एग फ्रीजिंग का बना रही हैं प्लान? उम्र से लेकर एक्सरसाइज तक इन जरूरी बातों को पहले जान लें

एग फ्रीजिंग का बना रही हैं प्लान? उम्र से लेकर एक्सरसाइज तक इन जरूरी बातों को पहले जान लें

बदलती लाइफस्टाइल और करियर को लेकर बढ़ती प्राथमिकताओं के बीच कई महिलाएं मातृत्व को कुछ समय के लिए टालने का फैसला लेती हैं। ऐसे में एग फ्रीजिंग यानी अंडों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित करके रखने की तकनीक एक विकल्प के तौर पर सामने आती है। इस प्रक्रिया में महिला की ओवरी से परिपक्व अंडों को निकाला जाता है और उन्हें विशेष तकनीक की मदद से फ्रीज करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाता है। बाद में जरूरत पड़ने पर इन अंडों को इस्तेमाल करने की कोशिश की जा सकती है।

हालांकि, एग फ्रीजिंग को भविष्य में प्रेग्नेंसी की गारंटी समझना सही नहीं है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मुख्य रूप से अंडों को उस उम्र में सुरक्षित रखना है, जब उनकी क्वालिटी अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है। इसके बावजूद बाद में गर्भधारण की सफलता कई दूसरे कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए अगर आप एग फ्रीजिंग के बारे में सोच रही हैं, तो सिर्फ उम्र देखकर फैसला करने के बजाय डॉक्टर से अपनी स्थिति का आकलन करवाना जरूरी है।

आखिर एग फ्रीजिंग की जरूरत क्यों पड़ सकती है?

महिलाओं की फर्टिलिटी पर उम्र का सीधा प्रभाव पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या में कमी आने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता में भी बदलाव हो सकता है। इसी वजह से कुछ महिलाएं कम उम्र में अपने अंडों को संरक्षित रखने के विकल्प पर विचार करती हैं, ताकि भविष्य में परिवार बढ़ाने की योजना बनाते समय उनके पास एक अतिरिक्त विकल्प मौजूद रहे।

करियर, शादी में देरी, व्यक्तिगत परिस्थितियां या भविष्य में मां बनने की योजना को कुछ साल आगे बढ़ाने जैसे अलग-अलग कारणों से महिलाएं एग फ्रीजिंग के बारे में जानकारी ले सकती हैं। लेकिन हर महिला के लिए इसकी जरूरत और संभावित फायदा अलग हो सकता है। इसलिए इसे ट्रेंड या सामान्य प्रक्रिया मानकर कराने के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल जरूरत को ध्यान में रखना बेहतर होता है।

कौन सी उम्र एग फ्रीजिंग के लिए बेहतर मानी जाती है?

एग फ्रीजिंग में उम्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सामान्य तौर पर कम उम्र में फ्रीज किए गए अंडों की गुणवत्ता बेहतर होने की संभावना रहती है। उम्र बढ़ने के साथ अंडों की गुणवत्ता और उपलब्ध संख्या दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

करीब 30 वर्ष की उम्र के आसपास एग फ्रीजिंग कराने पर कई महिलाओं में अंडों की क्वालिटी अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि 30 साल के बाद एग फ्रीजिंग नहीं कराई जा सकती। 35 वर्ष के बाद भी यह विकल्प मौजूद रहता है, लेकिन इस उम्र में फैसला महिला की ओवेरियन रिजर्व, मेडिकल हिस्ट्री और भविष्य की प्रेग्नेंसी प्लानिंग जैसे पहलुओं को देखकर लेना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

40 वर्ष की उम्र के आसपास भी एग फ्रीजिंग संभव हो सकती है, लेकिन इस उम्र में पर्याप्त संख्या में अच्छे और परिपक्व अंडे प्राप्त होने की संभावना कम हो सकती है। इसलिए एग फ्रीजिंग की योजना बनाते समय केवल यह सवाल नहीं होना चाहिए कि ‘किस उम्र में कराया जा सकता है’, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि उस उम्र में इससे संभावित लाभ कितना हो सकता है।

सिर्फ अंडे जमा करना काफी नहीं होता

एग फ्रीजिंग के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी यह हो सकती है कि अंडे सुरक्षित कर लेने के बाद भविष्य में बच्चा होना निश्चित हो जाता है। ऐसा नहीं है। फ्रीज किए गए सभी अंडों का भविष्य में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो पाए, यह जरूरी नहीं है।

अंडों की संख्या, उनकी परिपक्वता, फ्रीजिंग के समय महिला की उम्र और बाद में अंडों को पिघलाने तथा अन्य प्रजनन तकनीकों के दौरान उनकी स्थिति जैसे कई पहलू परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर महिला की स्थिति के आधार पर यह समझने की कोशिश करते हैं कि कितने अंडों को संरक्षित करना उचित हो सकता है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य भविष्य के लिए संभावित विकल्प सुरक्षित करना है, न कि भविष्य की गर्भावस्था को निश्चित करना।

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में क्या होता है?

