चंडीगढ़ में किरायेदारी व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल, घर बैठे ऑनलाइन होगा रेंट एग्रीमेंट; प्रशासन ला रहा नया टेनेंसी पोर्टल

चंडीगढ़ में किरायेदारी व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल, घर बैठे ऑनलाइन होगा रेंट एग्रीमेंट; प्रशासन ला रहा नया टेनेंसी पोर्टल

चंडीगढ़ में किराये के मकानों से जुड़ी प्रक्रिया जल्द ही पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। मकान मालिकों और किरायेदारों को अब रेंट एग्रीमेंट तैयार कराने, पंजीकरण करवाने और उससे जुड़े अन्य कार्यों के लिए कोर्ट या सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन एक आधुनिक टेनेंसी पोर्टल लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए किरायेदारी से जुड़ी अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल लोगों का समय और खर्च बचेगा, बल्कि किरायेदारी से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

इस दिशा में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रस्तावित पोर्टल की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पोर्टल ऐसा बनाया जाए जिसे आम नागरिक बिना किसी तकनीकी परेशानी के आसानी से इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधा तभी सफल मानी जाएगी जब हर वर्ग का व्यक्ति, चाहे वह तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हो या नहीं, आसानी से इसका लाभ उठा सके।

उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित हो और इसमें उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा पोर्टल को स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि शहर के अधिक से अधिक लोग इसका सहजता से उपयोग कर सकें। प्रशासन का उद्देश्य केवल ऑनलाइन सुविधा देना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जो भरोसेमंद, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल हो।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों ने बताया कि नया पोर्टल शुरू होने के बाद नागरिक serviceonline.gov.in के माध्यम से किरायेदारी समझौते का ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें प्रत्येक पंजीकृत समझौते के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) भी जारी किया जाएगा। यही नहीं, यदि भविष्य में किराये में संशोधन करना हो या किसी प्रकार की शिकायत दर्ज करानी हो, तो वह भी ऑनलाइन संभव होगा। शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

प्रशासन ने इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स-2026 का प्रारूप भी सार्वजनिक कर दिया है। इन नियमों पर आम जनता, मकान मालिकों, किरायेदारों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। प्रशासन ने इसके लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया है। इच्छुक नागरिक अपने सुझाव एस्टेट ऑफिस में जमा करा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों से मिलने वाले सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे, ताकि व्यवस्था अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बन सके।

बताया गया है कि ये नियम असम टेनेंसी एक्ट-2021 की धारा 44 के तहत तैयार किए गए प्रावधानों के आधार पर बनाए गए हैं, जिन्हें चंडीगढ़ में लागू किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इन नियमों के लागू होने के बाद किरायेदारी व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और कानूनी विवादों की संख्या में भी कमी आएगी।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार किसी भी नए किरायेदारी समझौते की जानकारी अधिकतम दो महीने के भीतर ऑनलाइन तहसीलदार के समक्ष दर्ज कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सात दिनों के भीतर संबंधित पक्षों को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी कर दिया जाएगा। यह यूआईएन भविष्य में किसी भी कानूनी या प्रशासनिक आवश्यकता के समय प्रमाण के रूप में कार्य करेगा और मकान मालिक तथा किरायेदार दोनों के लिए एक आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पोर्टल में कई सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए हैं। किसी भी आवेदन को अंतिम रूप देने से पहले ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा। इससे फर्जी किरायेदारी समझौतों या गलत पंजीकरण की संभावनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। इसके अलावा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी केवल संबंधित पक्षों और अधिकृत सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित रहेगी। इससे नागरिकों की निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी और डेटा के दुरुपयोग की आशंका कम होगी।

नए नियमों में किराये के निर्धारण और संशोधन को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार तहसीलदार को किराया तय करने और आवश्यकता पड़ने पर उसमें संशोधन करने का अधिकार होगा। यदि किसी मामले में किराये को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो संबंधित प्रकरण सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वैल्यूअर के पास भेजा जाएगा। उसके मूल्यांकन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिससे दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बनाए रखा जा सके।

कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जब मकान मालिक किसी कारणवश किराया स्वीकार करने से इनकार कर देता है। ऐसी स्थिति में किरायेदार को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी नए नियमों में विशेष प्रावधान किया गया है। यदि मकान मालिक किराया लेने से मना करता है, तो किरायेदार निर्धारित प्रक्रिया के तहत तहसीलदार के पास किराये की राशि जमा करा सकेगा। इससे किरायेदार पर बकाया किराये का आरोप लगाकर उसे परेशान करने या बेदखल करने की संभावनाएं कम हो जाएंगी।

वहीं, यदि मकान मालिक या उसके कानूनी उत्तराधिकारी को किसी कारणवश संपत्ति का कब्जा वापस लेना हो, तो वे अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। एडीसी को ऐसे मामलों में आवश्यक आदेश जारी करने और आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों अथवा अधिवक्ताओं की नियुक्ति करने का अधिकार भी होगा। इससे कब्जा संबंधी मामलों के समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कानूनी रूप से स्पष्ट होगी।

प्रशासन ने विवादों के शीघ्र निपटारे पर भी विशेष जोर दिया है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार किसी विवाद में जवाब दाखिल करने के लिए 15 से 30 दिनों का समय दिया जाएगा। वहीं, ट्रिब्यूनल में दायर अपीलों का निपटारा अधिकतम 120 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों की संख्या कम होने की उम्मीद है।

यदि किसी मामले में बकाया राशि या रिफंड का भुगतान करना होगा, तो उस पर ब्याज की दर भारतीय स्टेट बैंक की एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) से दो प्रतिशत अधिक निर्धारित की जाएगी। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास है।

सुनवाई की प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाया गया है। किसी भी मामले में संबंधित पक्ष स्वयं उपस्थित हो सकते हैं या फिर अपने अधिकृत प्रतिनिधि अथवा अधिवक्ता के माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं। इससे बाहर रहने वाले मकान मालिकों और व्यस्त पेशेवरों को भी राहत मिलेगी।

प्रशासन का मानना है कि नई ऑनलाइन किरायेदारी व्यवस्था लागू होने के बाद शहर में किराये के मकानों का एक व्यापक और प्रमाणिक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। इससे अवैध किरायेदारी, फर्जी दस्तावेजों और अनियमितताओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही मकान मालिकों और किरायेदारों दोनों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण मिलेगा और विवादों का समाधान पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि डिजिटल टेनेंसी सिस्टम से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भविष्य में संपत्ति संबंधी सत्यापन आसान होगा और प्रशासन के पास भी शहर की किरायेदारी व्यवस्था का अद्यतन डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे नीति निर्माण, कानून व्यवस्था और शहरी प्रशासन को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में सहायता मिलेगी।

चंडीगढ़ प्रशासन की यह पहल डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित टेनेंसी पोर्टल सफलतापूर्वक लागू होता है, तो शहर के हजारों मकान मालिकों और किरायेदारों को बड़ी राहत मिलेगी। रेंट एग्रीमेंट से लेकर शिकायतों के समाधान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और अदालतों पर बढ़ते मामलों का बोझ कम करने में भी मदद मिलेगी।