सिरदर्द हो, कमर में खिंचाव, गर्दन में दर्द, पैरों में तकलीफ या पेट में किसी तरह की परेशानी, दर्द होते ही बहुत से लोगों का पहला ख्याल पेनकिलर लेने का होता है। दर्द से जल्द राहत मिलने के कारण ये दवाएं बेहद सुविधाजनक लगती हैं। खासकर ऐसी दवाएं जो मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की पर्ची के आसानी से मिल जाती हैं।
लेकिन दर्द कम करने वाली दवा का मतलब यह नहीं है कि हर तरह के दर्द में वही गोली इस्तेमाल की जा सकती है। अलग-अलग दवाओं का शरीर पर असर अलग होता है और उनकी खुराक, इस्तेमाल का तरीका तथा सावधानियां भी अलग हो सकती हैं। कई बार लोग पुराने अनुभव के आधार पर वही पेनकिलर दोबारा लेते रहते हैं, जबकि दर्द का कारण इस बार बिल्कुल अलग हो सकता है।
यही आदत आगे चलकर परेशानी खड़ी कर सकती है। जरूरत से ज्यादा दवा लेना, अलग-अलग दवाओं में मौजूद एक ही सक्रिय घटक को पहचान न पाना, खाली पेट दवा खाना या लगातार दर्द रहने के बावजूद डॉक्टर से सलाह न लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
लगातार दर्द हो तो सिर्फ गोली पर निर्भर न रहें
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पेनकिलर मुख्य रूप से दर्द के लक्षण को कम करने का काम करती है। हर बार यह दर्द की मूल वजह का इलाज नहीं करती। उदाहरण के लिए मांसपेशियों में खिंचाव, चोट, सिरदर्द, दांत का दर्द और किसी अंदरूनी बीमारी से होने वाला दर्द एक जैसा नहीं होता।
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार या लंबे समय तक दर्द हो रहा है और वह केवल पेनकिलर लेकर उसे दबाता रहता है, तो असली समस्या की पहचान में देरी हो सकती है। इसलिए सामान्य और कभी-कभार होने वाले दर्द में दवा लेने से पहले उसकी जरूरत समझना जरूरी है। वहीं दर्द लगातार बना रहे, बढ़ रहा हो या बार-बार लौट रहा हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा बेहतर है।
दर्द की जगह देखकर दवा तय करना सही तरीका नहीं
कई लोगों की एक आम धारणा होती है कि शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो तो एक ही पेनकिलर काम कर जाएगी। यही सोच सबसे बड़ी गलतियों में से एक हो सकती है। किसी व्यक्ति को सिर में दर्द है और किसी दूसरे को घुटने या कमर में दर्द है, तो दोनों के पीछे कारण अलग हो सकते हैं।
दर्द का इलाज उसकी वजह, व्यक्ति की उम्र, दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं और पहले से चल रही दवाओं पर भी निर्भर कर सकता है। इसलिए किसी परिचित ने किसी दवा से राहत पाई है तो उसी दवा को अपने लिए भी सही मान लेना उचित नहीं है।
खास तौर पर अगर दर्द किसी चोट, सूजन, बुखार या दूसरी समस्या के साथ हो रहा है, तो केवल दर्द दबाने के बजाय कारण को समझना ज्यादा जरूरी है।
दवा का पैकेट पढ़ना क्यों जरूरी है?
बिना प्रिस्क्रिप्शन मिलने वाली दवाओं को लोग अक्सर सामान्य और पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं। यही वजह है कि दवा खरीदते समय पैकेट या लेबल पर लिखी जानकारी को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही जानकारी आपको दवा की सही खुराक, चेतावनी, संभावित साइड इफेक्ट और किन परिस्थितियों में सावधानी बरतनी है, इसके बारे में बता सकती है।
किसी दवा को लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें कौन-सा सक्रिय घटक मौजूद है। अगर आप पहले से कोई दूसरी दवा ले रहे हैं तो यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि दोनों दवाओं में एक ही घटक तो नहीं है। अनजाने में एक ही तरह की दवा दो अलग-अलग ब्रांड नामों से लेने पर कुल खुराक जरूरत से ज्यादा हो सकती है।
यदि लेबल पर दी गई जानकारी समझ में न आए या आपको किसी दवा के इस्तेमाल को लेकर संदेह हो, तो फार्मासिस्ट या डॉक्टर से पूछना बेहतर है।
ज्यादा दर्द का मतलब ज्यादा खुराक नहीं
दर्द अधिक होने पर कुछ लोग यह सोच लेते हैं कि दवा की अगली खुराक जल्दी लेने या मात्रा बढ़ाने से जल्दी राहत मिलेगी। लेकिन दवा की खुराक अपनी मर्जी से बढ़ाना सुरक्षित तरीका नहीं है।
हर पेनकिलर की निर्धारित मात्रा और खुराक के बीच अंतर अलग हो सकता है। इसलिए किसी एक दवा के लिए लागू नियम को दूसरी दवा पर लागू नहीं किया जा सकता। पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करना जरूरी है और डॉक्टर ने कोई विशेष खुराक बताई है तो उसी के अनुसार दवा लेनी चाहिए।
निर्धारित मात्रा से अधिक दवा लेने पर शरीर के विभिन्न अंगों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। कुछ पेनकिलर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लिवर या किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए दर्द कम न होने पर बार-बार गोली लेने के बजाय यह पता करना ज्यादा जरूरी है कि दर्द आखिर क्यों बना हुआ है।
