हिमाचल में पंचायत चौकीदारों के 566 पद खत्म, 400 मल्टीपर्पज वर्कर होंगे तैनात; विधानसभा में कई विभागों की स्थिति सामने आई

हिमाचल में पंचायत चौकीदारों के 566 पद खत्म, 400 मल्टीपर्पज वर्कर होंगे तैनात; विधानसभा में कई विभागों की स्थिति सामने आई

हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लंबे समय से सुरक्षा और रखरखाव जैसे कार्यों से जुड़े पंचायत चौकीदारों के 566 खाली पद अब समाप्त कर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने इन पदों को डाइंग कैडर घोषित करने का फैसला लिया है। इनकी जगह प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 400 बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। ये नियुक्तियां बाह्य सेवा आधार पर की जाएंगी। सरकार ने विधानसभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से यह जानकारी दी है।

विधायक इंद्र दत्त लखनपाल की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि पंचायत चौकीदारों के रिक्त पदों को खत्म करने के बाद नई व्यवस्था लागू की जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे पंचायत स्तर पर जरूरी कार्यों के लिए मानव संसाधन उपलब्ध रहेगा और सरकारी खजाने पर पहले की तुलना में कम वित्तीय दबाव पड़ेगा।

सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने से हर साल लगभग 1.70 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। यानी पुराने ढांचे में खाली पड़े पदों को बनाए रखने की बजाय पंचायतों की जरूरत के अनुसार बहुउद्देशीय कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी। इन कर्मचारियों से पंचायतों में अलग-अलग तरह के जरूरी कार्य करवाए जाने की योजना है।

पंचायत चौकीदार लंबे समय से गांवों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। इनमें पंचायत भवन और सरकारी संपत्ति की देखरेख, सुरक्षा, साफ-सफाई से जुड़े कार्य तथा स्थानीय स्तर पर अन्य छोटे-मोटे काम शामिल रहे हैं। अब सरकार ने पुराने पदों को समाप्त कर नई कार्यप्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है।

विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की व्यवस्था और सरकार की वित्तीय नीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जोड़ रही है, वहीं पंचायतों में लंबे समय से काम कर रहे चौकीदारों के पद समाप्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

इसी दौरान विधानसभा में आयुष विभाग में खाली चल रहे पदों को लेकर भी सरकार की स्थिति सामने आई। आयुष विभाग में आयुष फार्मासिस्ट के 111 पद वर्तमान में रिक्त हैं। विधायक आशीष शर्मा के सवाल के जवाब में सरकार ने यह जानकारी सदन में दी।

सरकार ने बताया कि जनवरी 2023 से लेकर अब तक 81 आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारियों के पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग में अभी 111 पद खाली हैं। सरकार के मुताबिक कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र और पदोन्नति जैसे कारणों से समय-समय पर रिक्तियां पैदा होती रहती हैं।

विभाग में खाली पदों को भरने के लिए सरकार की ओर से मौजूदा भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे पद खाली होते हैं, उन्हें निर्धारित नियमों और भर्ती प्रक्रिया के अनुसार भरने की कार्रवाई की जाती है।

आयुष विभाग में रिक्त पदों का मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं को स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ी संख्या में लोगों को सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में फार्मासिस्टों के खाली पदों का सीधा असर स्वास्थ्य संस्थानों के कामकाज पर पड़ सकता है।

विधानसभा में चंबा जिले के भरमौर विधानसभा क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार ने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों के दौरान क्षेत्र में जंगली भालुओं के हमलों से जुड़े 22 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में प्रभावित लोगों को कुल 8.91 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान की गई।

भरमौर क्षेत्र पहाड़ी और वन क्षेत्र से घिरा होने के कारण यहां मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों का जंगलों के आसपास जाना, खेती करना और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए वन क्षेत्रों के नजदीक पहुंचना इस तरह के संघर्ष की संभावनाओं को बढ़ाता है।

