एथेनॉल पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार का जवाब, बोली- फ्यूल में चीनी नहीं इसलिए चींटियों वाला वीडियो झूठा

एथेनॉल पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार का जवाब, बोली- फ्यूल में चीनी नहीं इसलिए चींटियों वाला वीडियो झूठा

सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर चल रही कई तरह की चर्चाओं और दावों पर केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है और इसके इस्तेमाल को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। मंत्रालय ने वायरल हो रहे उन वीडियो को भी फर्जी बताया, जिनमें गाड़ियों के फ्यूल टैंक के पास चींटियां दिखाई जा रही थीं और दावा किया जा रहा था कि एथेनॉल पेट्रोल में गन्ने का रस होने की वजह से चींटियां आकर्षित हो रही हैं।

सरकार ने बताया कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला एथेनॉल सामान्य गन्ने के रस जैसा नहीं होता। ईंधन बनाने की प्रक्रिया में इसे पूरी तरह प्रोसेस किया जाता है और इसमें किसी भी तरह की शर्करा यानी चीनी मौजूद नहीं रहती। इसलिए एथेनॉल फ्यूल के कारण चींटियों के आने का दावा गलत है। मंत्रालय के मुताबिक कुछ पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है।

सरकार ने यह भी कहा कि देश में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद अब तक इंजन खराब होने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कई वाहन कंपनियां और विशेषज्ञ पहले से ही इस तरह के ईंधन को लेकर परीक्षण कर चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की लगातार निगरानी की जाती है।

E20 पेट्रोल से इंश्योरेंस खत्म होने की बात भी गलत

एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर एक और बड़ी अफवाह यह थी कि E20 फ्यूल इस्तेमाल करने से वाहन का बीमा अमान्य हो जाएगा। सरकार ने इस दावे को भी खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि E20 पेट्रोल डालने से वाहन बीमा पॉलिसी की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद स्थिति स्पष्ट की गई है।

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। भारत में धीरे-धीरे इस तरह के ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है ताकि पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम की जा सके। सरकार का कहना है कि दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का उपयोग कर रहे हैं।

अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्राजील में तो E27 यानी 27 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल भी काफी समय से उपयोग में है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और जैव ईंधन को बढ़ावा दे रहा है।

एथेनॉल कार्यक्रम से देश को हुए कई फायदे

केंद्र सरकार के मुताबिक एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तरों पर फायदा मिला है। सरकार ने बताया कि एथेनॉल के इस्तेमाल से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है और अब तक करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी फायदा पहुंचा है। गन्ना, मक्का और दूसरी कृषि फसलों की मांग बढ़ी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। एथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

इसके अलावा सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है। इसमें पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है। साथ ही देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है क्योंकि तेल आयात पर निर्भरता घटती है।

क्या है एथेनॉल और कैसे बनता है फ्यूल

एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे जैविक पदार्थों में मौजूद शुगर और स्टार्च को फर्मेंटेशन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन की खपत कम करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तैयार करना है।

एथेनॉल बनाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल गन्ने के रस का किया जाता है, लेकिन इसके अलावा मक्का, कसावा, सड़े हुए आलू, मीठे ज्वार और अन्य स्टार्च वाली फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। एथेनॉल की अलग-अलग पीढ़ियां भी होती हैं। पहली पीढ़ी यानी फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मक्का, मीठे चुकंदर, सड़े आलू और मीठे ज्वार जैसी फसलों से बनाया जाता है।

दूसरी पीढ़ी यानी सेकेंड जनरेशन एथेनॉल कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है। इसमें चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, भुट्टे के हिस्से, बांस और लकड़ी जैसे बायोमास का इस्तेमाल किया जाता है।

तीसरी पीढ़ी का बायोफ्यूल अभी विकास के चरण में है। इसे एल्गी यानी शैवाल से तैयार करने पर काम किया जा रहा है।

E85 फ्यूल की भी हुई शुरुआत, कीमत पेट्रोल से कम

सरकार ने हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन पेश किया है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब 82.12 रुपये प्रति लीटर रखी गई है, जो सामान्य E20 पेट्रोल से लगभग 20 रुपये कम है।

E85 फ्यूल में 85 प्रतिशत तक एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। सरकार का मानना है कि ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से भविष्य में पेट्रोलियम आयात कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

हालांकि E85 या ज्यादा एथेनॉल वाला ईंधन हर वाहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए गाड़ी में खास फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाला इंजन होना जरूरी है। सामान्य पेट्रोल वाहनों में इसे डालना सही नहीं माना जाता।

किन गाड़ियों में चल सकता है ज्यादा एथेनॉल वाला फ्यूल

भारत में कुछ कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियों पर काम कर रही हैं। मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल ऐसी कारों में शामिल है, जिसे E100 यानी 100 प्रतिशत तक एथेनॉल ब्लेंड वाले ईंधन के लिए तैयार किया गया है।

दो पहिया वाहनों में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर+ और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं। ये बाइक E20 से लेकर E85 तक के मिश्रण पर चलने में सक्षम बताई गई हैं। इनकी बिक्री कुछ क्षेत्रों में शुरू होने की योजना है। इसके अलावा सुजुकी जिक्सर SF भी उन वाहनों में शामिल है जो ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को सपोर्ट करने के लिए तैयार की गई हैं।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि इसके साथ लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है, ताकि सोशल मीडिया पर फैल रही गलत खबरों के कारण किसी तरह की गलतफहमी न बने।