एक साथ कई दवाएं लेना भी हो सकता है जोखिम भरा
सर्दी-जुकाम, सिरदर्द या शरीर में दर्द के लिए लोग कई तरह की कॉम्बिनेशन दवाएं इस्तेमाल कर लेते हैं। समस्या तब पैदा हो सकती है जब अलग-अलग दवाओं में एक ही दर्द निवारक घटक मौजूद हो।
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति ने दर्द की एक गोली ली और कुछ समय बाद सर्दी या बुखार की दूसरी दवा ले ली। यदि दोनों में समान सक्रिय घटक मौजूद है तो व्यक्ति को पता चले बिना कुल मात्रा बढ़ सकती है।
इसीलिए एक से ज्यादा ओवर-द-काउंटर दवाएं लेते समय उनके लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए। सिर्फ ब्रांड का नाम देखकर यह तय करना सही नहीं है कि दोनों दवाएं अलग हैं।
खाली पेट दवा लेने की आदत से बचें
पेनकिलर लेने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही दवा चुनना। कुछ दर्द निवारक दवाएं पेट की अंदरूनी परत में जलन या दूसरी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इसलिए कई दवाओं के लिए भोजन के साथ या भोजन के बाद लेने की सलाह दी जाती है।
हालांकि हर पेनकिलर के निर्देश एक जैसे नहीं होते। इसलिए यह मान लेना कि हर दर्द की गोली हमेशा खाने के बाद ही लेनी है, भी सही नहीं होगा। जिस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके पैकेट पर दिए निर्देशों को पढ़ना जरूरी है।
अगर दवा लेने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार जलन, उल्टी, खून आने जैसे असामान्य लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य साइड इफेक्ट मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए पेनकिलर का इस्तेमाल समान नहीं हो सकता। जिन लोगों को पहले से लिवर या किडनी से जुड़ी समस्या है, पेट में अल्सर या रक्तस्राव की समस्या रही है, वे दूसरी नियमित दवाएं लेते हैं या किसी दवा से एलर्जी का इतिहास है, उन्हें बिना सलाह के पेनकिलर लेने से विशेष रूप से बचना चाहिए।
इसी तरह बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी दवा का चुनाव और खुराक अलग हो सकती है। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा देखकर अपने लिए वही दवा और वही मात्रा तय करना उचित नहीं है।
यदि पहले से कोई बीमारी है या नियमित दवाएं चल रही हैं, तो नई पेनकिलर लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
कब दर्द को सामान्य समझना गलती हो सकती है?
कभी-कभार होने वाला हल्का दर्द सामान्य कारणों से हो सकता है, लेकिन हर दर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं है। अगर दर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, लगातार बढ़ता रहे, बार-बार वापस आए या उसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण भी दिखाई दें, तो केवल पेनकिलर लेकर इंतजार नहीं करना चाहिए।
इसी तरह बिना स्पष्ट कारण के लंबे समय तक सिरदर्द, पेट दर्द, सीने में दर्द, लगातार कमर दर्द या शरीर के किसी हिस्से में बनी रहने वाली तकलीफ की जांच जरूरी हो सकती है।
दर्द को दबाने से थोड़ी देर राहत मिल सकती है, लेकिन यदि पीछे कोई बीमारी है तो उसका पता लगाना और सही इलाज करना जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह कब जरूरी हो जाती है?
अगर सामान्य उपायों या निर्देशों के अनुसार दवा लेने के बाद भी दर्द ठीक नहीं हो रहा है, तो बार-बार अपनी तरफ से पेनकिलर लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब दर्द रोजाना होने लगे या सामान्य कामकाज प्रभावित करने लगे।
डॉक्टर दर्द की जगह, अवधि, तीव्रता और उससे जुड़े दूसरे लक्षणों को देखकर कारण समझने की कोशिश करते हैं। जरूरत पड़ने पर जांच भी कराई जा सकती है। इससे केवल लक्षण दबाने के बजाय समस्या का सही इलाज करने में मदद मिल सकती है।
पेनकिलर लेते समय याद रखें ये बातें
दर्द से राहत के लिए पेनकिलर उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इन्हें बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करना सही नहीं है। किसी भी दवा को लेने से पहले उसका नाम, सक्रिय घटक, खुराक और चेतावनियां देखना जरूरी है। एक ही समय में अलग-अलग दवाओं में मौजूद समान घटक की अनजाने में दोहरी खुराक से बचना चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि दर्द की तीव्रता बढ़ने पर दवा की मात्रा अपनी मर्जी से नहीं बढ़ानी चाहिए। लगातार या असामान्य दर्द होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
पेनकिलर को दर्द के लिए तुरंत राहत देने वाला साधन जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे हर तरह के दर्द की एकमात्र दवा समझना सही नहीं है। सही दवा, सही मात्रा और सही समय का ध्यान रखना ही इसके सुरक्षित इस्तेमाल की पहली शर्त है।




