हर साल मानसून आते ही देशभर में डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से एडीज मच्छरों की संख्या बढ़ती है और इसके साथ ही हजारों लोग इस वायरल बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में डेंगू ने भारत के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती का रूप ले लिया है। ऐसे समय में देश को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। भारत के औषधि नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश में डेंगू से बचाव के लिए पहली वैक्सीन QDENGA (क्यूडेंगा) के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन गंभीर डेंगू के मामलों और इससे होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह वैक्सीन जापान की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी Takeda द्वारा विकसित की गई है। इसकी खास बात यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं। यही विशेषता इसे पहले उपलब्ध डेंगू वैक्सीनों से अलग बनाती है और भारत जैसे विशाल देश के लिए अधिक उपयोगी माना जा रहा है।
आखिर क्या है QDENGA वैक्सीन?
क्यूडेंगा एक लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। आसान भाषा में समझें तो इसमें डेंगू वायरस का कमजोर किया गया रूप मौजूद होता है। यह कमजोर वायरस बीमारी पैदा नहीं करता, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को सक्रिय कर देता है। शरीर इस वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करता है।
जब भविष्य में असली डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तब पहले से तैयार प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से प्रतिक्रिया देती है और संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोकने में मदद करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रमुख प्रकार—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4—के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की गई है।
बिना किसी टेस्ट के क्यों लग सकेगी यह वैक्सीन?
अब तक दुनिया में उपलब्ध कुछ डेंगू वैक्सीनों के साथ यह शर्त जुड़ी थी कि टीका लगाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हो चुका है। यदि ऐसा नहीं होता था, तो कुछ मामलों में भविष्य में डेंगू होने पर गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता था।
क्यूडेंगा के मामले में स्थिति अलग है। कंपनी ने व्यापक क्लीनिकल ट्रायल किए, जिनमें 20 हजार से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में पाया गया कि यह वैक्सीन उन लोगों के लिए भी सुरक्षित है जिन्हें पहले कभी डेंगू संक्रमण नहीं हुआ। यही कारण है कि इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
किन लोगों को लगाया जा सकेगा यह टीका?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैक्सीन 6 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जा सकती है। टीकाकरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी।
पहली डोज लगाने के बाद शरीर में डेंगू वायरस के खिलाफ शुरुआती प्रतिरक्षा विकसित होने लगती है। इसके लगभग तीन महीने बाद दूसरी डोज दी जाती है, जिससे यह सुरक्षा और मजबूत तथा लंबे समय तक प्रभावी बनी रहती है।
दोनों डोज निर्धारित समय पर लेना जरूरी होगा, क्योंकि इससे बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होती है और वैक्सीन का पूरा लाभ मिल सकता है।
कितनी प्रभावी साबित हुई है यह वैक्सीन?
कंपनी द्वारा किए गए परीक्षणों के नतीजों ने उत्साह बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, क्यूडेंगा वैक्सीन डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को लगभग 84 प्रतिशत तक कम कर सकती है। वहीं संक्रमण होने के जोखिम में भी करीब 61 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वैक्सीन का उद्देश्य बीमारी को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि उसके गंभीर प्रभावों और मौत के जोखिम को कम करना होता है। इस लिहाज से क्यूडेंगा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत में कब मिलेगी और कितनी हो सकती है कीमत?
फिलहाल कंपनी ने भारत में इसकी आधिकारिक कीमत घोषित नहीं की है। हालांकि, शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक डोज की संभावित कीमत 4,000 से 5,000 रुपये के बीच हो सकती है।
उम्मीद है कि आने वाले समय में यह वैक्सीन निजी अस्पतालों और अधिकृत क्लीनिकों में उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने को लेकर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
क्या भारत में ही होगा इसका निर्माण?
फिलहाल इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में नहीं होगा। इसका निर्माण जर्मनी स्थित उत्पादन इकाइयों में किया जा रहा है। भारत में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए Takeda ने Biological E. के साथ साझेदारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होता है तो इसकी लागत कम हो सकती है और अधिक लोगों तक इसकी पहुंच आसान हो जाएगी। इससे भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा बल्कि भविष्य में अन्य देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित कर सकता है।
क्या अब डेंगू पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
इस सवाल का जवाब विशेषज्ञ ‘नहीं’ में देते हैं। उनका कहना है कि वैक्सीन डेंगू के खिलाफ एक मजबूत हथियार जरूर है, लेकिन यह अकेले बीमारी को समाप्त नहीं कर सकती।
डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मच्छरों की संख्या कम करना, घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, साफ-सफाई बनाए रखना और समय पर इलाज कराना उतना ही जरूरी रहेगा। यदि लोग लक्षणों को नजरअंदाज करेंगे तो बीमारी गंभीर हो सकती है, इसलिए जागरूकता और बचाव के उपाय आगे भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
भारत में डेंगू क्यों बना हुआ है बड़ी चुनौती?
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के आंकड़े बताते हैं कि बीते वर्षों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2023 में देश में लगभग 2.89 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जबकि करीब 1,200 लोगों की मौत हुई। इसके बाद 2024 में संक्रमित मरीजों की संख्या 3.1 लाख से ऊपर पहुंच गई और मृतकों का आंकड़ा भी 1,400 के पार चला गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि डेंगू केवल मौसमी बीमारी नहीं, बल्कि देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। हर वर्ष हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से इस बीमारी से प्रभावित होते हैं।
डॉक्टरों ने जताई उम्मीद
डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। पटना के पीएमसीएच के अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि यह वैक्सीन डेंगू से लड़ाई में एक बड़ा हथियार साबित हो सकती है। उनका मानना है कि जिस प्रकार व्यापक टीकाकरण ने कोविड महामारी से लड़ने में मदद की थी, उसी तरह डेंगू के खिलाफ भी यह वैक्सीन गंभीर मामलों और मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि टीकाकरण के साथ लोगों में जागरूकता बढ़े और मच्छर नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो आने वाले वर्षों में डेंगू का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बचाव के उपाय अभी भी रहेंगे जरूरी
वैक्सीन आने के बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी। घरों के आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और टंकियों की नियमित सफाई करना, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना तथा बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी रहेगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज डेंगू से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक रोक सकते हैं। इसलिए टीकाकरण के साथ-साथ व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर बचाव के उपाय भी जारी रखने होंगे।
नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ेगी डेंगू के खिलाफ लड़ाई
भारत में क्यूडेंगा वैक्सीन को मंजूरी मिलना सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह कदम डेंगू से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों को कम करने की दिशा में नई उम्मीद लेकर आया है। हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि केवल वैक्सीन के भरोसे डेंगू पर पूरी तरह जीत हासिल नहीं की जा सकती। स्वच्छता, मच्छर नियंत्रण, समय पर जांच, उचित इलाज और जनजागरूकता के साथ यदि टीकाकरण अभियान को भी मजबूती मिले, तो आने वाले वर्षों में भारत डेंगू के बढ़ते खतरे पर काफी हद तक नियंत्रण पाने में सफल हो सकता है।




