चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति (एससी) कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े आरक्षण को लेकर फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। सरकार ने ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के पदों पर पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधान को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निपटारे तक स्थगित करने का फैसला लिया है। हालांकि इस निर्णय का असर सीधी भर्ती पर नहीं पड़ेगा और ग्रुप-ए तथा ग्रुप-बी के पदों पर भर्ती के लिए पहले से लागू आरक्षण रोस्टर यथावत रहेगा।
सरकार की ओर से जारी नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित व्यवस्था केवल अंतरिम रूप से रोकी गई है। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक हाईकोर्ट में लंबित अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता। इस दौरान पदोन्नति के लिए निर्धारित एससी कोटे के पदों को खाली रखते हुए आरक्षित किया जाएगा, ताकि न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।
सरकार का यह फैसला उस न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है, जो अनुसूचित जाति कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने की नीति को लेकर चल रही है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2025 को कमलजीत सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की उस नीति को बरकरार रखा था, जिसके तहत एससी कर्मचारियों को पदोन्नति में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। हालांकि न्यायालय ने इसके साथ क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने से संबंधित निर्देश भी दिए थे।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस निर्णय को स्वीकार करने के बजाय इसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई है। सरकार ने एलपीए संख्या 1054/2026 के माध्यम से हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। यह अपील फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसी लंबित कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है।
नए सरकारी निर्देशों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को जारी आरक्षण नीति के तहत एससी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देते हुए फिलहाल नई पदोन्नतियां नहीं की जाएंगी। संबंधित पदों को आरक्षित रखकर रिक्त छोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि न्यायालय का अंतिम फैसला सरकार की मौजूदा नीति के अनुरूप आता है तो आरक्षित पदों की स्थिति में किसी तरह की समस्या न आए।
हालांकि सरकार ने इस अंतरिम रोक के साथ एक महत्वपूर्ण राहत भी स्पष्ट की है। ऐसे एससी कर्मचारी जो संबंधित सेवा नियमों के तहत सामान्य प्रक्रिया में पदोन्नति के योग्य हैं और वरिष्ठता-सह-योग्यता यानी सीनियरिटी-कम-मेरिट के आधार पर पदोन्नत किए जा सकते हैं, उनकी पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी। दूसरे शब्दों में, केवल आरक्षण व्यवस्था के अस्थायी स्थगन के कारण किसी पात्र एससी कर्मचारी को सामान्य पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई एससी कर्मचारी सेवा नियमों में निर्धारित वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर पदोन्नति के लिए पात्र है, तो संबंधित विभाग उसके मामले पर विचार करेगा। ऐसे कर्मचारियों की पदोन्नति अन्य पात्र कर्मचारियों की तरह सेवा नियमों के अनुसार की जा सकेगी। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी जो आरक्षण के अतिरिक्त सामान्य पदोन्नति मानदंडों के आधार पर पदोन्नति पाने की स्थिति में हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर पदोन्नत होने वाले एससी कर्मचारियों को भी सरकार की 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व नीति की गणना में शामिल किया जाएगा। इसका अर्थ है कि ऐसे कर्मचारियों की पदोन्नति होने पर उनका प्रतिनिधित्व एससी कर्मचारियों के निर्धारित 20 प्रतिशत हिस्से में गिना जाएगा।
सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को स्थगित करते हुए बाकी पदों को भरने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। जिन पदों पर आरक्षण के कारण रोक नहीं है, उन्हें संबंधित सेवा नियमों के अनुसार वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर भरा जा सकेगा। इस तरह विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं होगी, बल्कि आरक्षण से जुड़े पदों और सामान्य पदोन्नति वाले पदों के बीच अंतर रखा जाएगा।
सरकारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन पदोन्नति संवर्गों में अनुसूचित जाति कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व पहले से 20 प्रतिशत या उससे अधिक है, वहां भी पात्र कर्मचारियों के मामलों को पूरी तरह रोककर नहीं रखा जाएगा। यदि कोई एससी अधिकारी या कर्मचारी सेवा नियमों के तहत वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर पदोन्नति के लिए पात्र है तो उसके मामले पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
इस प्रावधान का मतलब है कि किसी कर्मचारी को केवल इसलिए पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाएगा कि संबंधित कैडर में एससी कर्मचारियों का निर्धारित 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व पहले ही पूरा हो चुका है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्रता और सेवा नियमों के आधार पर पदोन्नति के मामलों पर अलग से विचार करना होगा।
