भारतीय महिला हॉकी ने रचा इतिहास, साउथ अफ्रीका को 6-1 से रौंदा; वर्ल्ड कप में दर्ज की सबसे बड़ी जीत

भारतीय महिला हॉकी ने रचा इतिहास, साउथ अफ्रीका को 6-1 से रौंदा; वर्ल्ड कप में दर्ज की सबसे बड़ी जीत

भारतीय महिला हॉकी टीम ने वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को एकतरफा मुकाबले में 6-1 से मात दी। एम्सटेलवीन में खेले गए पूल-D के इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी का प्रदर्शन किया और लगातार गोल के मौके बनाए। मैच के दौरान भारत ने साउथ अफ्रीका के डिफेंस पर ऐसा दबाव बनाया कि विरोधी टीम को लंबे समय तक संभलने का मौका ही नहीं मिला।

इस बड़ी जीत के साथ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में एक नया रिकॉर्ड भी कायम किया। 6-1 की जीत विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप के इतिहास में भारत की अब तक की सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले भारतीय टीम का इस टूर्नामेंट में सबसे बेहतर जीत का रिकॉर्ड 1974 में बना था, जब उसने स्पेन को 4-1 से हराया था। करीब 52 साल बाद भारत ने अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक बड़ी जीत दर्ज की।

साउथ अफ्रीका के खिलाफ इस शानदार प्रदर्शन ने पूल-D की अंक तालिका में भारत की स्थिति भी मजबूत कर दी है। टीम फिलहाल ग्रुप में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है। अब भारत की नजर अगले मुकाबले पर है, जहां उसका सामना इंग्लैंड से होना है। टॉप-8 में जगह बनाने के लिहाज से यह मैच बेहद अहम होगा।

पहले ही मिनटों से भारत का दबदबा

साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम ने मुकाबले की शुरुआत काफी आक्रामक अंदाज में की। खिलाड़ियों ने गेंद पर कब्जा बनाए रखने के साथ-साथ तेजी से सर्कल में प्रवेश करने की रणनीति अपनाई। भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने लगातार साउथ अफ्रीकी डिफेंस को परेशान किया और शुरुआती दौर में ही गोल करने के मौके तैयार कर लिए।

भारत की मेहनत का परिणाम जल्द ही सामने आया। सुनेलिता टोप्पो ने टीम के लिए पहला गोल दागकर भारत को बढ़त दिलाई। इस गोल के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। टीम ने अपनी गति कम करने के बजाय हमले और तेज कर दिए।

मिडफील्ड में भारतीय खिलाड़ियों की पासिंग सटीक रही और फॉरवर्ड खिलाड़ियों ने लगातार विपक्षी सर्कल में दबाव बनाया। साउथ अफ्रीका की टीम कई बार गेंद को अपने डिफेंस एरिया से बाहर निकालने की कोशिश करती नजर आई, लेकिन भारत के लगातार हमलों ने उसे परेशानी में रखा।

नवनीत कौर ने पेनल्टी कॉर्नर को बनाया गोल

भारत की आक्रामक रणनीति का एक और फायदा दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में मिला। भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और नवनीत कौर ने इसे शानदार तरीके से गोल में बदल दिया।

नवनीत ने शॉट लेते समय एंगल में बदलाव किया और गेंद को लो तथा तेज गति से गोल की ओर भेजा। साउथ अफ्रीकी गोलकीपर के लिए इस शॉट को रोकना मुश्किल साबित हुआ। गेंद गोल में पहुंचते ही भारत की बढ़त 2-0 हो गई।

इस गोल के बाद साउथ अफ्रीका पर दबाव और बढ़ गया। भारतीय टीम लगातार सर्कल में पहुंच रही थी और उसके खिलाड़ी विपक्षी डिफेंस को अपनी जगह बदलने के लिए मजबूर कर रहे थे। तेज पासिंग और लगातार अटैक के कारण भारत को एक के बाद एक पेनल्टी कॉर्नर भी मिलने लगे।

24वें मिनट के आसपास भारत को लगातार पेनल्टी कॉर्नर हासिल हुए। साउथ अफ्रीकी टीम ने इन हमलों को रोकने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने रिबाउंड और दूसरी गेंदों पर भी अपना दबदबा बनाए रखा।

सुशीला चानू ने बढ़त को 3-0 किया

भारत ने मुकाबले में तीसरा गोल भी पेनल्टी कॉर्नर के जरिए बनाया। 25वें मिनट में दीपिका ने ड्रैगफ्लिक लगाया। साउथ अफ्रीका की पहली रशर से गेंद पर डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद सुशीला चानू की दिशा में पहुंच गई।

सुशीला ने मौके को गंवाया नहीं और गेंद को गोल में पहुंचाकर भारत की बढ़त 3-0 कर दी। इस गोल के बाद भारतीय टीम पूरी तरह नियंत्रण में नजर आई।

भारत के तीन गोल से पिछड़ने के बाद साउथ अफ्रीका के लिए मुकाबले में वापसी करना और मुश्किल हो गया। इसके बावजूद भारतीय टीम ने आक्रमण जारी रखा। 27वें मिनट में भी भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। दीपिका के ड्रैगफ्लिक को गोलकीपर ने रोक लिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने रिबाउंड पर कब्जा बनाए रखा और विपक्षी टीम को राहत नहीं दी।

