लगातार कमर दर्द को न समझें मामूली परेशानी, एक्सियल अर्थराइटिस रीढ़ की लचक कर सकता है खत्म

लगातार कमर दर्द को न समझें मामूली परेशानी, एक्सियल अर्थराइटिस रीढ़ की लचक कर सकता है खत्म

कमर में दर्द होना आम बात मानी जाती है। लंबे समय तक बैठकर काम करने, गलत तरीके से उठने-बैठने, ज्यादा वजन उठाने या मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से भी पीठ में दर्द हो सकता है। यही वजह है कि बहुत से लोग लगातार बने रहने वाले कमर दर्द को भी सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हर कमर दर्द का कारण मांसपेशियों की थकान या खराब पोस्चर नहीं होता। कई बार इसके पीछे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी एक गंभीर सूजन वाली बीमारी भी हो सकती है, जिसे एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस कहा जाता है।

यह बीमारी धीरे-धीरे रीढ़ और सैक्रोइलियक जोड़ों को प्रभावित करती है। शुरुआत में इसके लक्षण इतने सामान्य दिखाई दे सकते हैं कि मरीज को इसका अंदाजा ही नहीं होता कि समस्या किसी इंफ्लेमेटरी बीमारी से जुड़ी है। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर सूजन के कारण रीढ़ की हड्डी में कठोरता बढ़ सकती है और उसकी सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं।

आखिर क्या है एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस?

एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस नामक बीमारियों के समूह का हिस्सा है। यह लंबे समय तक रहने वाली सूजन संबंधी बीमारी है, जिसका मुख्य प्रभाव रीढ़ की हड्डी और सैक्रोइलियक यानी एसआई जोड़ों पर पड़ता है। एसआई जोड़ शरीर के निचले हिस्से में रीढ़ और पेल्विस को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।

इस बीमारी को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि शुरुआती चरण में एक्स-रे में हमेशा बदलाव दिखाई नहीं देते। कई मरीजों में बीमारी के शुरुआती दौर में एक्स-रे सामान्य आ सकता है, जबकि एमआरआई जांच के जरिए जोड़ों और आसपास के हिस्सों में मौजूद सूजन का पता लगाया जा सकता है।

यह समस्या सिर्फ रीढ़ तक सीमित नहीं रहती। कुछ मरीजों में इसके साथ आंखों में सूजन, त्वचा संबंधी समस्याएं या आंतों से जुड़ी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। आमतौर पर इसके लक्षण 45 साल की उम्र से पहले शुरू होते हैं।

कमर दर्द के साथ ये संकेत भी दिखें तो रहें सतर्क

एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस की पहचान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका इसके लक्षणों की प्रकृति की होती है। सामान्य कमर दर्द और इस बीमारी से होने वाले दर्द में कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं।

यदि कमर का दर्द लगातार तीन महीने या उससे ज्यादा समय से बना हुआ है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब दर्द के साथ सुबह उठने पर काफी देर तक पीठ या कमर में जकड़न महसूस होती हो।

इसके अलावा कुछ मरीजों को रात में दर्द इतना परेशान करता है कि उनकी नींद खुल जाती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने के बाद उठना भी मुश्किल लग सकता है। दर्द कमर से निकलकर कूल्हों के आसपास भी महसूस हो सकता है।

इस बीमारी का एक खास संकेत यह है कि आराम करने पर दर्द कम होने के बजाय कई बार और बढ़ जाता है। इसके उलट हल्का चलना-फिरना या शारीरिक गतिविधि करने पर मरीज को कुछ राहत मिल सकती है।

रीढ़ में आखिर क्या बदलाव होने लगते हैं?

एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस में सूजन अक्सर सैक्रोइलियक जोड़ों से शुरू होती है। ये जोड़ रीढ़ और पेल्विस के बीच स्थित होते हैं। लंबे समय तक इन हिस्सों में सूजन रहने से बीमारी धीरे-धीरे रीढ़ के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है।

शरीर लगातार सूजन और नुकसान की स्थिति में नई हड्डी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। समय के साथ यह अतिरिक्त हड्डी रीढ़ की अलग-अलग कशेरुकाओं को आपस में जोड़ सकती है। इससे रीढ़ की प्राकृतिक लचक धीरे-धीरे कम होने लगती है।

गंभीर स्थिति में रीढ़ कठोर हो सकती है। मरीज के लिए शरीर को मोड़ना, झुकना या अपनी सामान्य मुद्रा बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। बीमारी के बढ़ने पर रोजमर्रा के कई काम प्रभावित होने लगते हैं और चलने-फिरने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।

इसी प्रक्रिया को एंकाइलोसिस कहा जाता है। हालांकि हर मरीज में बीमारी एक जैसी गति से नहीं बढ़ती और समय पर इलाज मिलने पर इसके प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

सामान्य कमर दर्द से कैसे अलग है यह बीमारी?

