चेपॉक में छाया वैभव सूर्यवंशी का क्रेज, 15 साल के बल्लेबाज को देखने उमड़े 12 हजार से ज्यादा दर्शक

चेपॉक में छाया वैभव सूर्यवंशी का क्रेज, 15 साल के बल्लेबाज को देखने उमड़े 12 हजार से ज्यादा दर्शक

चेन्नई का एम चिदंबरम स्टेडियम यानी चेपॉक रविवार को एक घरेलू क्रिकेट मुकाबले के दौरान उस नजारे का गवाह बना, जो आमतौर पर बड़े अंतरराष्ट्रीय या आईपीएल मैचों में देखने को मिलता है। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से बल्लेबाजी करने उतरे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को देखने के लिए हजारों की संख्या में क्रिकेट प्रशंसक स्टेडियम पहुंच गए। जैसे ही दर्शकों को पता चला कि युवा बल्लेबाज क्रीज पर उतर चुका है, चेपॉक में मौजूद भीड़ का उत्साह अचानक बढ़ गया।

स्थिति ऐसी बनी कि तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन को दर्शकों के लिए तीन अतिरिक्त स्टैंड खोलने पड़े। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुकाबले के दौरान 12 हजार से अधिक दर्शक स्टेडियम में मौजूद रहे। घरेलू क्रिकेट के किसी मुकाबले के लिए इस तरह की दर्शक संख्या अपने आप में खास रही, क्योंकि दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट के मैचों में आम तौर पर इतनी बड़ी भीड़ नजर नहीं आती।

वैभव की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके आउट होते ही स्टेडियम से दर्शकों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया। यानी बड़ी संख्या में क्रिकेट फैंस खास तौर पर युवा बल्लेबाज की बल्लेबाजी देखने के लिए चेपॉक पहुंचे थे।

वैभव ने खेली 37 गेंदों की तेज पारी

साउथ जोन के खिलाफ फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने भले ही बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने 37 गेंदों का सामना करते हुए 44 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से पांच चौके और एक छक्का निकला।

उनकी पारी की सबसे खास बातों में से एक साउथ जोन के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के खिलाफ लगाया गया छक्का रहा। वैभव ने सिराज की गेंद को मिड-ऑफ के ऊपर से खेलते हुए सीधे सीमा रेखा के पार पहुंचा दिया। युवा बल्लेबाज के इस शॉट पर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने जमकर शोर मचाया।

करीब 93 मिनट तक क्रीज पर रहने के बाद वैभव की पारी समाप्त हुई। उन्हें चामा मिलिंद ने कैच आउट किया। जैसे ही उनका विकेट गिरा, चेपॉक के स्टैंड से दर्शकों के बाहर निकलने का सिलसिला तेज हो गया। कुछ ही समय में स्टेडियम में पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आई।

चेपॉक में लगा ‘वैभव-वैभव’ का नारा

चेन्नई को लंबे समय से महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेट गढ़ के तौर पर देखा जाता है। चेपॉक में धोनी और चेन्नई सुपर किंग्स के प्रति फैंस की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में दलीप ट्रॉफी के फाइनल में एक युवा खिलाड़ी के लिए दर्शकों का इस तरह एकजुट होना काफी चर्चा में रहा।

दिलचस्प बात यह भी थी कि वैभव ईस्ट जोन की तरफ से खेल रहे थे और मुकाबला साउथ जोन के खिलाफ था। इसके बावजूद स्थानीय दर्शकों ने टीम या क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर वैभव को सपोर्ट किया। उनके चौके और छक्के पर दर्शकों की आवाज लगातार सुनाई देती रही।

इससे साफ हुआ कि वैभव सूर्यवंशी का नाम अब सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित नहीं रह गया है। उनकी बल्लेबाजी को देखने के लिए लोग अलग से स्टेडियम पहुंचने लगे हैं।

बेंगलुरु से चेन्नई क्यों आया फाइनल?

दलीप ट्रॉफी का यह फाइनल मूल रूप से बेंगलुरु में खेला जाना था। मुकाबले के लिए बीसीसीआई की नेशनल क्रिकेट एकेडमी के मैदान को चुना गया था। हालांकि वहां बड़ी संख्या में दर्शकों को बैठाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इसी वजह से फाइनल को चेन्नई के एम चिदंबरम स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया।

चेपॉक जैसे बड़े और ऐतिहासिक मैदान में मुकाबला होने से दर्शकों के लिए सुविधाएं बेहतर रहीं। लेकिन आयोजकों को शायद यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि एक घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में एक युवा बल्लेबाज को देखने के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे।

वैभव की बल्लेबाजी शुरू होने के बाद अतिरिक्त स्टैंड खोलने की जरूरत पड़ना इसी बढ़ती लोकप्रियता का संकेत माना गया।

कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भी की तारीफ

वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रियता और प्रभाव पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर कृष्णमाचारी श्रीकांत भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने युवा बल्लेबाज की क्षमता की तारीफ करते हुए कहा था कि वैभव के अंदर विश्व क्रिकेट में बड़ा नाम बनने की क्षमता मौजूद है।

