त्योहारों की मिठास में कहीं मिलावट तो नहीं? मावा खरीदने से पहले इन तरीकों से करें जांच

त्योहारों की मिठास में कहीं मिलावट तो नहीं? मावा खरीदने से पहले इन तरीकों से करें जांच

त्योहारों का सिलसिला शुरू होते ही बाजारों में मिठाइयों की बिक्री बढ़ जाती है। घरों में भी अलग-अलग तरह के पकवान और मिठाइयां बनाने की तैयारियां तेज हो जाती हैं। इस दौरान दूध से बनने वाले मावे यानी खोये की मांग भी काफी बढ़ जाती है। गुलाब जामुन, पेड़ा, बर्फी, गुझिया, कलाकंद और कई दूसरी मिठाइयों में मावे का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि त्योहारों के समय इसकी खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक हो जाती है।

मांग बढ़ने के साथ ही मावे की गुणवत्ता को लेकर चिंता भी बढ़ जाती है। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कुछ जगहों पर मिलावटी या घटिया सामग्री से तैयार मावा बाजार में पहुंचने की आशंका रहती है। देखने में ऐसा मावा बिल्कुल सामान्य लग सकता है, इसलिए केवल आंखों से देखकर इसकी शुद्धता तय करना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में खरीदारी करते समय कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

मावा खरीदते समय सबसे पहले उसकी शक्ल-सूरत पर नजर डालें। सामान्य तौर पर अच्छी गुणवत्ता वाला मावा दूध से तैयार होने के कारण हल्के सफेद, क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग का दिखाई देता है। उसका रंग बहुत ज्यादा चटख या अस्वाभाविक नहीं होना चाहिए। अगर मावा जरूरत से ज्यादा सफेद, चमकीला या किसी असामान्य रंग का नजर आए तो सावधानी बरतना बेहतर है।

हालांकि, केवल रंग के आधार पर मावे को नकली या असली घोषित नहीं किया जा सकता। मावे का रंग उसकी किस्म और बनाने की प्रक्रिया के कारण भी थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए रंग के साथ उसकी बनावट और दूसरी विशेषताओं को भी देखना जरूरी है।

मावे की बनावट भी उसकी गुणवत्ता के बारे में कुछ संकेत दे सकती है। ताजा मावा सामान्यतः मुलायम और प्राकृतिक रूप से थोड़ा दानेदार या चिकना हो सकता है। उसे हल्के हाथ से दबाने पर उसकी वास्तविक बनावट महसूस की जा सकती है। यदि मावा बहुत ज्यादा रबड़ जैसा, असामान्य रूप से कठोर या जरूरत से ज्यादा चिकना महसूस हो तो खरीदने से पहले सावधानी बरतें।

कुछ लोग मावे की जांच उसकी खुशबू से भी करने की कोशिश करते हैं। असली मावे में दूध से जुड़ी हल्की और प्राकृतिक सुगंध महसूस हो सकती है। इसके विपरीत अगर उसमें तेज कृत्रिम गंध, साबुन जैसी महक, केमिकल जैसी बू या कोई दूसरी असामान्य गंध आए तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

लेकिन यहां भी सिर्फ खुशबू को अंतिम कसौटी नहीं माना जा सकता। मावा अलग-अलग परिस्थितियों में रखा गया हो तो उसकी महक बदल सकती है। इसलिए गंध के साथ रंग, बनावट और खरीदने की जगह जैसी दूसरी बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

अगर दुकान पर मावा चखने की अनुमति और सुविधा उपलब्ध हो, तो बहुत थोड़ी मात्रा का स्वाद देखकर भी शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्य मावे में दूध से आने वाला प्राकृतिक स्वाद महसूस होता है। यदि स्वाद कड़वा, साबुन जैसा, बेहद कृत्रिम या सामान्य से काफी अलग लगे तो इसे खरीदने से परहेज करें।

मावे का स्वाद जरूरत से ज्यादा मीठा लगना भी सवाल खड़ा कर सकता है, हालांकि हर मीठा स्वाद मिलावट का प्रमाण नहीं होता। इसलिए स्वाद के आधार पर केवल संकेत लिया जा सकता है, पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती।

घर पर एक साधारण जांच के जरिए मावे में स्टार्च की संभावित मिलावट का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है। इसके लिए थोड़ी मात्रा में मावा लें और उसमें पानी मिलाकर गर्म करें। मिश्रण को कुछ देर ठंडा होने दें। इसके बाद उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जा सकती हैं। यदि मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला दिखाई देने लगे तो स्टार्च की मौजूदगी की संभावना हो सकती है।

