राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। NEET-UG पेपर लीक विवाद और UGC-NET के कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों में सामने आई गड़बड़ियों के बाद एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने, उनका अनुवाद करने और समीक्षा करने वाली टीम में बड़े स्तर पर फेरबदल किया है। करीब 600 विशेषज्ञों और प्रोफेसरों को इस प्रक्रिया से हटाकर उनकी जगह नई टीम बनाई जा रही है।
इस बदलाव का उद्देश्य केवल प्रश्नपत्र को लीक होने से रोकना ही नहीं, बल्कि सवालों की गुणवत्ता, भाषा, अनुवाद और अंतिम पेपर की गोपनीयता को भी बेहतर बनाना है। NTA अब प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में चार स्तर की जांच व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। एजेंसी का मानना है कि अलग-अलग चरणों में स्वतंत्र समीक्षा होने से पेपर में गलत सवाल, अस्पष्ट प्रश्न, अनुवाद की त्रुटियां और सुरक्षा संबंधी खामियां कम की जा सकेंगी।
लगातार विवादों के बीच लिया गया फैसला
NTA के सामने पिछले कुछ समय से कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सबसे बड़ा विवाद NEET-UG के प्रश्नपत्र से जुड़ा रहा, जिसके बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी देखने को मिली। परीक्षा की पारदर्शिता और पेपर की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार को भी एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी पड़ी।
इसके बाद UGC-NET के कुछ प्रश्नपत्रों में भी गंभीर खामियां सामने आईं। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र जैसे विषयों के प्रश्नपत्रों में गड़बड़ियों के कारण संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। इससे प्रश्नपत्र तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे।
इन्हीं घटनाओं को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने NTA को परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने और स्थापित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। इसके बाद एजेंसी ने प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों की टीम में बड़े पैमाने पर बदलाव शुरू किया है।
600 विशेषज्ञों की टीम में फेरबदल
NTA की प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया में अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ, प्रोफेसर और अन्य अकादमिक लोग शामिल होते हैं। यही टीम प्रश्न तैयार करने, प्रश्नों की समीक्षा, उनके अनुवाद और अंतिम रूप देने जैसे महत्वपूर्ण कामों में भूमिका निभाती है।
अब करीब 600 ऐसे विशेषज्ञों को इस प्रक्रिया से हटाया जा रहा है। इनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। एजेंसी का उद्देश्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जिसमें विषय विशेषज्ञता के साथ-साथ प्रश्नपत्र की गोपनीयता और गुणवत्ता को लेकर भी अधिक मजबूत व्यवस्था हो।
NTA ने शिक्षा मंत्रालय को बताया है कि परीक्षा से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किया जा रहा है। अगले दो से तीन सप्ताह के दौरान करीब 20 से 25 नए अधिकारियों की तैनाती किए जाने की योजना है। माना जा रहा है कि नए अधिकारियों के आने के बाद परीक्षा संचालन से संबंधित जिम्मेदारियों को नए सिरे से बांटा जाएगा।
अब चार स्तर पर होगी प्रश्नपत्र की जांच
प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव इसकी जांच व्यवस्था को लेकर किया जा रहा है। आगे से पेपर को अंतिम रूप देने से पहले चार अलग-अलग स्तरों पर उसकी समीक्षा की जाएगी।
पहले चरण में विषय विशेषज्ञ प्रश्नों की शैक्षणिक गुणवत्ता और पाठ्यक्रम से उनकी प्रासंगिकता की जांच करेंगे। इसके बाद दूसरे स्तर पर प्रश्नों की भाषा और संरचना को देखा जाएगा। तीसरे चरण में अनुवाद की शुद्धता और दोनों भाषाओं में प्रश्नों के समान अर्थ की जांच की जाएगी। अंतिम स्तर पर पेपर की गोपनीयता और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि किसी एक स्तर पर हुई गलती अंतिम प्रश्नपत्र तक न पहुंच सके। हर चरण में जांच होने के बाद ही पेपर को आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में ज्यादा नियंत्रित और जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षित कमरों और एयर-गैप्ड सिस्टम पर जोर
शिक्षा मंत्रालय ने केवल विशेषज्ञों की टीम बदलने तक सीमित नहीं रहने के निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्रों की डिजिटल और भौतिक सुरक्षा को भी मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
मंत्रालय ने NTA को सुरक्षित कमरों का इस्तेमाल बढ़ाने और एयर-गैप्ड कंप्यूटर सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा है। एयर-गैप्ड सिस्टम का मतलब ऐसे कंप्यूटर नेटवर्क से है जो सामान्य इंटरनेट या बाहरी नेटवर्क से अलग रखा जाता है। इसका उद्देश्य संवेदनशील परीक्षा सामग्री तक अनधिकृत डिजिटल पहुंच की संभावना को कम करना है।
