नाभा के पटियाला गेट पर आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से मनरेगा से जुड़े बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मनरेगा के मौजूदा स्वरूप तथा मजदूरों के रोजगार से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई। विरोध दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी फूंका गया।
प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के विधायक गुरदेव सिंह देव मान, पार्टी नेता अमरीक सिंह बांगड़ और आम आदमी पार्टी एससी विंग के प्रदेश अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी सहित अन्य स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा से संबंधित नीतियों में किए जा रहे बदलावों का सीधा असर ग्रामीण मजदूरों, गरीब परिवारों और कामकाजी महिलाओं पर पड़ सकता है।
मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल रही है। ग्रामीण परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में इसकी भूमिका को देखते हुए प्रदर्शनकारी मजदूरों ने मांग की कि योजना के मूल उद्देश्य और रोजगार से जुड़ी व्यवस्था को कमजोर न किया जाए।
मनरेगा की नीति और स्वरूप में बदलाव पर देव मान ने उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी योजना का नाम बदलना अलग विषय हो सकता है, लेकिन ऐसी नीति में बदलाव स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसका प्रभाव सीधे गरीब और मजदूर परिवारों की आजीविका पर पड़े।
देव मान ने आरोप लगाया कि मनरेगा की मूल भावना को प्रभावित करने वाले बदलाव मजदूर वर्ग के हित में नहीं हैं। उनके अनुसार, इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को रोजगार का अवसर देना और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आय का एक साधन उपलब्ध कराना रहा है। ऐसे में यदि रोजगार की उपलब्धता, फंडिंग या योजना के संचालन की व्यवस्था प्रभावित होती है तो इसका सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए मजदूरी पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए रोजगार केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार भी है। इसलिए रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर कोई भी फैसला लेते समय मजदूरों की वास्तविक परिस्थितियों और राज्यों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मजदूर वर्ग के योगदान का किया जिक्र
विधायक देव मान ने अपने संबोधन में देश के विकास में मजदूर वर्ग के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सड़कों, इमारतों, खेतों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि देश के विकास की बात मजदूरों के योगदान के बिना पूरी नहीं हो सकती। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मजदूरी पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के लिए रोजगार की निरंतर उपलब्धता उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
देव मान ने आरोप लगाया कि लंबे समय से राजनीतिक दल गरीब और मजदूर वर्ग के समर्थन से सत्ता तक पहुंचते रहे हैं, लेकिन रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी जरूरतों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि मनरेगा से जुड़े बदलावों को केवल प्रशासनिक फैसला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनका प्रभाव लाखों परिवारों की आजीविका पर पड़ सकता है।
राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ का किया विरोध
प्रदर्शन के दौरान मनरेगा की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायक देव मान ने कहा कि योजना के वित्तीय ढांचे में ऐसा बदलाव, जिससे राज्यों पर अधिक आर्थिक जिम्मेदारी आए, उनके लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
उन्होंने राज्यों पर 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ डालने के प्रस्तावित बदलाव का विरोध करते हुए इसे गैर-वाजिब बताया। उनका कहना था कि अलग-अलग राज्यों की आर्थिक स्थिति और वित्तीय प्राथमिकताएं अलग होती हैं। यदि रोजगार से जुड़ी बड़ी कल्याणकारी योजना में राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी अचानक बढ़ती है तो इससे योजना के क्रियान्वयन और अन्य विकास कार्यों पर भी दबाव पड़ सकता है।
देव मान ने इसे संघीय ढांचे से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा जैसे रोजगार कार्यक्रमों पर निर्णय लेते समय राज्य सरकारों की चिंताओं और आर्थिक क्षमता को भी ध्यान में रखा जाए।
उनका कहना था कि यदि किसी कल्याणकारी योजना को लागू करने का वित्तीय बोझ राज्यों के लिए कठिन हो जाता है, तो इसका प्रभाव आखिरकार लाभार्थियों तक पहुंचने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है।
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र का किया जिक्र
विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने मनरेगा के मुद्दे पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान का आभार जताते हुए कहा कि राज्य स्तर पर इस विषय को गंभीरता से उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा में मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई और केंद्र सरकार से योजना को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप जारी रखने की मांग की गई। देव मान के अनुसार, राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण मजदूरों के रोजगार और आर्थिक हितों से जुड़े विषयों पर स्पष्ट रुख रखा जाए।
उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंच पर इस मुद्दे को उठाना जरूरी है, क्योंकि मनरेगा का संबंध बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय और रोजगार से है। ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद होना चाहिए ताकि किसी भी बदलाव से पहले उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके।
अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेतृत्व के समर्थन का किया दावा
देव मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी मनरेगा मजदूरों के मुद्दे को केवल पंजाब तक सीमित विषय के रूप में नहीं देख रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व मजदूरों की मांगों के समर्थन में खड़ा है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और अमन अरोड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व मनरेगा मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहा है।
देव मान ने कहा कि पार्टी की मांग है कि रोजगार से जुड़े ऐसे प्रावधानों को कमजोर न किया जाए जिन पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निर्भर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मजदूर संगठनों, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं को सुनने की अपील भी की।
अमरीक सिंह बांगड़ ने मजदूरों के साथ जताई एकजुटता
