आगामी परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों की तैयारियों के बीच पंजाब बाल अधिकार आयोग की वाइस चेयरपर्सन गुंजीत रुचि बावा ने स्कूल ऑफ एमिनेंस, ढोलेवाल में विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। ‘नन्हे कदम’ पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के 390 विद्यार्थियों को कार्डबोर्ड राइटिंग बोर्ड और पेन वितरित किए गए। विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई गई कार्डबोर्ड सामग्री आस एहसास एनजीओ की ओर से प्रायोजित की गई थी।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और किसी भी तरह की परेशानी अथवा असुरक्षा की स्थिति में मदद लेने के लिए प्रेरित करना भी रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुंजीत रुचि बावा के साथ बातचीत की और बाल अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा तथा परीक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी हासिल की।
पढ़ाई के साथ अधिकारों की जानकारी भी जरूरी
विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए गुंजीत रुचि बावा ने कहा कि बच्चों के लिए शिक्षा जितनी जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण उनके लिए अपने अधिकारों को जानना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, सम्मान के साथ जीवन जीने और किसी भी प्रकार के शोषण अथवा दुर्व्यवहार से सुरक्षा पाने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को यह समझना चाहिए कि यदि कभी उन्हें किसी परेशानी का सामना करना पड़े तो उस स्थिति में चुप रहना समाधान नहीं है। उन्हें अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बात साझा करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे किसी भी प्रकार के गलत व्यवहार को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता लें।
उन्होंने कहा कि बच्चों में जागरूकता पैदा होने से न केवल वे स्वयं सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि अपने आसपास के अन्य बच्चों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। गुंजीत रुचि बावा ने विद्यार्थियों को बताया कि यदि किसी बच्चे को किसी भी तरह की परेशानी, असुरक्षा, उत्पीड़न, दुर्व्यवहार या संकट का सामना करना पड़ता है तो सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन का सहारा लिया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे 1098 हेल्पलाइन नंबर को याद रखें और अपने दोस्तों तथा जरूरतमंद बच्चों को भी इसके बारे में बताएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह विश्वास होना चाहिए कि मुश्किल परिस्थितियों में उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें सहायता उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित संस्थाएं काम कर रही हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि किसी समस्या के बारे में समय रहते जानकारी देना कई बार बड़ी परेशानी को टाल सकता है। इसलिए बच्चों को अपनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूक और सतर्क रहना चाहिए।
परीक्षा को लेकर तनाव न लेने की सलाह
गुंजीत रुचि बावा ने आगामी परीक्षाओं को देखते हुए विद्यार्थियों को परीक्षा के दबाव से बचने और आत्मविश्वास के साथ तैयारी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनके परिणाम को लेकर अत्यधिक तनाव लेना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई, समय का उचित प्रबंधन और पर्याप्त आराम के साथ अपनी तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को समझाया कि हर विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है और किसी एक परीक्षा के परिणाम से उसके पूरे भविष्य का निर्धारण नहीं होता।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और अपनी मेहनत पर विश्वास रखें। यदि पढ़ाई से संबंधित किसी विषय को लेकर परेशानी हो तो शिक्षकों से सवाल पूछने में झिझक महसूस न करें।
‘नन्हे कदम’ पहल का उद्देश्य बच्चों को मजबूत बनाना
इस अवसर पर गुंजीत रुचि बावा ने कहा कि ‘नन्हे कदम’ पहल बच्चों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए छोटी-छोटी आवश्यक चीजों की जरूरत होती है और ऐसी सामग्री उपलब्ध करवाना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि समाज और विभिन्न संस्थाएं बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए उनके साथ खड़ी हैं। स्टेशनरी वितरण के साथ बाल अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता को जोड़कर कार्यक्रम को अधिक व्यापक बनाया गया।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समाज, कानून, अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे वे भविष्य में अधिक आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
390 विद्यार्थियों को मिली उपयोगी सामग्री
कार्यक्रम के दौरान स्कूल के 390 विद्यार्थियों को कार्डबोर्ड राइटिंग बोर्ड और पेन वितरित किए गए। परीक्षा के दौरान लिखने और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में उपयोगी इन सामग्रियों को आस एहसास एनजीओ ने प्रायोजित किया।
स्टेशनरी वितरण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और गुंजीत रुचि बावा की ओर से दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को अपने अनुभव साझा करने और सवाल पूछने का भी अवसर मिला। बातचीत के दौरान उन्हें समझाया गया कि स्कूल केवल शिक्षा प्राप्त करने की जगह नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
बच्चों की समस्याओं को समय पर समझना जरूरी
गुंजीत रुचि बावा ने कहा कि बच्चों की कई समस्याएं ऐसी होती हैं जिन्हें वे आसानी से किसी के साथ साझा नहीं कर पाते। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों के व्यवहार और उनकी भावनात्मक स्थिति पर ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा अचानक पढ़ाई में रुचि कम दिखाने लगे, स्कूल आने से बचने लगे या उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव नजर आए तो उसके साथ बातचीत की जानी चाहिए। बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनना और उनकी समस्या को समझना अधिक प्रभावी तरीका है।
उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें बच्चे बिना डर के अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों का भरोसा जीतना उनकी सुरक्षा की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं है। एक शिक्षित व्यक्ति वही है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करे और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे।
गुंजीत रुचि बावा ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सहपाठियों के साथ सहयोग और सम्मान का व्यवहार करें। यदि उन्हें किसी बच्चे के साथ गलत व्यवहार होता दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें और किसी भरोसेमंद वयस्क को इसकी जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही सही और गलत के बीच अंतर समझाने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
विद्यार्थियों को मेहनत और सकारात्मक सोच का संदेश
गुंजीत रुचि बावा ने विद्यार्थियों को आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे पूरी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षाओं की तैयारी करें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें अपनी तुलना दूसरों से करने के बजाय अपनी पिछली उपलब्धियों को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी एक परीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं कि विद्यार्थी आगे सफल नहीं हो सकता। जरूरी है कि विद्यार्थी अपनी गलतियों से सीखें और लगातार आगे बढ़ते रहें।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान मानसिक दबाव महसूस होने पर परिवार, शिक्षकों या भरोसेमंद लोगों से बातचीत करनी चाहिए।
स्कूल प्रबंधन ने पहल की सराहना की
स्कूल ऑफ एमिनेंस, ढोलेवाल की प्रिंसिपल हरदीप कौर और स्कूल स्टाफ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाने और उन्हें बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए आयोजित इस पहल की सराहना की।
स्कूल स्टाफ ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से बाहर की महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाने में मदद करते हैं। विशेष रूप से बाल अधिकारों और हेल्पलाइन जैसी सुविधाओं के बारे में जागरूकता बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करें, लेकिन साथ ही अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहें।
बच्चों को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम
‘नन्हे कदम’ के तहत आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा और बाल सुरक्षा को एक साथ जोड़ने का प्रयास रहा। जहां एक ओर 390 विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए उपयोगी स्टेशनरी उपलब्ध करवाई गई, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने अधिकारों, सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर सहायता हासिल करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।
गुंजीत रुचि बावा ने कहा कि बच्चों को मजबूत बनाने के लिए केवल आर्थिक या शैक्षणिक सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपनी बात कहने का अधिकार, सही जानकारी और मुश्किल परिस्थितियों में सहायता लेने का भरोसा भी मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही भविष्य के समाज का निर्माण करेंगे। इसलिए उन्हें शिक्षित करने के साथ-साथ जागरूक, संवेदनशील, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी बनाना भी समाज की साझा जिम्मेदारी है। ‘नन्हे कदम’ जैसी पहल इसी सोच के साथ बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास है।