दूसरे हाफ में भी जारी रहा गोलों का सिलसिला

भारत ने मैच के बाकी हिस्से में भी अपनी आक्रामक शैली कायम रखी। टीम सिर्फ बढ़त बचाने के लिए पीछे नहीं हटी, बल्कि लगातार चौथे और फिर पांचवें गोल की तलाश में आगे बढ़ती रही।

दीपिका ने भारत के लिए एक और गोल करते हुए टीम की बढ़त को और मजबूत किया। इसके बाद लालरेमसियामी ने भी गोल दागा। भारतीय टीम की गोल करने की भूख यहीं खत्म नहीं हुई और साक्षी राणा ने भी स्कोरशीट पर अपना नाम दर्ज करा दिया।

लगातार गोलों के बाद स्कोर 6-0 हो गया। इस समय तक मुकाबले का रुख लगभग पूरी तरह भारत के पक्ष में जा चुका था। साउथ अफ्रीका की टीम के पास भारतीय आक्रमण का जवाब देने के लिए बहुत कम विकल्प बचे थे।

हालांकि मैच खत्म होने से पहले साउथ अफ्रीका ने अपना खाता जरूर खोला। 55वें मिनट में डी वाल कायला ने अपनी टीम के लिए एकमात्र गोल किया। इससे स्कोर 6-1 हुआ, लेकिन यह गोल मैच का परिणाम बदलने के लिए काफी नहीं था।

आखिरी सीटी बजने तक भारत ने अपनी पांच गोल की बढ़त बरकरार रखी और 6-1 के अंतर से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

52 साल पुराना रिकॉर्ड हुआ ध्वस्त

इस जीत की सबसे बड़ी खासियत भारत का नया रिकॉर्ड बनाना रहा। विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप में भारत ने इससे पहले अपनी सबसे बड़ी जीत 1974 में दर्ज की थी। उस समय भारतीय टीम ने स्पेन को 4-1 से हराया था।

अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की जीत ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस तरह भारतीय महिला टीम ने करीब पांच दशक पुराने अपने रिकॉर्ड में सुधार किया। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में बड़े अंतर से जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

चीन के खिलाफ हुई थी रोमांचक शुरुआत

भारत ने इस वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के खिलाफ मुकाबले से की थी। दोनों टीमों के बीच खेला गया यह मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ था।

उस मुकाबले में भारत ने दो बार बढ़त हासिल की थी, लेकिन चीन ने दोनों मौकों पर वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। भारत के लिए नवनीत कौर और दीपिका ने गोल किए थे।

चीन के खिलाफ भारत ने आठवें मिनट में नवनीत कौर के गोल से शुरुआत में बढ़त बनाई थी। इसके बाद 25वें मिनट में दीपिका ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को एक बार फिर आगे कर दिया। हालांकि चीन ने जवाबी हमला करते हुए मैच को बराबरी पर ला दिया।

उस मुकाबले के बाद साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत का प्रदर्शन कहीं ज्यादा प्रभावशाली रहा। छह गोल करना और सिर्फ एक गोल स्वीकार करना बताता है कि टीम ने आक्रमण के साथ-साथ डिफेंस में भी बेहतर संतुलन दिखाया।

अब इंग्लैंड के खिलाफ अहम मुकाबला

साउथ अफ्रीका पर बड़ी जीत के बाद भारत की नजर अब इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर है। पूल-D में टॉप-8 में जगह बनाने के लिए यह मैच बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए ड्रॉ भी काफी अहम परिणाम साबित हो सकता है। अगर टीम इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला बराबरी पर खत्म करने में सफल रहती है, तो उसके क्वार्टरफाइनल की दौड़ में बने रहने की स्थिति मजबूत होगी।

वहीं हार की स्थिति में भारत को ग्रुप की दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। ऐसे में चीन और साउथ अफ्रीका के बीच होने वाला मुकाबला भी भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगा। भारत चाहेगा कि साउथ अफ्रीका उस मुकाबले में चीन को हराए, ताकि उसके लिए टॉप-8 में पहुंचने की राह आसान हो सके।

फिलहाल साउथ अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की जीत ने भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। खिलाड़ियों ने जिस तरह शुरुआत से अंत तक दबाव बनाए रखा, उससे टीम की आक्रामक क्षमता साफ नजर आई। नवनीत कौर, सुशीला चानू, दीपिका, लालरेमसियामी, साक्षी राणा और सुनेलिता टोप्पो के गोलों ने इस मुकाबले को भारत के लिए यादगार बना दिया।

अब भारतीय महिला हॉकी टीम की कोशिश इस शानदार लय को इंग्लैंड के खिलाफ भी बरकरार रखने की होगी। साउथ अफ्रीका के खिलाफ रिकॉर्ड जीत ने टीम का आत्मविश्वास जरूर बढ़ाया है, लेकिन वर्ल्ड कप के अगले चरण में पहुंचने के लिए अब इंग्लैंड के खिलाफ प्रदर्शन सबसे ज्यादा मायने रखेगा।