यह बात समझना जरूरी है कि आयोडीन वाला घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती संकेत देता है। इससे मावे की पूरी गुणवत्ता या हर तरह की मिलावट की पुष्टि नहीं होती। किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जांच की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए घरेलू टेस्ट को अंतिम प्रमाण समझना ठीक नहीं होगा।

मावा खरीदते समय दुकान का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कोशिश करें कि खोया किसी विश्वसनीय डेयरी, प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान या ऐसे विक्रेता से लिया जाए जहां खाद्य सामग्री को उचित तरीके से रखा जाता हो। सड़क किनारे या संदिग्ध जगह पर खुले में रखा हुआ मावा खरीदने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतें।

कीमत भी खरीदारी के दौरान ध्यान देने वाली बात है। अगर किसी जगह सामान्य बाजार भाव की तुलना में बहुत कम कीमत पर मावा उपलब्ध कराया जा रहा है, तो उसकी गुणवत्ता के बारे में सवाल जरूर करें। केवल सस्ता होने की वजह से मावा खरीदना हमेशा समझदारी नहीं है। त्योहार के समय कम कीमत का लालच गुणवत्ता से समझौते का कारण बन सकता है।

पैक्ड मावा खरीदते समय स्थिति थोड़ी अलग होती है। पैकेट पर लिखी जानकारी को ध्यान से पढ़ना चाहिए। पैकिंग की तारीख, उपयोग की अंतिम तारीख, निर्माता की जानकारी और पैकेट की स्थिति पर नजर डालें। अगर पैकेट फूला हुआ, क्षतिग्रस्त या असामान्य दिखाई दे तो उसे लेने से बचें।

मावे को घर लाने के बाद उसके रखरखाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। दूध से बने उत्पादों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर छोड़ने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खरीदने के बाद उसे उचित तापमान पर रखना और जितनी जल्दी संभव हो इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

त्योहारों में अक्सर लोग बड़ी मात्रा में मिठाइयां खरीदते हैं। ऐसे में सिर्फ मावा ही नहीं, बल्कि तैयार मिठाइयों की गुणवत्ता पर भी नजर रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा चमकीली मिठाई, असामान्य रंग या अजीब गंध दिखाई दे तो उसे खरीदने से पहले सावधानी बरतें। खुले में रखी मिठाइयों को लेकर भी साफ-सफाई और रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए।

अगर घर में लाए गए मावे को लेकर किसी भी तरह का संदेह हो, तो उसका इस्तेमाल न करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। सिर्फ इसलिए कि मावा खरीद लिया गया है, उसे इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। संदिग्ध रंग, गंध, स्वाद या बनावट होने पर उसे अलग रख देना बेहतर है।

किसी घरेलू जांच में मिलावट का संकेत मिलने पर भी घबराने के बजाय आधिकारिक खाद्य जांच की मदद ली जा सकती है। प्रयोगशाला में होने वाली जांच से खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता और संभावित मिलावट के बारे में ज्यादा विश्वसनीय जानकारी मिल सकती है। गंभीर संदेह की स्थिति में संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से शिकायत या जांच की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

दरअसल, त्योहारों का आनंद तभी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है जब खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता को लेकर भी सावधानी बरती जाए। मावा ऐसी सामग्री है जिसका इस्तेमाल कई लोकप्रिय मिठाइयों में होता है और इसलिए इसकी शुद्धता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। खरीदते समय रंग, गंध, स्वाद और बनावट जैसे सामान्य संकेतों को देखें, भरोसेमंद विक्रेता से सामान लें और पैक्ड उत्पादों पर दी गई जानकारी को नजरअंदाज न करें।

सबसे अहम बात यह है कि किसी एक घरेलू तरीके से मावे के असली या नकली होने का शत-प्रतिशत फैसला नहीं किया जा सकता। घर पर किए जाने वाले परीक्षण केवल संभावित मिलावट का संकेत दे सकते हैं। इसलिए अगर मावे की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संदेह है, तो उसका सेवन करने के बजाय उसे छोड़ देना और जरूरत पड़ने पर खाद्य प्रयोगशाला में जांच कराना ज्यादा उचित है।

त्योहारों के मौसम में थोड़ी सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को संदिग्ध खाद्य पदार्थों से बचाने में मदद कर सकती है। मिठाई खरीदते समय केवल स्वाद और कीमत को प्राथमिकता देने के बजाय उसकी गुणवत्ता, ताजगी और स्रोत पर भी ध्यान दें। इस तरह त्योहारों की मिठास को बिना अनावश्यक जोखिम के बेहतर तरीके से बरकरार रखा जा सकता है।

(Photo : AI Generated)