सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों राजनीतिक और व्यंग्यात्मक नामों वाले नए अकाउंट तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इसी कड़ी में इंस्टाग्राम पर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से बनाया गया एक अकाउंट चर्चा का विषय बन गया है। दावा किया जा रहा है कि इस अकाउंट ने महज 24 घंटे के भीतर 1.7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए। खास बात यह है कि अकाउंट के तेजी से लोकप्रिय होने के बावजूद इसके पीछे कौन लोग हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP नाम का सोशल मीडिया अकाउंट भी अपनी अलग पहचान बना चुका है। CJP के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम सामने आने से सोशल मीडिया पर राजनीतिक कटाक्ष और नए डिजिटल प्रयोगों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
इंस्टाग्राम अकाउंट ने खींचा लोगों का ध्यान
इंस्टाग्राम पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से बना यह अकाउंट इसी महीने शुरू किया गया है। अकाउंट की गतिविधियों से पता चलता है कि इसका यूजरनेम एक बार बदला जा चुका है। इसके बावजूद बहुत कम समय में इस प्रोफाइल ने बड़ी संख्या में लोगों को अपने साथ जोड़ लिया।
अकाउंट पर अब तक 63 पोस्ट मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, यह प्रोफाइल करीब 35 अन्य अकाउंट्स को फॉलो करता है। इतनी कम अवधि में फॉलोअर्स की संख्या 1.7 लाख से ऊपर पहुंचने के कारण इस अकाउंट ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है।
हालांकि, अकाउंट की प्रोफाइल या उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि इसे कौन संचालित कर रहा है। न तो इसके पीछे किसी व्यक्ति का नाम साफ तौर पर सामने आया है और न ही किसी संगठन की आधिकारिक जिम्मेदारी की पुष्टि हुई है। ऐसे में फिलहाल इसकी पहचान और उद्देश्य को लेकर कई तरह के सवाल बने हुए हैं।
नाम सामने आने के पीछे क्या है वजह?
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम का इस्तेमाल ऐसे समय हुआ है जब देश में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से दिए अपने संबोधन में नक्सलवाद और उससे जुड़ी विचारधारा का जिक्र किया था।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि जंगलों में हथियार लेकर हिंसा करने वाले नक्सलियों के खिलाफ अभियान के बाद स्थिति बदली है, लेकिन देश को ऐसे लोगों से भी सतर्क रहने की जरूरत है जो विचारों के स्तर पर हिंसा या अलगाववादी सोच को बढ़ावा देते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया।
पीएम मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस शब्द की चर्चा अचानक बढ़ गई। अलग-अलग यूजर्स ने इसे लेकर पोस्ट, मीम और टिप्पणियां साझा करनी शुरू कर दीं। इसी माहौल के बीच ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट सामने आया और कुछ ही समय में यह वायरल होने लगा।
प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों की चुनौती काफी हद तक कमजोर हुई है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने विचारधारा के स्तर पर मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चेताया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, ऐसे तत्व देश को हिंसा और गलत दिशा की ओर ले जाने के लिए नए तरीके तलाश सकते हैं। उन्होंने देशवासियों से ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सोशल मीडिया की चर्चाओं में तेजी से आया। हालांकि, इस शब्द की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों और अलग-अलग विचारधारा वाले लोगों के बीच मतभेद भी देखने को मिल सकते हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे गंभीर राजनीतिक आरोप से जोड़कर देख रहे हैं।
किरेन रिजिजू ने भी दी थी ‘दिमागी नक्सल’ की व्याख्या
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर अपना पक्ष रखा था। उनके मुताबिक, इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए किया गया है जो माओवादी विचारधारा या माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करते।
रिजिजू ने अपनी व्याख्या में अलगाववादियों के समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर अलग रुख रखने वालों तथा देश की एकता और अखंडता के खिलाफ गतिविधियों का समर्थन करने वाले लोगों को भी इस संदर्भ में जोड़ा।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की कथित कोशिशों का भी उल्लेख किया। खास तौर पर ‘चिकन्स नेक’ के नाम से पहचाने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे लेकर अलगाववादी सोच पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर राजनीतिक नामों का नया ट्रेंड
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ अकाउंट का अचानक लोकप्रिय होना सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य और नए तरह के डिजिटल कंटेंट के बढ़ते प्रभाव को भी दिखाता है। आजकल किसी राजनीतिक बयान, विवाद या चर्चित शब्द के सामने आने के तुरंत बाद उसी नाम या उससे मिलते-जुलते नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाए जाने लगे हैं।
इन अकाउंट्स का मकसद हमेशा राजनीतिक संगठन के रूप में काम करना हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार ऐसे नाम मीम, व्यंग्य, मनोरंजन या किसी राजनीतिक विचार पर टिप्पणी करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कुछ अकाउंट थोड़े समय में वायरल हो जाते हैं और फिर उनके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ती है।
CJP यानी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उदाहरण भी इसी तरह सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा है। इसके बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम सामने आने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ऐसे नाम भविष्य में सोशल मीडिया की राजनीति और डिजिटल व्यंग्य का नया हिस्सा बनेंगे।
अकाउंट की लोकप्रियता बनी चर्चा का केंद्र
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ अकाउंट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उसके नाम से ज्यादा उसकी तेजी से बढ़ती फॉलोअर संख्या की हो रही है। केवल 24 घंटे में 1.7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हासिल करना सामान्य नए अकाउंट की तुलना में काफी तेज वृद्धि मानी जा सकती है।
हालांकि, किसी सोशल मीडिया अकाउंट के फॉलोअर्स की संख्या उसके आधिकारिक या राजनीतिक संगठन होने का प्रमाण नहीं होती। जब तक अकाउंट के संचालक अपनी पहचान और उद्देश्य सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं करते, तब तक इसके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है।
अकाउंट की ओर से प्रकाशित पोस्ट और उसकी गतिविधियां आने वाले दिनों में यह संकेत दे सकती हैं कि इसे केवल सोशल मीडिया कंटेंट के लिए बनाया गया है या इसके पीछे कोई संगठित राजनीतिक उद्देश्य भी है।
कौन चला रहा है अकाउंट, अभी साफ नहीं
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम वाले अकाउंट को संचालित कौन कर रहा है। उपलब्ध प्रोफाइल जानकारी में किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संगठन का स्पष्ट नाम सामने नहीं आता।
अकाउंट के तेजी से वायरल होने के बाद इसके संचालन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लग सकती हैं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति या संगठन को इसका जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने सोशल मीडिया पर एक नया विमर्श पैदा कर दिया है। इसी चर्चा के बीच इंस्टाग्राम पर इसी नाम से बना अकाउंट बड़ी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह प्रोफाइल किस तरह की सामग्री प्रकाशित करता है और क्या इसके संचालक अपनी पहचान और उद्देश्य को सार्वजनिक करते हैं।




