हरियाली तीज पर प्रेग्नेंट महिलाएं न रखें सख्त व्रत, इन 6 संकेतों को देखते ही तुरंत करें भोजन-पानी

हरियाली तीज पर प्रेग्नेंट महिलाएं न रखें सख्त व्रत, इन 6 संकेतों को देखते ही तुरंत करें भोजन-पानी

हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ पूजा करती हैं और कई महिलाएं निर्जला या बिना अन्न वाला व्रत भी रखती हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान उपवास रखना सामान्य दिनों की तुलना में अलग विषय है। इस अवस्था में महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की पोषण और ऊर्जा संबंधी जरूरतें भी जुड़ी होती हैं। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को धार्मिक परंपरा निभाने से पहले अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

गाइनेकोलॉजिस्ट और इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. आस्था गुप्ता के मुताबिक, गर्भावस्था में लंबे समय तक भूखे या प्यासे रहना हर महिला के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। खासकर ऐसी महिलाओं को सावधानी बरतने की जरूरत है, जिन्हें पहले से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, एनीमिया या अत्यधिक उल्टी जैसी समस्या रहती है। कुछ मामलों में डॉक्टर महिला की स्थिति को देखते हुए व्रत रखने से मना कर सकते हैं, जबकि कुछ महिलाओं को हल्के और संशोधित तरीके से उपवास करने की अनुमति दी जा सकती है।

गर्भावस्था में क्यों बदल जाती है व्रत की तस्वीर?

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। भ्रूण के विकास के लिए लगातार ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ऐसे में कई घंटों तक भोजन न लेना या पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं पीना महिला के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

खाली पेट रहने से कुछ महिलाओं में ब्लड शुगर कम हो सकता है। इससे कमजोरी, कंपकंपी, चक्कर, बेचैनी, सिरदर्द या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। वहीं, पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिला को केवल इस वजह से लंबे समय तक भूखा-प्यासा नहीं रहना चाहिए कि त्योहार का व्रत पूरा हो जाए।

सिर्फ फल और मिठाई खाकर न निकालें पूरा दिन

व्रत के दौरान कई महिलाएं फल, मिठाई या कुछ चुनिंदा चीजों पर निर्भर रहती हैं। लेकिन गर्भावस्था में केवल मीठी चीजें या फल पर्याप्त पोषण नहीं दे सकते। शरीर को कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन और हेल्दी फैट की भी आवश्यकता होती है।

यदि डॉक्टर ने व्रत रखने की अनुमति दी है, तो महिला को अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार ऐसे खाद्य पदार्थ चुनने चाहिए जो लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करें। तरल पदार्थों का सेवन भी पर्याप्त रखना जरूरी है, बशर्ते डॉक्टर ने किसी खास कारण से पानी या तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।

व्रत के दौरान क्या खाना या पीना उचित रहेगा, यह गर्भावस्था के चरण, महिला की सेहत, वजन, ब्लड शुगर और अन्य मेडिकल स्थितियों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए इंटरनेट या दूसरे लोगों की सलाह के आधार पर डाइट तय करने के बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।

इन महिलाओं को व्रत रखने से पहले विशेष सावधानी

हर गर्भवती महिला की स्थिति एक जैसी नहीं होती। जिस महिला की प्रेग्नेंसी सामान्य चल रही हो, उसके लिए भी निर्जला व्रत उचित है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं। वहीं कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना अधिक जोखिम पैदा कर सकता है।

अगर गर्भवती महिला को डायबिटीज है या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव रहता है, तो लंबे समय तक खाली पेट रहने से परेशानी हो सकती है। लो ब्लड प्रेशर वाली महिलाओं को कमजोरी और चक्कर अधिक महसूस हो सकते हैं। एनीमिया, बार-बार उल्टी, अत्यधिक मॉर्निंग सिकनेस या किसी अन्य प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन की स्थिति में भी बिना मेडिकल सलाह के उपवास करना सही नहीं माना जाता।

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी या पहले से किसी बीमारी से जूझ रही महिलाओं को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में त्योहार के कारण अपनी नियमित दवा, भोजन या डॉक्टर द्वारा निर्धारित डाइट में बदलाव नहीं करना चाहिए।

व्रत के दौरान दिखें ये 6 संकेत तो बिल्कुल न करें नजरअंदाज

प्रेग्नेंसी में व्रत रखते समय शरीर के संकेतों पर लगातार ध्यान देना जरूरी है। अगर शरीर किसी तरह की परेशानी का संकेत दे रहा है, तो केवल व्रत पूरा करने के लिए उसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

