संसद के मानसून सत्र का आज 13वां दिन है और दोनों सदनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। बीते कुछ दिनों से राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा लगातार संसद की कार्यवाही पर हावी रहा है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सत्तापक्ष विपक्ष के आरोपों का लगातार जवाब दे रहा है। ऐसे माहौल में सरकार की कोशिश आज अपने शेष लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने और उन्हें पारित कराने की रहेगी।
मानसून सत्र के दौरान सरकार ने कुल आठ महत्वपूर्ण विधेयकों को सूचीबद्ध किया था। इनमें से अब तक तीन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो चुके हैं। मंगलवार को भी सरकार को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली, जब टैक्सेशन एंड अदर्स लॉ (संशोधन) विधेयक लोकसभा से मंजूर हो गया। इससे पहले वंदे मातरम विधेयक, पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संशोधन विधेयक दोनों सदनों की स्वीकृति प्राप्त कर चुके हैं।
हालांकि सरकार के सामने अभी कई अहम विधेयक लंबित हैं। इनमें जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, आयकर (संशोधन) विधेयक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक शामिल हैं। संसदीय कार्यसूची के अनुसार सरकार इन विधेयकों पर चर्चा कराकर उन्हें दोनों सदनों से पारित कराने का प्रयास कर सकती है।
उधर, संसद की कार्यवाही पिछले कई दिनों से राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रभावित हो रही है। विपक्ष इस मामले में जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर 31 जुलाई से लोकसभा और राज्यसभा दोनों में लगातार हंगामा देखने को मिला है। कई बार शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बाधित हुई और सदनों को निर्धारित समय से पहले स्थगित भी करना पड़ा।
मंगलवार को राज्यसभा में इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और ट्रस्ट को व्यापक भूमि भी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं मंदिर से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं, इसलिए यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं तो केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य एजेंसियां अब तक सक्रिय क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं।
खड़गे के बयान पर सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने राम मंदिर निर्माण का पहले विरोध किया था, वे अब इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मंदिर निर्माण के समय विरोध दर्ज कराया था और अब वही दल इस विषय पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया।
संसद के मौजूदा सत्र में विधायी कार्य और राजनीतिक टकराव दोनों समानांतर रूप से चलते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को समय पर पूरा करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है। ऐसे में कई बार चर्चा के बजाय नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन प्रमुख विषय बन जाते हैं, जिससे सदनों की उत्पादकता प्रभावित होती है।
सरकार का कहना है कि सूचीबद्ध विधेयकों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, कर प्रणाली में सुधार करना, शिक्षा क्षेत्र में नई व्यवस्थाएं लागू करना और एमएसएमई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूती देना है। वहीं विपक्ष का तर्क है कि इन विधेयकों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए और संसद में सभी पक्षों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि कानून बनने से पहले हर पहलू पर विचार किया जा सके।
आज के दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सरकार की प्राथमिकता लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की रहेगी। यदि सदनों में व्यवस्थित ढंग से कार्यवाही चलती है तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान संभव है। हालांकि यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या फिर हंगामे का दौर जारी रहता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र का शेष हिस्सा सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करना चाहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर बहस, आरोप-प्रत्यारोप और महत्वपूर्ण विधेयकों पर निर्णय—तीनों एक साथ देखने को मिल सकते हैं।
अब तक तीन विधेयकों के दोनों सदनों से पारित होने के बाद सरकार का फोकस शेष पांच विधेयकों पर केंद्रित है। यदि इन विधेयकों को भी संसद की मंजूरी मिल जाती है तो मानसून सत्र सरकार के लिए विधायी दृष्टि से काफी सफल माना जाएगा। दूसरी ओर, यदि लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित होती रही तो कई प्रस्तावित कानूनों पर निर्णय टल सकता है। इसलिए आज का दिन संसद की कार्यवाही और सरकार के विधायी कार्यक्रम, दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