प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बीच कई स्तरों पर सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से तकनीकी संचालन और गोपनीय प्रक्रियाओं को भी दोबारा व्यवस्थित करने की तैयारी है।
NTA के कार्यालय की सुरक्षा भी बदलेगी
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के साथ NTA के मुख्य कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में भी परिवर्तन किया जा रहा है। एजेंसी का कार्यालय राष्ट्रीय राजधानी में ओखला से मिंटो रोड पर स्थानांतरित किया जाएगा।
नए परिसर में सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को देने की योजना है। फिलहाल कार्यालय की सुरक्षा निजी सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से की जाती थी। नई व्यवस्था का उद्देश्य संवेदनशील परीक्षा से जुड़ी सूचनाओं और दस्तावेजों तक अनधिकृत पहुंच को रोकना है।
सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी एजेंसी के कार्यालय में आने-जाने वालों की निगरानी और सुरक्षा नियंत्रण मजबूत होना चाहिए। विशेष रूप से उन स्थानों पर जहां प्रश्नपत्र निर्माण या परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री रखी जाती है, वहां सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे।
एक करोड़ से ज्यादा छात्रों पर असर
NTA देश की कई बड़ी प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करती है। इनमें NEET-UG, UGC-NET, CUET और JEE Main जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। हर साल इन परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होते हैं और कुल मिलाकर यह संख्या करीब एक करोड़ तक पहुंचती है।
इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की परीक्षा कराने वाली संस्था के लिए प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी परीक्षा में पेपर लीक या प्रश्नपत्र में गंभीर त्रुटि होने पर उसका असर लाखों उम्मीदवारों पर पड़ सकता है।
इसी वजह से मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका सीधा संबंध देश की सबसे बड़ी प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं की विश्वसनीयता से है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं अधिकारी
NEET-UG विवाद के बाद NTA ने अपने स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की थी। एजेंसी इससे पहले संविदा पर काम कर रहे करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को हटा चुकी है।
इसके अलावा जुलाई में 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में तीन अन्य अधिकारियों को भी सेवा से मुक्त कर दिया गया। इन कार्रवाइयों के बाद अब प्रश्नपत्र तैयार करने वाली विशेषज्ञ टीम में बड़े पैमाने पर बदलाव किया जा रहा है।
इससे साफ है कि सरकार और NTA परीक्षा व्यवस्था में केवल छोटे-मोटे बदलाव करने के बजाय पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की ओर से NTA की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाने के बाद ये बदलाव तेज हुए हैं। मंत्रालय की बैठक में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होने देने और पहले से तय परीक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया।
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंत्रालय को एजेंसी की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय ने एजेंसी से परीक्षा प्रक्रिया का व्यापक ऑडिट कराने को भी कहा है।
ऑडिट के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने, डिजिटल सिस्टम में काम करने, अनुवाद, प्रिंटिंग और परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने के दौरान कहां-कहां जोखिम मौजूद हैं।
सुधारों की रिपोर्ट भी देनी होगी
NTA को केवल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि इन बदलावों का रिकॉर्ड भी तैयार करना होगा। एजेंसी को परीक्षा प्रक्रियाओं का विस्तृत ऑडिट करने और किए गए सुधारों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस रिपोर्ट के जरिए यह देखा जाएगा कि नई व्यवस्था वास्तव में कितनी प्रभावी है और पुराने सिस्टम की कौन-कौन सी कमियां दूर की गई हैं। साथ ही प्रश्नपत्र की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील चरणों की भी समीक्षा की जाएगी।
आने वाले समय में नई विशेषज्ञ टीम, चार स्तरीय जांच प्रक्रिया, सुरक्षित तकनीकी सिस्टम और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था NTA की परीक्षा प्रणाली का हिस्सा बनने जा रही है। लगातार विवादों के बाद एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना है। लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ी इन परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अब NTA के लिए सबसे अहम जिम्मेदारी बन गई है।