1. तेज चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना

अगर खड़े होते समय बहुत ज्यादा चक्कर आएं, आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे या महिला को लगे कि वह गिर सकती है, तो तुरंत बैठना या लेटना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखना उचित नहीं है। बेहोशी हो जाए तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

2. असामान्य और बहुत ज्यादा कमजोरी

सामान्य थकान और अत्यधिक कमजोरी में फर्क समझना जरूरी है। अगर शरीर इतना कमजोर महसूस हो कि सामान्य गतिविधियां करना मुश्किल हो जाए या लगातार ऊर्जा खत्म होती महसूस हो, तो इसे व्रत का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज न करें।

3. लगातार उल्टी या तेज सिरदर्द

बार-बार उल्टी होने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसी तरह अचानक या बहुत तेज सिरदर्द भी ध्यान देने योग्य लक्षण है। ऐसी स्थिति में उपवास जारी रखने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

4. दिल की धड़कन तेज होना या सांस लेने में परेशानी

अगर बिना किसी खास मेहनत के दिल बहुत तेज धड़कने लगे, धड़कन असामान्य महसूस हो या सांस लेने में तकलीफ होने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे लक्षणों के साथ व्रत जारी रखना उचित नहीं है।

5. पेशाब बहुत कम आना या रंग काफी गहरा होना

पेशाब सामान्य से काफी कम होना या उसका रंग बहुत गहरा दिखाई देना शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। खासकर निर्जला व्रत के दौरान यह समस्या बढ़ सकती है। ऐसे संकेत मिलने पर शरीर को हाइड्रेट करना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

6. बच्चे की मूवमेंट कम महसूस होना

गर्भावस्था के उस चरण में जब महिला नियमित रूप से बच्चे की हलचल महसूस करती है, तब मूवमेंट में स्पष्ट कमी या बिल्कुल हलचल महसूस न होना गंभीरता से लेना चाहिए। इसे केवल भूख या व्रत की वजह मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना जरूरी है।

धार्मिक आस्था के साथ सेहत को भी दें प्राथमिकता

हरियाली तीज आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व है, लेकिन गर्भावस्था में महिला और बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। व्रत का उद्देश्य शरीर को परेशानी में डालना नहीं होना चाहिए। यदि डॉक्टर सख्त उपवास की अनुमति नहीं देते हैं, तो महिला अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक परंपराओं में शामिल हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करने की जरूरत नहीं है।

कई मामलों में डॉक्टर महिला की स्थिति को देखते हुए व्रत का ऐसा तरीका सुझा सकते हैं जिसमें लंबे समय तक भूखे रहने से बचा जा सके। उदाहरण के लिए, पर्याप्त तरल पदार्थ लेने और डॉक्टर द्वारा अनुमोदित पौष्टिक भोजन को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, हर गर्भवती महिला के लिए एक ही नियम लागू नहीं किया जा सकता।

व्रत से पहले डॉक्टर से लें स्पष्ट सलाह

अगर आप गर्भवती हैं और हरियाली तीज का व्रत रखने की योजना बना रही हैं, तो सबसे पहले अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से बात करें। डॉक्टर को अपनी प्रेग्नेंसी की स्थिति, दवाओं, किसी बीमारी, ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या और पहले से हो रही परेशानियों के बारे में बताएं। इसके बाद डॉक्टर आपकी स्थिति के मुताबिक तय कर सकते हैं कि उपवास रखना सुरक्षित है या नहीं।

याद रखें कि गर्भावस्था में किसी दूसरी महिला का व्रत देखकर उसी तरह उपवास करना सही तरीका नहीं है। एक महिला के लिए जो सुरक्षित हो सकता है, जरूरी नहीं कि दूसरी गर्भवती महिला के लिए भी उतना ही सुरक्षित हो।

त्योहार मनाना और धार्मिक आस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन गर्भावस्था में शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर व्रत के दौरान ऊपर बताए गए गंभीर संकेतों में से कोई भी नजर आए, तो व्रत पूरा करने की जिद न करें। तुरंत भोजन या तरल पदार्थ लेने की जरूरत हो सकती है और लक्षण गंभीर हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आखिरकार, मां और बच्चे की अच्छी सेहत ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए हरियाली तीज पर व्रत रखने का फैसला धार्मिक मान्यता के साथ-साथ मेडिकल सलाह और अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही करें।

(Photo : AI Generated)