श्रीकांत ने वैभव को सिर्फ उनके आंकड़ों के आधार पर आंकने से इनकार किया। उनका मानना है कि इस उम्र में जिस तरह वह क्रिकेट के प्रति दर्शकों की रुचि बढ़ा रहे हैं, वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने एक दिलचस्प बात साझा करते हुए कहा था कि वैभव की वजह से उनकी पत्नी भी दलीप ट्रॉफी देखने लगी हैं। श्रीकांत के मुताबिक, युवा बल्लेबाज घरेलू क्रिकेट की ओर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि वैभव आगे चलकर टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता को फिर से बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। उनके इस बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वैभव को लेकर क्रिकेट जगत में उम्मीदें कितनी बड़ी हैं।

सिर्फ स्टेडियम नहीं, टीवी पर भी दिखा ‘सूर्यवंशी इफेक्ट’

वैभव सूर्यवंशी का असर सिर्फ मैदान में मौजूद दर्शकों तक सीमित नहीं रहा है। उनकी लोकप्रियता ने घरेलू और भारत-ए क्रिकेट से जुड़े मुकाबलों की दर्शक दिलचस्पी को भी प्रभावित किया है।

श्रीलंका में 9 से 21 जून के बीच भारत-ए, अफगानिस्तान और श्रीलंका के बीच त्रिकोणीय सीरीज खेली गई थी। इस सीरीज का भी टेलीकास्ट हुआ था, जबकि इस स्तर के मुकाबलों को आम तौर पर टीवी कवरेज नहीं मिलती। वैभव के इस क्रिकेटिंग सफर से जुड़ाव ने उस सीरीज को भी लोगों की नजर में लाने में मदद की।

भारत के लिए भी वैभव अब तक छह टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं। इन मैचों में उन्होंने 189.22 के स्ट्राइक रेट से 193 रन बनाए हैं। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट प्रशंसकों के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाया है।

आईपीएल में भी दिख चुका है जबरदस्त फैन क्रेज

वैभव सूर्यवंशी के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उनके नाम ने दर्शकों को आकर्षित किया हो। आईपीएल 2026 के दौरान भी उनकी लोकप्रियता का बड़ा उदाहरण देखने को मिला था।

राजस्थान रॉयल्स से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया गया था कि वैभव की नंबर-3 जर्सी की बिक्री ने कई बड़े भारतीय सितारों को पीछे छोड़ दिया। उनकी जर्सी की मांग इतनी ज्यादा रही कि धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के साथ उनकी लोकप्रियता की तुलना होने लगी।

आईपीएल 2026 में वैभव ने अपने प्रदर्शन से भी इस चर्चा को मजबूत किया। उन्होंने टूर्नामेंट में 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप हासिल करने के साथ-साथ मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर सहित कई पुरस्कार अपने नाम किए। उनकी बल्लेबाजी का आक्रामक अंदाज लगातार चर्चा में रहा।

इसी सीजन में उन्होंने छक्कों के मामले में क्रिस गेल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने की उपलब्धि हासिल की। इतनी कम उम्र में इस तरह के रिकॉर्ड और पुरस्कार हासिल करने के बाद उनका फैन बेस तेजी से बढ़ा।

एक विकेट और खाली होने लगा चेपॉक

दलीप ट्रॉफी फाइनल में वैभव की 44 रन की पारी आंकड़ों के लिहाज से भले ही शतक या बड़ी पारी नहीं रही, लेकिन इस छोटी पारी ने उनकी लोकप्रियता का बड़ा उदाहरण जरूर पेश किया। मैच के दौरान हजारों दर्शकों का मैदान पहुंचना और अतिरिक्त स्टैंड खोले जाना घरेलू क्रिकेट में असाधारण दृश्य रहा।

सबसे दिलचस्प तस्वीर तब सामने आई जब चामा मिलिंद की गेंद पर वैभव का कैच आउट हुआ। उनके आउट होते ही बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम से बाहर जाने लगे। इससे यह साफ संकेत मिला कि रविवार की सुबह चेपॉक में मौजूद हजारों क्रिकेट प्रेमियों का मुख्य आकर्षण दलीप ट्रॉफी का फाइनल नहीं, बल्कि वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी थी।

चेन्नई में, जहां धोनी की लोकप्रियता लंबे समय से क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा है, वहां एक 15 वर्षीय बल्लेबाज के नाम पर इस तरह का शोर होना वैभव के बढ़ते स्टारडम को दिखाता है। घरेलू क्रिकेट में दर्शकों को खींचने से लेकर आईपीएल में रिकॉर्ड प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने तक, वैभव सूर्यवंशी का सफर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है।

चेपॉक में रविवार को जो हुआ, वह इसी बढ़ती लोकप्रियता की एक और तस्वीर बन गया। वैभव ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिके, लेकिन उनकी 93 मिनट की मौजूदगी ने स्टेडियम को ऐसा माहौल दे दिया, जिसे लंबे समय तक याद किया जा सकता है।