पानी सोख लेता है। इसके कारण कपड़े भारी हो जाते हैं और उन्हें पूरी तरह सूखने में काफी समय लग सकता है। कई बार लगातार नमी रहने से कपड़ों में बदबू भी आने लगती है। इसके अलावा कॉटन में सिलवटें भी जल्दी पड़ जाती हैं, इसलिए यदि आपको पूरे दिन साफ-सुथरा और प्रेस किया हुआ लुक चाहिए तो यह थोड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।
अब बात करें रेयॉन की तो इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी मुलायम बनावट और शानदार फॉल है। रेयॉन से बने कुर्ते, ड्रेसेज और टॉप्स शरीर पर काफी खूबसूरत दिखाई देते हैं। यही कारण है कि फैशन पसंद करने वाले लोगों के बीच यह फैब्रिक तेजी से लोकप्रिय हुआ है। मानसून में इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि हल्की बारिश में भीगने के बाद यह कॉटन की तुलना में काफी जल्दी सूख जाता है। इसके अलावा इसमें सिलवटें भी अपेक्षाकृत कम पड़ती हैं, जिससे पूरे दिन कपड़े अधिक व्यवस्थित दिखाई देते हैं।
हालांकि, रेयॉन हर स्थिति में कॉटन से बेहतर नहीं कहा जा सकता। बहुत ज्यादा उमस वाले दिनों में यह कॉटन जैसी ठंडक का एहसास नहीं देता। यदि रेयॉन की गुणवत्ता अच्छी न हो तो यह शरीर से चिपकने लगता है, जिससे असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए रेयॉन खरीदते समय उसकी क्वालिटी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
अगर पूरे दिन ऑफिस में रहना हो, कॉलेज जाना हो या लंबे समय तक बाहर रहना हो तो कॉटन का चुनाव अधिक आरामदायक साबित हो सकता है। यह पसीने को अच्छी तरह सोखता है और घंटों पहनने के बाद भी शरीर को हल्का महसूस कराता है। वहीं यदि किसी पार्टी, पारिवारिक समारोह, ऑफिस मीटिंग या दोस्तों के साथ आउटिंग पर जाना हो, जहां स्टाइल भी उतना ही जरूरी हो जितना आराम, वहां रेयॉन बेहतर विकल्प बन सकता है क्योंकि इसका लुक ज्यादा आकर्षक और एलिगेंट दिखाई देता है।
मानसून में केवल फैब्रिक ही नहीं, बल्कि कपड़ों का रंग भी काफी मायने रखता है। इस मौसम में हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का नीला, पेस्टल ग्रीन, लैवेंडर या पीच शेड्स ताजगी का एहसास कराते हैं। बहुत ज्यादा गहरे या भड़कीले रंग कई बार मौसम के अनुसार भारी महसूस हो सकते हैं। इसलिए यदि आप हल्के रंगों के साथ सही फैब्रिक का चुनाव करते हैं तो आपका लुक ज्यादा संतुलित और आकर्षक नजर आता है।
फिटिंग का भी इस मौसम में विशेष महत्व होता है। बहुत ज्यादा टाइट कपड़े बारिश और उमस के दौरान शरीर से चिपक सकते हैं, जिससे असहजता बढ़ जाती है। इसके विपरीत थोड़े ढीले और आरामदायक कपड़े हवा के आवागमन को बेहतर बनाए रखते हैं और शरीर को ज्यादा आराम देते हैं। इसलिए मानसून में हमेशा ऐसे आउटफिट चुनना बेहतर माना जाता है जो न तो बहुत ढीले हों और न ही अत्यधिक टाइट।
कपड़ों की मोटाई पर भी ध्यान देना चाहिए। बहुत मोटे फैब्रिक बारिश में भारी हो जाते हैं और देर से सूखते हैं। वहीं बहुत पतले कपड़े भीगने पर कई बार असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए मध्यम मोटाई वाले फैब्रिक मानसून के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।
यदि आप रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए कपड़े खरीद रहे हैं तो अपनी अलमारी में कॉटन की अच्छी संख्या रखना समझदारी होगी। वहीं कुछ रेयॉन आउटफिट्स भी जरूर रखें ताकि खास मौकों पर स्टाइलिश लुक आसानी से मिल सके। दोनों फैब्रिक की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं और अलग-अलग परिस्थितियों में दोनों उपयोगी साबित होते हैं।
आखिरकार यह कहना गलत नहीं होगा कि मानसून में कॉटन और रेयॉन दोनों की अपनी अलग भूमिका है। यदि प्राथमिकता आराम, ठंडक और पसीना सोखने की क्षमता है तो कॉटन सबसे अच्छा विकल्प माना जाएगा। वहीं यदि आप जल्दी सूखने वाले, कम सिलवट पड़ने वाले और आकर्षक फॉल वाले कपड़े चाहते हैं तो रेयॉन आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। मौसम, जरूरत और अवसर को ध्यान में रखकर यदि इन दोनों फैब्रिक का संतुलित इस्तेमाल किया जाए तो बारिश के पूरे सीजन में आराम और स्टाइल दोनों का बेहतरीन मेल पाया जा सकता है।




