राज्यसभा सांसदों को नई जिम्मेदारियां, AIIMS से लेकर कई अहम संस्थानों में मिली जगह

राज्यसभा सांसदों को नई जिम्मेदारियां, AIIMS से लेकर कई अहम संस्थानों में मिली जगह

राज्यसभा के कई सांसदों को अब स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। उच्च सदन के कुल दस सदस्यों को देश के अलग-अलग वैधानिक निकायों और संस्थानों के बोर्ड में सदस्य के तौर पर चुना गया है। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS भी शामिल हैं। सांसदों को मिली ये जिम्मेदारियां संबंधित संस्थानों के कामकाज, नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को बढ़ाएंगी।

राज्यसभा सचिवालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन पदों के लिए चुनाव कराया गया, उनके लिए जितने उम्मीदवार मैदान में थे, उतनी ही संख्या में पद भी खाली थे। ऐसे में उम्मीदवारों की संख्या और रिक्तियों के बीच कोई अंतर नहीं रहा। इसी वजह से संबंधित पदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी की गई और सांसदों को विभिन्न संस्थानों में सदस्य के रूप में चुना गया।

AIIMS के बोर्ड में कई सांसदों की एंट्री

नई जिम्मेदारियों में सबसे प्रमुख नाम देश के अलग-अलग शहरों में स्थापित AIIMS से जुड़े हैं। राज्यसभा सांसद गुलाम अली को AIIMS अवंतीपोरा का सदस्य चुना गया है। इसी तरह अशोक कुमार मित्तल को AIIMS बठिंडा की जिम्मेदारी दी गई है। मध्य प्रदेश के AIIMS भोपाल के लिए रजनीश कुमार अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है।

पूर्वोत्तर भारत में भी AIIMS से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर राज्यसभा सांसद को जगह मिली है। असम गण परिषद के सांसद बीरेंद्र प्रसाद बैश्य को AIIMS गुवाहाटी का सदस्य चुना गया है। जम्मू-कश्मीर में AIIMS विजयपुर के लिए भाजपा सांसद सतपाल शर्मा का चयन किया गया है। दक्षिण भारत में AIIMS मदुरै की जिम्मेदारी आई एस इनबादुरई को दी गई है।

राजस्थान के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल AIIMS जोधपुर के बोर्ड में राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ को सदस्य के रूप में चुना गया है। इस तरह अलग-अलग राज्यों में स्थित AIIMS के संचालन और संस्थागत गतिविधियों से जुड़े बोर्ड में अब इन सांसदों की भूमिका रहेगी।

AIIMS जैसे केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के बोर्ड में सांसदों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है। इन संस्थानों में चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, शोध, प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर लगातार काम होता है। बोर्ड में सांसदों की भागीदारी से संबंधित क्षेत्रों की जरूरतों और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों को संस्थागत स्तर पर उठाने का अवसर भी मिलता है।

सेंट्रल सिल्क बोर्ड में लहर सिंह सिरोया को जिम्मेदारी

राज्यसभा सांसदों को केवल स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संस्थानों में ही जगह नहीं मिली है। कर्नाटक से भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया को सेंट्रल सिल्क बोर्ड का सदस्य चुना गया है। रेशम उत्पादन और इससे जुड़े उद्योग के विकास में सेंट्रल सिल्क बोर्ड की अहम भूमिका है।

भारत में रेशम उद्योग किसानों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में बोर्ड में सांसद की भागीदारी से रेशम उत्पादन, किसानों से जुड़े मुद्दों, तकनीकी विकास और उद्योग को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर नीतिगत चर्चा में योगदान की संभावना रहेगी।

खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान में सिकंदर कुमार की नियुक्ति

हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद सिकंदर कुमार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट की काउंसिल का सदस्य चुना गया है। यह संस्थान खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में काम करता है।

सांसद को मिली यह जिम्मेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े रोजगार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। संस्थान की काउंसिल में उनकी भूमिका से शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध और उद्यमिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

सरोगेसी और रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बोर्ड में रेखा शर्मा