प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेता अमरीक सिंह बांगड़ भी शामिल हुए। उन्होंने मनरेगा मजदूरों के साथ एकजुटता जताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।
बांगड़ ने कहा कि रोजगार से जुड़े फैसलों में उन लोगों की परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो दैनिक मजदूरी और ग्रामीण रोजगार योजनाओं पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति में बदलाव से पहले यह देखा जाना जरूरी है कि उसका प्रभाव जमीन पर काम करने वाले मजदूरों और उनके परिवारों पर किस प्रकार पड़ेगा।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि रोजगार से संबंधित अधिकारों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे को आगे भी सार्वजनिक मंचों पर उठाया जाएगा।
गुरप्रीत सिंह जीपी बोले- पूरे पंजाब में जारी रहेगा आंदोलन
आम आदमी पार्टी एससी विंग के प्रदेश अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी मनरेगा के मुद्दे को लेकर पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में विरोध कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले जालंधर में प्रदर्शन किया गया और अब नाभा में मजदूरों के साथ मिलकर आवाज उठाई गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पंजाब के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गुरप्रीत सिंह जीपी के अनुसार, मनरेगा से जुड़े मुद्दे का प्रभाव केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार रोजगार के लिए इस योजना पर निर्भर रहते हैं। इनमें महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से कई परिवारों को दूसरे शहरों या राज्यों में काम की तलाश में जाने की जरूरत कम पड़ती है।
उन्होंने मांग की कि ग्रामीण रोजगार से जुड़े किसी भी बदलाव में मजदूरों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिससे जरूरतमंद परिवारों को समय पर रोजगार तथा मजदूरी मिल सके।
किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर केंद्र को घेरा
गुरप्रीत सिंह जीपी ने अपने संबोधन में किसानों और मजदूरों से जुड़े पुराने मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी कई नीतियों को लेकर किसान, मजदूर और पिछड़े वर्ग समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं।
उन्होंने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब ने उस समय भी बड़े स्तर पर अपनी आवाज उठाई थी। उन्होंने दावा किया कि अब मनरेगा से जुड़े बदलावों को लेकर भी ग्रामीण मजदूरों में चिंता है।
जीपी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नीति का विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे प्रभावित वर्गों की बात सुनें। उन्होंने कहा कि रोजगार और आजीविका से संबंधित मामलों में व्यापक चर्चा की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनके फैसलों का प्रभाव सीधे परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
कामकाजी महिलाओं पर असर का मुद्दा भी उठाया
प्रदर्शन के दौरान मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा भी सामने आया। गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं मनरेगा के माध्यम से रोजगार प्राप्त करती हैं और इससे होने वाली आय परिवार के दैनिक खर्च में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। कई महिलाओं के लिए घर से बहुत दूर जाकर काम करना संभव नहीं होता। ऐसे में गांव या आसपास के क्षेत्र में मिलने वाला रोजगार उन्हें आर्थिक रूप से सक्रिय रहने का अवसर देता है।
पार्टी नेताओं का कहना था कि योजना में कोई भी बड़ा बदलाव करते समय महिला श्रमिकों पर उसके संभावित प्रभाव का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। रोजगार की उपलब्धता कम होने या योजना के क्रियान्वयन में बाधा आने से ग्रामीण महिलाओं की आय प्रभावित हो सकती है।
मनरेगा मजदूरों ने रोजगार सुरक्षा की मांग उठाई
नाभा में हुए प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने रोजगार की उपलब्धता, मजदूरी और योजना की निरंतरता से जुड़े मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मनरेगा के तहत रोजगार की व्यवस्था को कमजोर न किया जाए और ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले काम की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित रोजगार अवसरों के कारण मनरेगा कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा है। कृषि कार्य हर समय उपलब्ध नहीं होता और कई परिवारों के पास नियमित आय का दूसरा साधन भी नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में सरकारी रोजगार योजना से मिलने वाला काम परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में सहायता करता है।
वक्ताओं ने समय पर मजदूरी के भुगतान और रोजगार की नियमित उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि योजना का लाभ तभी प्रभावी ढंग से मिल सकता है जब काम की मांग करने वाले पात्र लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
पंजाब में आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी
नाभा में आयोजित प्रदर्शन के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने संकेत दिया कि मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की गतिविधियां आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगी। गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि अलग-अलग जिलों में मजदूरों के साथ बैठकें और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पार्टी केंद्र सरकार से मजदूरों की चिंताओं पर विचार करने और विवादित बदलावों को वापस लेने की मांग करती रहेगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यह मुद्दा ग्रामीण रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा जारी रहनी चाहिए।
प्रदर्शन में मौजूद नेताओं ने कहा कि पंजाब में मजदूरों के रोजगार से जुड़े विषयों को विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उठाया जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मनरेगा के संबंध में राज्यों और श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने तथा ऐसे फैसले लेने की मांग की जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता प्रभावित न हो।
नाभा के पटियाला गेट पर आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से आम आदमी पार्टी ने मनरेगा से जुड़े बदलावों के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध दर्ज कराया। पार्टी नेताओं ने कहा कि मजदूरों की मांगों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अभियान जारी रहेगा और केंद्र सरकार से योजना के रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मूल उद्देश्यों को बनाए रखने की मांग की जाएगी।