एग फ्रीजिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर महिला की प्रजनन क्षमता से जुड़ी जांच कर सकते हैं। इसके बाद दवाओं और हार्मोनल इंजेक्शन की मदद से ओवरी में एक से ज्यादा अंडों के विकास को बढ़ावा दिया जाता है। इस दौरान नियमित जांच के जरिए अंडों के विकास और शरीर की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जाती है।

जब अंडे पर्याप्त रूप से विकसित हो जाते हैं, तब मेडिकल प्रक्रिया के जरिए उन्हें ओवरी से निकाला जाता है। इसके बाद उपयुक्त अंडों को विशेष तकनीक से फ्रीज करके संरक्षित किया जाता है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन अंडों को पिघलाकर आगे की असिस्टेड रिप्रोडक्टिव प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है, क्योंकि दवाओं के प्रति हर महिला के शरीर की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

प्रक्रिया के दौरान एक्सरसाइज को लेकर भी रहें सावधान

एग फ्रीजिंग के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों को देखते हुए शारीरिक गतिविधियों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी हो सकता है। दवाओं के कारण ओवरी में कई अंडों का विकास होता है और इस दौरान ओवरी कुछ समय के लिए सामान्य अवस्था की तुलना में बड़ी और संवेदनशील हो सकती हैं।

ऐसे में बहुत ज्यादा तेज दौड़ना, लगातार कूदना, भारी वजन उठाना या ऐसे वर्कआउट करना जिनमें शरीर को अचानक मोड़ना या ज्यादा जोर लगाना पड़े, कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी जा सकती है। खासतौर पर जब ओवरी में अंडे विकसित हो रहे हों, तब शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना बेहतर माना जाता है।

हल्की वॉक या कम मेहनत वाली गतिविधियां कुछ महिलाओं के लिए संभव हो सकती हैं, लेकिन यह पूरी तरह उनकी स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। इसलिए इंटरनेट पर पढ़ी किसी सामान्य एक्सरसाइज रूटीन को अपनाने के बजाय अपने डॉक्टर से पूछना बेहतर रहेगा।

अंडे निकालने के बाद भी शरीर को दें पर्याप्त आराम

एग रिट्रीवल यानी ओवरी से अंडे निकालने की प्रक्रिया के आसपास शरीर को आराम की जरूरत हो सकती है। इस समय बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करने के बजाय शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

अगर डॉक्टर ने कुछ दिनों तक भारी काम या व्यायाम से बचने को कहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्सरसाइज दोबारा कब शुरू करनी है, यह इस बात पर निर्भर कर सकता है कि प्रक्रिया के बाद शरीर किस तरह रिकवर कर रहा है।

किसी महिला के लिए सामान्य गतिविधियां जल्दी शुरू करना संभव हो सकता है, जबकि किसी अन्य महिला को थोड़ा अधिक आराम की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए इस मामले में कोई एक नियम सभी पर लागू नहीं किया जा सकता।

एग फ्रीजिंग से पहले किन सवालों पर करें डॉक्टर से चर्चा?

एग फ्रीजिंग का फैसला लेने से पहले डॉक्टर से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जा सकते हैं। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी उम्र और मेडिकल स्थिति को देखते हुए यह प्रक्रिया आपके लिए कितनी उपयोगी हो सकती है।

इसके अलावा ओवेरियन रिजर्व, संभावित रूप से मिलने वाले परिपक्व अंडों की संख्या, प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाएं, संभावित साइड इफेक्ट्स और आगे चलकर इन अंडों के इस्तेमाल की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेना चाहिए।

यह भी समझना जरूरी है कि कितने अंडों को फ्रीज करना पर्याप्त माना जा सकता है और भविष्य में सफल गर्भधारण की संभावना किन चीजों पर निर्भर करेगी। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही महिला अपनी परिस्थितियों के अनुसार ज्यादा स्पष्ट फैसला ले सकती है।

हर महिला के लिए एक जैसा फैसला सही नहीं

एग फ्रीजिंग को लेकर कोई एक निश्चित उम्र या संख्या सभी महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती। किसी महिला के लिए कम उम्र में अंडे फ्रीज करना उपयोगी विकल्प हो सकता है, जबकि किसी अन्य के मामले में डॉक्टर दूसरे विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।

इसलिए सोशल मीडिया, दोस्तों या इंटरनेट पर उपलब्ध अनुभवों के आधार पर फैसला करने से बचना चाहिए। आपकी उम्र, ओवेरियन रिजर्व, मेडिकल हिस्ट्री और भविष्य की फैमिली प्लानिंग को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।

एग फ्रीजिंग भविष्य की फैमिली प्लानिंग के लिए एक मेडिकल विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे प्रेग्नेंसी की पक्की गारंटी समझना सही नहीं है। कम उम्र में अंडों की गुणवत्ता बेहतर होने की संभावना हो सकती है, इसलिए इस विकल्प पर विचार करने वाली महिलाओं के लिए समय पर विशेषज्ञ से बातचीत करना महत्वपूर्ण है। सही जानकारी, मेडिकल जांच और विशेषज्ञ की सलाह के बाद लिया गया फैसला ही सबसे बेहतर तरीका हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और उपलब्ध विशेषज्ञ विचारों पर आधारित है। एग फ्रीजिंग एक मेडिकल प्रक्रिया है और इसकी जरूरत, उपयुक्त उम्र तथा संभावित परिणाम हर महिला में अलग हो सकते हैं। किसी भी निर्णय से पहले योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट या आईवीएफ विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह जरूर लें।

(Photo : AI Generated)