हरियाणा से भाजपा सांसद रेखा शर्मा को नेशनल असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एंड सरोगेसी बोर्ड का सदस्य चुना गया है। यह क्षेत्र आधुनिक प्रजनन तकनीकों और सरोगेसी से जुड़े नियमों तथा नियामकीय व्यवस्था से संबंधित है।

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी यानी ART और सरोगेसी के क्षेत्र में कानून, नियमन, मरीजों के अधिकार, संस्थानों की जवाबदेही और तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़े कई पहलू शामिल होते हैं। ऐसे राष्ट्रीय स्तर के बोर्ड में सांसद की नियुक्ति से संबंधित नीतिगत और नियामकीय विषयों पर संसदीय दृष्टिकोण भी सामने आएगा।

संसदीय समितियों के लिए भी हुआ चुनाव

राज्यसभा सचिवालय ने बताया कि केवल वैधानिक संस्थानों के लिए ही नहीं, बल्कि संसद की महत्वपूर्ण समितियों के लिए भी चुनाव कराया गया। पब्लिक अकाउंट्स कमेटी यानी लोक लेखा समिति और पब्लिक अंडरटेकिंग्स कमेटी यानी लोक उपक्रम समिति के लिए सदस्यों का चयन किया गया।

पब्लिक अकाउंट्स कमेटी में भाजपा सांसद सुखेंदु शेखर राय और डीएमके सांसद तिरुचि शिवा को सदस्य चुना गया है। वहीं, मोहम्मद नदीमुल हक को पब्लिक अंडरटेकिंग्स कमेटी का सदस्य बनाया गया है।

लोक लेखा समिति संसद की महत्वपूर्ण वित्तीय समितियों में शामिल है। यह सरकारी खर्च और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच करती है। दूसरी ओर, लोक उपक्रम समिति सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कामकाज से जुड़े विषयों की समीक्षा करती है। इन समितियों में सांसदों की भूमिका सरकार के कामकाज और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की संसदीय निगरानी के लिहाज से अहम होती है।

OBC कमेटी में भी कई सांसदों का चयन

राज्यसभा में OBC कमेटी के लिए भी सदस्यों का चयन किया गया है। इस समिति के लिए मस्तान राव यादव बीधा, सुभाशीष खुंटिया, अमर पाल मौर्य, मयंककुमार नायक, ए ए रहीम, के आर एन राजेशकुमार, कल्पना सैनी, पाका वेंकट सत्यनारायण, अशोक सिंह और भीम सिंह को चुना गया है।

OBC से जुड़े विषय सामाजिक और नीतिगत स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पिछड़े वर्गों से संबंधित योजनाओं, आरक्षण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और कल्याणकारी नीतियों जैसे मुद्दों पर समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन सदस्यों को मिली जिम्मेदारी संसद के भीतर OBC से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा में अहम होगी।

उम्मीदवारों की संख्या और सीटों में नहीं था अंतर

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, जिन वैधानिक निकायों के लिए चुनाव की प्रक्रिया हुई, वहां नामांकित उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध रिक्त पदों के बराबर थी। यानी जितने पद खाली थे, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे। इसलिए इन पदों पर चुनाव की प्रक्रिया उसी अनुरूप पूरी हुई।

नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद राज्यसभा के इन सांसदों की भूमिका अब सदन में विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। अलग-अलग संस्थानों और संसदीय समितियों के सदस्य के तौर पर उन्हें संबंधित क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

कुल मिलाकर, राज्यसभा के सदस्यों को दी गई ये नई जिम्मेदारियां स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य तकनीक, रेशम उद्योग, प्रजनन तकनीक, सरोगेसी और सामाजिक न्याय जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। AIIMS के कई बोर्ड से लेकर संसदीय समितियों तक सांसदों की नियुक्ति के जरिए उन्हें संस्थागत स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। आने वाले समय में इन निकायों और समितियों की बैठकों में संबंधित क्षेत्रों की नीतियों, योजनाओं और चुनौतियों पर चर्चा के दौरान इन सांसदों की भागीदारी देखने को मिलेगी।