टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज की लंबी कतारों से लेकर दवाओं की कमी तक, विधायक पवन काजल ने सदन में उठाई स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज की लंबी कतारों से लेकर दवाओं की कमी तक, विधायक पवन काजल ने सदन में उठाई स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

विधानसभा में नियम-130 के तहत स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति पर चल रही चर्चा के दौरान कांगड़ा से विधायक पवन कुमार काजल ने टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर मुद्दे सदन के सामने रखे। उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज पर कांगड़ा के साथ-साथ आसपास के कई जिलों के मरीजों का भी इलाज निर्भर है, लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों को जांच, उपचार और अन्य सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

काजल के अनुसार टांडा मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 2000 से 2500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। छह जिलों से मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के दबाव के बावजूद कई महत्वपूर्ण जांचों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में एमआरआई की केवल एक मशीन है और मरीजों को जांच के लिए लगभग तीन महीने बाद की तारीख मिल रही है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए इतना लंबा इंतजार चिंता का विषय है।

विधायक ने अल्ट्रासाउंड की सुविधा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद मरीजों को करीब एक महीने तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी आवश्यक जांचों के लिए भी मरीजों को तत्काल सुविधा नहीं मिल पा रही और उन्हें बार-बार निर्धारित तारीख पर बुलाया जा रहा है।

काजल ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी से संबंधित मरीजों की संख्या भी काफी अधिक है। कई मरीज सुबह छह से सात बजे के बीच अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन पर्ची बनवाने और डॉक्टर से परामर्श लेने की प्रक्रिया में दोपहर हो जाती है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और सरकार से पंजीकरण व्यवस्था को तेज करने की मांग करते हुए कहा कि पर्ची बनाने के लिए तीन से चार अतिरिक्त काउंटर किए जाने चाहिए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को घंटों लाइन में खड़ा न रहना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए काजल ने टांडा मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की कार्यप्रणाली का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने चंबा जिले से संबंधित एक मामले का उल्लेख करते हुए 4 अगस्त 2026 को प्रकाशित ‘पंजाब केसरी’ की खबर का हवाला दिया। उनके अनुसार खबर में बताया गया था कि दो छोटे बच्चों को ऑपरेशन के लिए करीब छह महीने बाद की तारीख दी गई।

उन्होंने सदन में ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष मुनीष सरोच के हवाले से अस्पताल की पुरानी मशीनरी का जिक्र किया। काजल ने कहा कि यदि किसी प्रमुख चिकित्सा संस्थान में उपकरण पुराने हो चुके हैं और उनकी वजह से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है तो सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और सरकार से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने की मांग की।

काजल ने टांडा मेडिकल कॉलेज में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में एजीथ्रोमाइसिन, अमोक्सिसिलिन और पैंटाप्राजोल जैसी सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता को लेकर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को यदि जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ें तो इसका सीधा आर्थिक बोझ उनके परिवारों पर पड़ता है।

उन्होंने विशेष रूप से हृदय रोगियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले ऐसे मरीजों को एक महीने की दवाएं अस्पताल से उपलब्ध करवाई जाती थीं, लेकिन अब कई मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। उनके मुताबिक कुछ मरीजों को चार से पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से अस्पताल में आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

विधायक ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक सुविधाओं की चर्चा हो रही है, लेकिन इसके साथ-साथ अस्पतालों में रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि मरीजों को सामान्य जांच, दवा और समय पर इलाज के लिए परेशान होना पड़े तो स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

काजल ने टांडा मेडिकल कॉलेज परिसर में बहुमंजिला पार्किंग बनाने की मांग भी सदन में रखी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं, जिसके कारण पार्किंग की समस्या बनी रहती है। उन्होंने अस्पताल में आने वाले करीब 400 से 500 तीमारदारों के लिए ठहरने की सुविधा विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि दूरदराज के जिलों से आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए अस्पताल के आसपास रहने की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

चर्चा के दौरान काजल ने टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टेंट की खरीद से संबंधित सामने आई खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सामग्री और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध मरीजों की जिंदगी और सरकारी धन के इस्तेमाल से है।

काजल ने प्रशिक्षु डॉक्टरों और नर्सों से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने अस्पताल में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि चिकित्सा संस्थान में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को भी सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधाओं का ध्यान रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

विधायक ने छह महीने बाद सर्जरी की तारीख दिए जाने और कांगड़ा सिविल अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं होने से संबंधित खबरों का भी सदन में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि विशेषज्ञ और चिकित्सकीय स्टाफ उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को फिर भी ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है तो इसके कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए।

काजल ने हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को उपचार के खर्च से राहत देना है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पात्र मरीजों को इन योजनाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो और अस्पतालों में योजनाओं से संबंधित प्रक्रियाएं सरल हों।

उन्होंने पूर्व सरकार के समय खोले गए कुछ स्वास्थ्य संस्थानों को बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया। काजल ने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में खोले गए स्वास्थ्य संस्थानों का उद्देश्य स्थानीय लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना था। ऐसे संस्थानों को बंद करने या उनकी सेवाओं को सीमित करने से आम लोगों को फिर बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

कांगड़ा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि कांगड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से उपयोग में नहीं है और वहां आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सरकार से इन कमियों को दूर करने की मांग की।

उन्होंने त्यारा के आदर्श स्वास्थ्य संस्थान का मामला भी सदन में उठाया। काजल के अनुसार इस संस्थान में कुल 10 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से आठ पद भरे हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक की उपलब्धता नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल पद भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाना भी जरूरी है। उन्होंने सरकार से वहां विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति करने की मांग की।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों के बाद काजल ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उनके विधानसभा क्षेत्र में कहीं कोई विकास कार्य हुआ है तो उन्हें बताया जाए।

काजल ने देहरा और नादौन क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में कथित तौर पर काम न होने का मुद्दा उठाया। इस दौरान सदन में कुछ समय के लिए शोर-शराबे की स्थिति भी बनी।

कुल मिलाकर, पवन कुमार काजल ने विधानसभा में टांडा मेडिकल कॉलेज से लेकर कांगड़ा क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों तक कई समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने जांच सुविधाओं में लंबी प्रतीक्षा, दवाओं की उपलब्धता, पुराने उपकरण, मरीजों और तीमारदारों के लिए सुविधाओं, अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ मरीजों को समय पर जांच, दवा और उपचार उपलब्ध करवाना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।