भालुओं के हमलों से जुड़े 22 मामलों में राहत राशि का वितरण किए जाने से यह स्पष्ट है कि सरकार को इस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी घटनाओं से निपटने के लिए लगातार कदम उठाने पड़ रहे हैं। हालांकि, विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने इस चुनौती की गंभीरता को भी रेखांकित किया है।

इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ी बड़ी जानकारी भी विधानसभा में सामने आई। राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन आने वाले आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों और डेंटल कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों के दौरान 1,164 पद स्वीकृत किए हैं।

विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के लिखित उत्तर में सरकार ने यह जानकारी दी। इन संस्थानों में नए पदों को मंजूरी देने के साथ-साथ भवन निर्माण और मौजूदा बुनियादी ढांचे पर भी सरकार की ओर से खर्च किया गया है।

सरकार के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों और डेंटल कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए कुल 7,79,32,97,469 रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है। यह राशि राज्य के चिकित्सा शिक्षा ढांचे को विकसित करने और संस्थानों में जरूरी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने के लिए खर्च की जा रही है।

इसके अतिरिक्त इन संस्थानों के भवनों के रखरखाव के लिए 33,87,06,981 रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे पता चलता है कि सरकार की ओर से केवल नए भवनों और सुविधाओं के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा चिकित्सा संस्थानों के रखरखाव पर भी खर्च किया जा रहा है।

विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों से हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग विभागों में मानव संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण प्रशासन से जुड़ी तस्वीर सामने आती है। एक तरफ सरकार पंचायत स्तर पर पुराने पदों को समाप्त कर नई व्यवस्था के माध्यम से खर्च घटाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए पदों को मंजूरी देने तथा बुनियादी ढांचे पर बड़ी रकम खर्च करने की जानकारी दी गई है।

पंचायत चौकीदारों के 566 रिक्त पदों को डाइंग कैडर घोषित करने का फैसला खास तौर पर ग्रामीण प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकार की योजना अब 400 बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं के जरिए पंचायतों की जरूरतों को पूरा करने की है। बाह्य सेवा आधार पर होने वाली इन नियुक्तियों के जरिए सरकार को कर्मचारियों की सेवाएं जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराने और खर्च को नियंत्रित करने की उम्मीद है।

वहीं आयुष विभाग में 111 रिक्त पदों का मामला सरकारी विभागों में कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़ी चुनौती को सामने लाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में 81 आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारियों को नियुक्तियां दी गई हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। सरकार के अनुसार रिक्तियां सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्ति, इस्तीफे और पदोन्नति के कारण पैदा होती हैं।

भरमौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों की एक अन्य बड़ी चुनौती को उजागर करता है। जंगलों के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के बीच बढ़ते दबाव के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। राहत राशि के वितरण के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन्यजीव प्रबंधन और लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में 1,164 पदों की स्वीकृति और हजारों करोड़ रुपये के भवन निर्माण से जुड़े प्रावधान राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाते हैं। साथ ही भवनों के रखरखाव के लिए अलग से राशि स्वीकृत किए जाने से मौजूदा संस्थानों को बेहतर स्थिति में बनाए रखने पर भी जोर दिखाई देता है।

विधानसभा में दिए गए इन लिखित जवाबों ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी नीतियों और संसाधनों के अनुसार बदलाव कर रही है। पंचायतों में कर्मचारियों के पुराने ढांचे को बदलने से लेकर आयुष और चिकित्सा शिक्षा में रिक्तियों और नए पदों तक, सरकार के सामने वित्तीय प्रबंधन और सेवाओं की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायतों में प्रस्तावित 400 बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति किस तरह होती है और क्या नई व्यवस्था ग्रामीण स्तर पर चौकीदारों से जुड़े पारंपरिक कार्यों को प्रभावी तरीके से पूरा कर पाती है। इसी तरह आयुष विभाग के खाली पदों को भरने और चिकित्सा संस्थानों में स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां करने से स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं भरमौर जैसे क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए एक लगातार बनी रहने वाली चुनौती है।