इस पूरी व्यवस्था का असर केवल पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधान पर है। सरकार ने सीधी भर्ती से संबंधित आरक्षण व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के पदों पर सीधी नियुक्तियों के लिए लागू आरक्षण रोस्टर पहले की तरह जारी रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीधी भर्ती में एससी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण और रोस्टर से संबंधित पूर्व दिशा-निर्देशों को प्रभावित नहीं किया गया है।
मानव संसाधन विभाग ने इस संबंध में 19 दिसंबर 2023 को जारी किए गए अपने पुराने निर्देशों के स्थान पर नए निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश में पदोन्नति और सीधी भर्ती की व्यवस्थाओं को अलग-अलग स्पष्ट किया गया है, ताकि विभागों में आरक्षण नीति के क्रियान्वयन को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों में विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि लंबित न्यायिक मामले के दौरान पदोन्नति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप संचालित किया जाए। आरक्षित पदों को रिक्त रखने और पात्र कर्मचारियों के सामान्य पदोन्नति मामलों पर विचार करने की व्यवस्था इसी उद्देश्य से की गई है।
यह मामला हरियाणा की सरकारी सेवाओं में आरक्षण नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पदोन्नति में आरक्षण लंबे समय से प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। सरकार द्वारा एससी कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत पदोन्नति आरक्षण की नीति लागू की गई थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर न्यायालय में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने नीति को बरकरार रखते हुए क्रीमी लेयर को इससे बाहर रखने का निर्देश दिया। अब सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर कर रखी है।
ऐसे में सरकार ने अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक ऐसी स्थिति बनाए रखने का प्रयास किया है, जिससे बाद में पदोन्नति और आरक्षित पदों की गणना को लेकर प्रशासनिक जटिलताएं न पैदा हों। आरक्षित पदों को खाली रखने का फैसला इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि अंतिम फैसला सरकार की मौजूदा नीति के पक्ष में आता है तो इन पदों को निर्धारित आरक्षण के अनुसार भरा जा सकता है। वहीं न्यायालय का निर्णय अलग होने की स्थिति में सरकार को उसके अनुरूप नई व्यवस्था लागू करनी होगी।
सरकारी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया वरिष्ठता, योग्यता और संबंधित सेवा नियमों के आधार पर चलती है। ऐसे में नए निर्देशों के बाद विभागों को प्रत्येक कर्मचारी की पात्रता अलग-अलग जांचनी होगी। जिन कर्मचारियों का मामला केवल पदोन्नति में आरक्षण के तहत आता है, उनकी पदोन्नति फिलहाल रोककर पद आरक्षित रखा जाएगा। वहीं जो कर्मचारी सामान्य वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर पदोन्नति के पात्र हैं, उनके मामले में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज होने की संभावना है। एससी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा प्रतिनिधित्व और समान अवसर से जुड़ा है, जबकि सरकार के लिए न्यायालय में लंबित मामले के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया को कानूनी स्थिति के अनुरूप बनाए रखना चुनौती है। सरकार ने इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के आदेश से यह भी स्पष्ट है कि सीधी भर्ती के मामले में एससी आरक्षण पर फिलहाल कोई रोक या बदलाव नहीं है। यानी भविष्य में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के पदों पर होने वाली सीधी भर्तियों में मौजूदा आरक्षण रोस्टर के अनुसार एससी वर्ग को मिलने वाला लाभ जारी रहेगा। बदलाव केवल उन मामलों में किया गया है, जहां पदोन्नति के दौरान आरक्षण का लाभ दिया जाना था।
प्रशासनिक स्तर पर अब संबंधित विभागों को नए निर्देशों के अनुसार अपनी पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी। जहां आरक्षित पदों पर पदोन्नति प्रस्तावित थी, वहां उन पदों को फिलहाल खाली रखा जाएगा। वहीं सामान्य पदोन्नति के मामलों में सेवा नियमों के तहत कार्रवाई जारी रह सकती है। इससे विभागीय पदोन्नतियों पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी।
हरियाणा सरकार का यह निर्णय फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और इसकी अवधि हाईकोर्ट में लंबित अपील के अंतिम निर्णय से जुड़ी है। इसलिए आने वाले समय में न्यायालय का फैसला इस पूरी व्यवस्था की दिशा तय करेगा। यदि अदालत सरकार की नीति के पक्ष में निर्णय देती है तो पदोन्नति में 20 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि अदालत कोई अलग व्यवस्था तय करती है तो सरकार को उसी के अनुसार अपनी नीति और पदोन्नति प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर हरियाणा सरकार ने पदोन्नति में एससी आरक्षण को लेकर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने की कोशिश की है। आरक्षण के तहत पदोन्नति रोककर संबंधित पदों को सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि सामान्य नियमों के तहत योग्य एससी कर्मचारियों की पदोन्नति जारी रह सकती है। दूसरी ओर सीधी भर्ती में एससी आरक्षण पूरी तरह बरकरार रहेगा। अब इस मामले में हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है, जिसके बाद ही पदोन्नति में आरक्षण को लेकर स्थायी तस्वीर साफ होगी।