कमर दर्द होने पर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दर्द किस प्रकार का है। मांसपेशियों में खिंचाव या गलत मुद्रा के कारण होने वाला सामान्य कमर दर्द अक्सर किसी विशेष गतिविधि के बाद शुरू होता है। आराम, सही पोस्चर और कुछ समय में इसमें सुधार आ सकता है।

इसके विपरीत इंफ्लेमेटरी बैक पेन का पैटर्न अलग होता है। एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस में दर्द लंबे समय तक रह सकता है और सुबह की जकड़न प्रमुख समस्या बन सकती है। व्यक्ति को लगता है कि आराम करने के बावजूद कमर खुल नहीं रही है।

एक और महत्वपूर्ण अंतर यह है कि शारीरिक गतिविधि से इस प्रकार के दर्द में अक्सर राहत मिलती है। मरीज को चलने या हल्की एक्सरसाइज के बाद पहले की तुलना में कम परेशानी महसूस हो सकती है। जबकि सामान्य मांसपेशियों के दर्द में अधिक गतिविधि कई बार दर्द बढ़ा सकती है।

इसलिए केवल दर्द की तीव्रता को देखकर बीमारी का अंदाजा लगाना सही नहीं है। दर्द कितने समय से है, कब बढ़ता है और किस गतिविधि से कम या ज्यादा होता है, ये बातें भी निदान में महत्वपूर्ण होती हैं।

आंखों में दर्द और लालिमा भी हो सकती है चेतावनी

इस बीमारी का प्रभाव शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। कुछ मरीजों में आंख के अंदर सूजन यानी यूवाइटिस की समस्या विकसित हो सकती है। आंख लाल होना, दर्द होना या रोशनी से परेशानी जैसी शिकायत को सामान्य आंखों की थकान मानकर टालना ठीक नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमर दर्द और सुबह की जकड़न के साथ बार-बार आंखों में सूजन जैसी समस्या होती है, तो डॉक्टर को इसके बारे में पूरी जानकारी देना जरूरी है। इससे बीमारी की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

कुछ मामलों में त्वचा और आंतों से संबंधित समस्याएं भी स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को समझना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

हर कमर दर्द का मतलब एक्सियल अर्थराइटिस नहीं होता। लेकिन यदि दर्द लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय से मौजूद है और विशेष रूप से कम उम्र में शुरू हुआ है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

सुबह लंबे समय तक जकड़न रहना, रात में दर्द से नींद खुलना, आराम के बजाय चलने से राहत मिलना, कूल्हों में दर्द या बार-बार आंखों में सूजन जैसे संकेत मौजूद हों तो रुमेटोलॉजिस्ट से जांच कराने पर विचार करना चाहिए।

डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर शारीरिक जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या एमआरआई जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मरीजों में रक्त जांच भी निदान की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।

समय पर इलाज क्यों है जरूरी?

एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज को हमेशा गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बीमारी की जल्दी पहचान और उचित उपचार से सूजन, दर्द और जकड़न को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इलाज का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं होता, बल्कि रीढ़ की गतिविधि और मरीज की रोजमर्रा की कार्यक्षमता को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, नियमित शारीरिक गतिविधि और फिजियोथेरेपी जैसी रणनीतियों की सलाह दे सकते हैं।

नियमित हल्की एक्सरसाइज और शरीर को सक्रिय रखना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, हालांकि किस तरह की गतिविधि मरीज के लिए उपयुक्त है, यह उसकी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ से तय करना बेहतर होता है।

कमर दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें

एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य कमर दर्द जैसे लग सकते हैं। इसी वजह से कई मरीज लंबे समय तक घरेलू उपाय या सामान्य दर्द की दवाओं पर निर्भर रहते हैं और विशेषज्ञ से सलाह लेने में देर कर देते हैं।

यदि कमर दर्द लगातार बना हुआ है, सुबह उठने के बाद लंबे समय तक जकड़न रहती है और आराम करने के बजाय चलने-फिरने से राहत मिलती है, तो इसे सिर्फ थकान समझना सही नहीं होगा। ऐसे संकेत शरीर में चल रही सूजन की ओर इशारा कर सकते हैं।

समय पर चिकित्सकीय जांच कराने से बीमारी की सही पहचान की जा सकती है। शुरुआती स्तर पर उचित उपचार शुरू होने से दर्द और जकड़न को नियंत्रित करने के साथ-साथ रीढ़ की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए लंबे समय से जारी कमर दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारण का पता लगाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।