शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी भर्तियों और रोजगार को लेकर विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार की भर्ती नीति और रोजगार संबंधी प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि अगले वर्ष मार्च से जून के बीच प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार नियमित रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधायक जीतराम कटवाल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की ओर से संयुक्त रूप से पूछे गए सवाल के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सरकारी विभागों में जरूरत के अनुसार रिक्त पदों को भरना है। इसके लिए संबंधित विभागों में क्रियाशील और प्रासंगिक पदों की पहचान की जा रही है, ताकि वास्तविक आवश्यकता के आधार पर नियुक्तियां की जा सकें।
सुक्खू ने कहा कि सरकार आउटसोर्स व्यवस्था को धीरे-धीरे कम करने की नीति पर आगे बढ़ रही है। हालांकि, वर्तमान में आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के रोजगार को किस तरह सुरक्षित किया जा सकता है, इस पर नीति तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकारी भर्तियों के लिए अब राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और योग्य उम्मीदवारों को अवसर उपलब्ध करवाने पर सरकार का विशेष ध्यान है।
उन्होंने पूर्व सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उस दौरान सरकारी विभागों में पर्याप्त भर्तियां नहीं की गईं। सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद रिक्त पदों की स्थिति का आकलन किया और जिन पदों की प्रशासनिक तथा विभागीय स्तर पर वास्तविक आवश्यकता है, उन्हें भरने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रदेश में पांच लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों के अलावा कौशल, स्वरोजगार और अन्य क्षेत्रों में भी युवाओं को अवसर देने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस भर्ती का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय पुलिस विभाग में एक बार भर्ती हुई थी और उसमें पेपर लीक होने का मामला सामने आया। इसके विपरीत वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पुलिस विभाग में 1,350 पदों पर भर्ती पूरी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में एक हजार और पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जिन विभागों में कर्मचारियों की वास्तविक जरूरत है, वहां रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। उन्होंने कहा कि केवल पदों की संख्या बढ़ाना सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप सही पदों पर नियुक्तियां करना जरूरी है।
पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती को लेकर उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित और आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष मार्च से जून तक यह प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था को सीमित करने के साथ-साथ मौजूदा कर्मचारियों के हितों को भी ध्यान में रख रही है। उन्होंने कहा कि अचानक किसी व्यवस्था को समाप्त करने से उससे जुड़े हजारों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। इसलिए सरकार इस विषय पर ऐसा रास्ता तलाश रही है जिससे नियमित रोजगार के अवसर बढ़ें और वर्तमान आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को भी सुरक्षित किया जा सके।
प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी सरकार की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होने के लिए निर्धारित अंकों में बढ़ोतरी की गई है। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करना है।
सुक्खू ने कौशल विकास कार्यक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल स्किल डेवलपमेंट को रोजगार से जोड़ देना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, पिछली व्यवस्था में कौशल विकास के नाम पर खर्च किए गए धन के उपयोग को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर प्रशिक्षण लेने वाले बच्चों की संख्या 15 थी, लेकिन वहां 50 बच्चों के नाम पर स्टाइपेंड दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं में यदि धनराशि का सही लाभार्थियों तक उपयोग नहीं हुआ है तो इसकी जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है। सरकार की कोशिश है कि प्रशिक्षण योजनाओं को वास्तविक रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ा जाए, ताकि युवाओं को केवल प्रमाणपत्र हासिल करने के बजाय रोजगार योग्य कौशल प्राप्त हो।
प्रश्नकाल में मत्स्य पालन से जुड़े मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री और विपक्ष के बीच सवाल-जवाब हुआ। विपक्ष के अनुपूरक प्रश्न के जवाब में सुक्खू ने स्पष्ट किया कि मछली पालकों को प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत धनराशि नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के मछुआरों को राज्य सरकार की राजीव गांधी मत्स्य योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इस योजना का लाभ पात्र मछुआरों को दिया जा रहा है और जिन लोगों को योजना के दायरे में रखा गया है, उन्हें निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने केंद्र की योजना और राज्य सरकार की योजना के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
विधानसभा में योजनाओं के नामकरण को लेकर मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच हल्का राजनीतिक तंज भी देखने को मिला। जयराम ठाकुर की ओर से सरकार पर योजनाओं के नाम अपने और गांधी परिवार से जुड़े नामों पर रखने का आरोप लगाए जाने के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनका नाम ‘सुखविंदर सिंह’ है, ‘सुख’ नहीं। उन्होंने जयराम ठाकुर के नाम का संदर्भ देते हुए कहा कि ‘जयराम’ को ‘जय हिंद’ नहीं कहा जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सुख’ शब्द खुशी या हैप्पीनेस की भावना को दर्शाता है।
इससे पहले अनुपूरक सवाल पूछते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार की रोजगार संबंधी घोषणाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस की 10 गारंटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान पहली कैबिनेट बैठक में एक लाख स्थायी सरकारी नौकरियां देने का वादा किया गया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस वादे की दिशा में अब तक कितनी प्रगति हुई है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उन्होंने सरकार से इन पदों को भरने की मांग की और आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू की गई कई योजनाओं को मौजूदा कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया या उनके नाम बदल दिए। उन्होंने कहा कि कुछ योजनाओं में सरकार ने अपना नाम जोड़ दिया, जबकि कुछ के नामों में गांधी परिवार से जुड़े नाम शामिल कर दिए गए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि योजनाओं का नाम बदलने के बजाय सरकार को उनकी उपयोगिता और लाभार्थियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के हित में शुरू की गई योजनाओं को राजनीतिक बदलाव के साथ समाप्त या परिवर्तित करने के बजाय उन्हें और मजबूत किया जाना चाहिए।
विधानसभा में हुई इस बहस के दौरान रोजगार, सरकारी भर्ती, आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य, मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस भर्ती, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं के नामकरण जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। मुख्यमंत्री ने जहां सरकार की ओर से की गई भर्तियों और रोजगार अवसरों का हवाला देते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं विपक्ष ने चुनावी वादों और खाली पदों का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को गति देने के साथ स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पदों को भरने और आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर नीति तैयार करने की घोषणा को सरकार की रोजगार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, विपक्ष की ओर से सरकार से उसके चुनावी वादों और रिक्त पदों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग जारी है।




